पाकुड़ जिला के अमडापाड़ा प्रखंड मुख्यालय के बांसलोई नदी के तट पर स्थापित दुर्गा मंदिर में पूजा की तैयारियां तेज हो गई है। 102 साल से ज्यादा पुरानी इस पूजा का बजट इस बार 36 लाख रुपए है। प्रतिमा षष्ठी को स्थापित होगी और विसर्जन 2 नवंबर को लखी पूजा के बाद होगा। जिले में यह पहली प्रतिमा है, जिसका विसर्जन लखी पूजा के बाद होता है। इधर, देवघर की ऊपर बिलासी दुर्गा पूजा समिति 54वां उत्सव मना रही है। यहां 1972 से तांत्रिक विधि-विधान से मां दुर्गा की पूजा होती है। इस बार राधा-कृष्ण के प्रेम मंदिर की थीम पर पंडाल बन रहा है, जिस पर करीब डेढ़ करोड़ रुपए खर्च होंगे। बंगाल से 60-65 कारीगर एक महीने से पंडाल की सजावट में जुटे हैं। आदिम जनजाति पहाड़िया समुदाय के लोग ढोल नगाड़ा लेकर पहुंचते हैं वहीं, अमडापाड़ा प्रखंड में प्रतिमा व बिजली सजावट पर करीब नौ लाख रुपये खर्च होंगे। यह पूजा आम लोगों के चंदे से होती है। दूर-दूर से लोग दर्शन के लिए आते हैं। मां का दर्शन करने अलग-अलग जिला से लोग पहुंचते हैं तो वहीं पहाड़ की ऊंचाई पर रहने वाले आदिम जनजाति पहाड़िया समुदाय के लोग भी नए-नए परिधान पहनकर ढोल नगाड़ा लेकर पहुंचते हैं। उनके द्वारा आकर्षक नृत्य भी किया जाता है, जिसे देखने के लिए लोगों की भीड़ रहती है। सुरक्षा के लिए हर जगह सीसीटीवी कैमरे लगेंगे। पूजा समिति अध्यक्ष बबलू भगत ने बताया कि मां का पट षष्ठी पूजा के दिन खुलेगा। शाम को बच्चों के नृत्य, अष्टमी पर गंगा आरती और डांडिया कार्यक्रम होंगे। सीसीटीवी कैमरों के अलावा कई वॉलंटियर्स तैनात रहेंगे बाजारों में भी दुर्गा पूजा की रौनक दिख रही है। भीड़ नियंत्रण के लिए सीसीटीवी कैमरों के अलावा कई वॉलंटियर्स तैनात रहेंगे। पार्किंग व लाइट के तोरण द्वार की भी व्यवस्था है। अष्टमी पुष्पांजलि के लिए भीड़ नियंत्रण की खास व्यवस्था है। समिति के सदस्य सरोज मंडल, श्याम भगत, संजय रजक, संजय भगत, राजा भारती, दशरथ भगत,राहुल भगत, उत्तम भगत, कन्हैया प्रसाद भगत ने बताया कि दुर्गा पूजा की सबसे बड़ी खासियत और परंपरा यह है कि पूरे गांव में केवल एक ही स्थान पर मां दुर्गा की पूजा आयोजित होती है। मेला भी लगता है। पूरा गांव इस एक मंडप के नीचे एकजुट होता है। यह परंपरा दशकों से आपसी भाईचारा कौमी एकता और सामाजिक समरसता का अनोखा संदेश देती आ रही है। उन्होंने बताया कि पश्चिम बंगाल के चंदन नगर से विशेष लाइट डिजाइनर टीम द्वारा मंदिर वह मुख्य मार्ग पर लगाए जाएंगे इसके अलावा धर्मानगर वाराणसी से आ रहे पंडितों की टीम द्वारा 18 अक्टूबर को भव्य गंगा आरती की जाएगी। पंडाल में मंदिर की वास्तुकला बारीकी से उकेरी जा रही इधर, देवघर की ऊपर बिलासी दुर्गा पूजा समिति द्वारा तैयार किए जा रहे पंडाल में मंदिर की वास्तुकला बारीकी से उकेरी जा रही है। चंदननगर की रोशनी से सजावट होगी, ताकि श्रद्धालुओं को प्रेम मंदिर जैसा अनुभव मिले। मीडिया प्रभारी आशीष झा ने बताया कि पंचमी पर पंडाल का उद्घाटन होगा। षष्ठी पर मां भगवती वेदी पर विराजमान होंगी। दशमी तक श्रद्धालु पूजा और मेले का आनंद ले सकेंगे। दशमी के बाद 11वीं तिथि को मां दुर्गा की प्रतिमा का विसर्जन होगा। पाकुड़ जिला के अमडापाड़ा प्रखंड मुख्यालय के बांसलोई नदी के तट पर स्थापित दुर्गा मंदिर में पूजा की तैयारियां तेज हो गई है। 