पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI और उसके इंटेलिजेंस ऑपरेटिव्स (PIO) अब भारतीय युवाओं को देशविरोधी गतिविधियों में घसीटने के लिए डिजिटल हथकंडे अपना रहे हैं। हिसार पुलिस ने एक बड़ा साइबर और सिक्योरिटी अलर्ट जारी करते हुए युवाओं को पाकिस्तान के इस ‘डिजिटल ट्रैप’ से सतर्क रहने की हिदायत दी है। एसपी सिद्धांत जैन (IPS) के अनुसार, पाकिस्तानी एजेंट सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के जरिए भारतीय युवाओं को निशाना बना रहे हैं। सामान्य बातचीत से शुरू होने वाला यह सिलसिला धीरे-धीरे ब्लैकमेलिंग और संवेदनशील जानकारियां चुराने का जरिया बन जाता है। देशद्रोह की हो सकती है कार्रवाई
पुलिस का कहना है कि सेना, पुलिस, सरकारी प्रतिष्ठानों, सुरक्षा व्यवस्था, वीआईपी मूवमेंट, आईडी कार्ड, OTP या बैंक विवरण किसी भी अनजान व्यक्ति को न भेजें। पाकिस्तान के हाथ लगी एक छोटी सी जानकारी भी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन सकती है। पाकिस्तान के डिजिटल अटैक के 5 प्रमुख तरीके… हनीट्रैप और फेक प्रोफाइल: ISI एजेंट फेसबुक, टेलिग्राम और इंस्टाग्राम पर लड़कियों के नाम से फर्जी आईडी बनाकर दोस्ती करते हैं। निजी कंटेंट मिलते ही युवाओं को ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया जाता है। फर्जी वर्क फ्रॉम होम जॉब्स: युवाओं को पार्ट-टाइम कमाई या डेटा एंट्री का लालच देकर जोड़ा जाता है। बाद में उनसे संवेदनशील ठिकानों की तस्वीरें, लोकेशन या वीडियो भेजने का दबाव बनाया जाता है। +92 कोड वाले नंबरों से संपर्क: पाकिस्तान के कंट्री कोड (+92) वाले वॉट्सएप नंबरों से लॉटरी, केबीसी या फर्जी इनाम का लालच देकर व्यक्तिगत और वित्तीय डेटा मांगा जाता है। धार्मिक और भावनात्मक भड़काव: संवेदनशील या धार्मिक मुद्दों पर भड़काऊ सामग्री भेजकर युवाओं का माइंडवाश करने और सेना व सुरक्षा बलों की मूवमेंट से जुड़ी जानकारी जुटाने की कोशिश की जाती है। फर्जी लोन और बेटिंग ऐप्स: युवाओं को सट्टेबाजी और लोन ऐप्स के जरिए कर्ज में फंसाया जाता है, जिसके बाद उन्हें ब्लैकमेल कर जासूसी के काम में इस्तेमाल किया जाता है।

