गया में पितृपक्ष मेला 2026 के दौरान एक सफाईकर्मी ने ईमानदारी की मिसाल पेश की। नालंदा से आई श्रद्धालु अर्चना कुमारी की कान की बाली पिंडदान के समय रबर डैम में गिर गई थी। सफाईकर्मी जितेंद्र मांझी ने उसे खोजकर वापस लौटा दिया। अर्चना कुमारी अपने पितरों का पिंडदान करने गयाजी पहुंची थीं। रबर डैम क्षेत्र में पूजा के दौरान उनकी बाली गिर गई। पूजा खत्म होने पर जब उन्हें बाली नहीं मिली तो उन्होंने आसपास काफी देर तक खोजा, लेकिन वह नहीं मिली। सफाईकर्मी को डैम में बाली मिली, महिला को सौंपा सफाईकर्मी जितेंद्र मांझी को रबर डैम में बाली मिली। उन्होंने उसे अर्चना कुमारी को सौंप दिया। अपनी खोई हुई बाली वापस पाकर अर्चना बहुत खुश हुईं। उन्होंने जितेंद्र की ईमानदारी की तारीफ करते हुए कहा कि उन्हें इतनी भीड़ में बाली वापस मिलने की उम्मीद नहीं थी। अर्चना कुमारी बोलीं- जितेंद्र की ईमानदारी से वापस मिला सामान अर्चना कुमारी ने कहा कि यदि सफाई कर्मी जितेंद्र मांझी ईमानदारी नहीं दिखाते और बाली को अपने पास रख लेते तो शायद उनका सामान कभी वापस नहीं मिल पाता। उन्होंने कहा कि गयाजी में पितरों का तर्पण करने आई थीं, लेकिन यहां उन्हें इंसानियत और ईमानदारी का भी एक बड़ा उदाहरण देखने को मिला। उन्होंने सफाई कर्मी जितेंद्र मांझी का आभार जताते हुए कहा कि उनका यह कार्य हमेशा याद रहेगा। जितेंद्र बोले- श्रद्धालुओं की मदद करना भी हमारी जिम्मेदारी सफाईकर्मी जितेंद्र मांझी ने कहा कि पितृपक्ष मेले में देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु अपने पूर्वजों का तर्पण और पिंडदान करने आते हैं। सफाई व्यवस्था को बेहतर बनाए रखना उनकी जिम्मेदारी है, लेकिन श्रद्धालुओं की मदद करना भी उतना ही जरूरी है। रबर डैम क्षेत्र में पिंडदान के दौरान महिला की बाली गिर गई थी और महिला चिल्लाने लगी और खोजने के लिए हमसे गुहार लगाने लगी इसके बाद हमने काफी खोजबीन करते हुए बाली को सुरक्षित निकालकर महिला को सौंप दी। उन्होंने कहा कि मेले में भीड़ काफी अधिक रहती है। ऐसे में कई बार श्रद्धालुओं का सामान गिर जाता है। यदि किसी को ऐसी कोई वस्तु मिले तो उसे अपने पास रखने के बजाय उसके वास्तविक मालिक तक पहुंचाना चाहिए। यही सच्ची इंसानियत और सेवा है। उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की कि वे मेले में भीड़ के दौरान अपने मोबाइल, पर्स, आभूषण और अन्य कीमती सामान का विशेष ध्यान रखें। गया में पितृपक्ष मेला 2026 के दौरान एक सफाईकर्मी ने ईमानदारी की मिसाल पेश की। नालंदा से आई श्रद्धालु अर्चना कुमारी की कान की बाली पिंडदान के समय रबर डैम में गिर गई थी। सफाईकर्मी जितेंद्र मांझी ने उसे खोजकर वापस लौटा दिया। अर्चना कुमारी अपने पितरों का पिंडदान करने गयाजी पहुंची थीं। रबर डैम क्षेत्र में पूजा के दौरान उनकी बाली गिर गई। पूजा खत्म होने पर जब उन्हें बाली नहीं मिली तो उन्होंने आसपास काफी देर तक खोजा, लेकिन वह नहीं मिली। सफाईकर्मी को डैम में बाली मिली, महिला को सौंपा सफाईकर्मी जितेंद्र मांझी को रबर डैम में बाली मिली। उन्होंने उसे अर्चना कुमारी को सौंप दिया। अपनी खोई हुई बाली वापस पाकर अर्चना बहुत खुश हुईं। उन्होंने जितेंद्र की ईमानदारी की तारीफ करते हुए कहा कि उन्हें इतनी भीड़ में बाली वापस मिलने की उम्मीद नहीं थी। अर्चना कुमारी बोलीं- जितेंद्र की ईमानदारी से वापस मिला सामान अर्चना कुमारी ने कहा कि यदि सफाई कर्मी जितेंद्र मांझी ईमानदारी नहीं दिखाते और बाली को अपने पास रख लेते तो शायद उनका सामान कभी वापस नहीं मिल पाता। उन्होंने कहा कि गयाजी में पितरों का तर्पण करने आई थीं, लेकिन यहां उन्हें इंसानियत और ईमानदारी का भी एक बड़ा उदाहरण देखने को मिला। उन्होंने सफाई कर्मी जितेंद्र मांझी का आभार जताते हुए कहा कि उनका यह कार्य हमेशा याद रहेगा। जितेंद्र बोले- श्रद्धालुओं की मदद करना भी हमारी जिम्मेदारी सफाईकर्मी जितेंद्र मांझी ने कहा कि पितृपक्ष मेले में देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु अपने पूर्वजों का तर्पण और पिंडदान करने आते हैं। सफाई व्यवस्था को बेहतर बनाए रखना उनकी जिम्मेदारी है, लेकिन श्रद्धालुओं की मदद करना भी उतना ही जरूरी है। रबर डैम क्षेत्र में पिंडदान के दौरान महिला की बाली गिर गई थी और महिला चिल्लाने लगी और खोजने के लिए हमसे गुहार लगाने लगी इसके बाद हमने काफी खोजबीन करते हुए बाली को सुरक्षित निकालकर महिला को सौंप दी। उन्होंने कहा कि मेले में भीड़ काफी अधिक रहती है। ऐसे में कई बार श्रद्धालुओं का सामान गिर जाता है। यदि किसी को ऐसी कोई वस्तु मिले तो उसे अपने पास रखने के बजाय उसके वास्तविक मालिक तक पहुंचाना चाहिए। यही सच्ची इंसानियत और सेवा है। उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की कि वे मेले में भीड़ के दौरान अपने मोबाइल, पर्स, आभूषण और अन्य कीमती सामान का विशेष ध्यान रखें।