102 साल से ज्यादा पुरानी इस पूजा का बजट इस बार 36 लाख रुपए है। प्रतिमा षष्ठी को स्थापित होगी और विसर्जन 2 नवंबर को लखी पूजा के बाद होगा। जिले में यह पहली प्रतिमा है, जिसका विसर्जन लखी पूजा के बाद होता है। इधर, देवघर की ऊपर बिलासी दुर्गा पूजा समिति 54वां उत्सव मना रही है। यहां 1972 से तांत्रिक विधि-विधान से मां दुर्गा की पूजा होती है। इस बार राधा-कृष्ण के प्रेम मंदिर की थीम पर पंडाल बन रहा है, जिस पर करीब डेढ़ करोड़ रुपए खर्च होंगे। बंगाल से 60-65 कारीगर एक महीने से पंडाल की सजावट में जुटे हैं। आदिम जनजाति पहाड़िया समुदाय के लोग ढोल नगाड़ा लेकर पहुंचते हैं वहीं, अमडापाड़ा प्रखंड में प्रतिमा व बिजली सजावट पर करीब नौ लाख रुपये खर्च होंगे। यह पूजा आम लोगों के चंदे से होती है। दूर-दूर से लोग दर्शन के लिए आते हैं। मां का दर्शन करने अलग-अलग जिला से लोग पहुंचते हैं तो वहीं पहाड़ की ऊंचाई पर रहने वाले आदिम जनजाति पहाड़िया समुदाय के लोग भी नए-नए परिधान पहनकर ढोल नगाड़ा लेकर पहुंचते हैं। उनके द्वारा आकर्षक नृत्य भी किया जाता है, जिसे देखने के लिए लोगों की भीड़ रहती है। सुरक्षा के लिए हर जगह सीसीटीवी कैमरे लगेंगे। पूजा समिति अध्यक्ष बबलू भगत ने बताया कि मां का पट षष्ठी पूजा के दिन खुलेगा। शाम को बच्चों के नृत्य, अष्टमी पर गंगा आरती और डांडिया कार्यक्रम होंगे। सीसीटीवी कैमरों के अलावा कई वॉलंटियर्स तैनात रहेंगे बाजारों में भी दुर्गा पूजा की रौनक दिख रही है। भीड़ नियंत्रण के लिए सीसीटीवी कैमरों के अलावा कई वॉलंटियर्स तैनात रहेंगे। पार्किंग व लाइट के तोरण द्वार की भी व्यवस्था है। अष्टमी पुष्पांजलि के लिए भीड़ नियंत्रण की खास व्यवस्था है। समिति के सदस्य सरोज मंडल, श्याम भगत, संजय रजक, संजय भगत, राजा भारती, दशरथ भगत,राहुल भगत, उत्तम भगत, कन्हैया प्रसाद भगत ने बताया कि दुर्गा पूजा की सबसे बड़ी खासियत और परंपरा यह है कि पूरे गांव में केवल एक ही स्थान पर मां दुर्गा की पूजा आयोजित होती है। मेला भी लगता है। पूरा गांव इस एक मंडप के नीचे एकजुट होता है। यह परंपरा दशकों से आपसी भाईचारा कौमी एकता और सामाजिक समरसता का अनोखा संदेश देती आ रही है। उन्होंने बताया कि पश्चिम बंगाल के चंदन नगर से विशेष लाइट डिजाइनर टीम द्वारा मंदिर वह मुख्य मार्ग पर लगाए जाएंगे इसके अलावा धर्मानगर वाराणसी से आ रहे पंडितों की टीम द्वारा 18 अक्टूबर को भव्य गंगा आरती की जाएगी। पंडाल में मंदिर की वास्तुकला बारीकी से उकेरी जा रही इधर, देवघर की ऊपर बिलासी दुर्गा पूजा समिति द्वारा तैयार किए जा रहे पंडाल में मंदिर की वास्तुकला बारीकी से उकेरी जा रही है। चंदननगर की रोशनी से सजावट होगी, ताकि श्रद्धालुओं को प्रेम मंदिर जैसा अनुभव मिले। मीडिया प्रभारी आशीष झा ने बताया कि पंचमी पर पंडाल का उद्घाटन होगा। षष्ठी पर मां भगवती वेदी पर विराजमान होंगी। दशमी तक श्रद्धालु पूजा और मेले का आनंद ले सकेंगे। दशमी के बाद 11वीं तिथि को मां दुर्गा की प्रतिमा का विसर्जन होगा।

