नालंदा समेत सूबे के सभी 38 जिलों में अब विश्वविद्यालय और स्कूल बोर्ड की परीक्षाओं के दौरान सामान्य कक्षाओं के संचालन पर ब्रेक नहीं लगेगा। राज्यपाल सचिवालय ने राज्य के सभी कुलपतियों को पत्र भेजकर परीक्षा भवन और बज्र गृह के निर्माण के लिए एक से डेढ़ एकड़ जमीन बिहार विद्यालय परीक्षा समिति को तत्काल उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह की ओर से जारी निर्देश के अनुसार, कुलपतियों को कम-से-कम 288 फीट लंबी और 200 फीट चौड़ी जमीन चिह्नित कर अविलंब सौंपने को कहा गया है। कक्षाएं बाधित होने की समस्या से मिलेगा स्थायी समाधान कुलपतियों की उच्चस्तरीय बैठक में यह मुद्दा उठा था कि डिग्री और बोर्ड परीक्षाओं के दौरान कॉलेजों व स्कूलों में शिक्षण कार्य पूरी तरह ठप हो जाता है। छात्रों की नियमित पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए अलग से बहुउद्देशीय परीक्षा भवन की दरकार महसूस की जा रही थी। इसी परिप्रेक्ष्य में बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के अध्यक्ष ने राजभवन को अलग भवन निर्माण का औपचारिक प्रस्ताव भेजा था, जिस पर अब अमल शुरू हो गया है।
कॉलेजों की ओर से जमीन उपलब्ध कराई जाएगी
योजना के तहत प्रमंडल स्तर पर पहले से बने परीक्षा भवनों के अलावा अब जिला मुख्यालयों में विवि या अंगीभूत कॉलेजों की ओर से जमीन उपलब्ध कराई जाएगी। उस जमीन पर बिहार विद्यालय परीक्षा समिति अपने खर्च से आधुनिक परीक्षा भवन और अभेद्य बज्र गृह बनाएगी। जमीन का मालिकाना हक विवि के पास ही रहेगा, जबकि भवन का स्वामित्व परीक्षा समिति का होगा। आवश्यकतानुसार दोनों ही संस्थान यहां अपनी-अपनी परीक्षाएं सुगमता से आयोजित कर सकेंगे। *डीएम की अगुवाई में बनेगी संयुक्त निगरानी समिति* भवनों के समुचित रखरखाव और उपयोग के निष्पक्ष संचालन के लिए जिला स्तर पर निगरानी समिति बनाई जाएगी। इसके लिए संबंधित जिलों के डीएम अपने स्तर से कमेटी गठित करेंगे, जिसमें विश्वविद्यालय और जिला प्रशासन दोनों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। राजभवन ने कुलपतियों को तय मानक की भूमि चिह्नित कर इसकी जानकारी सीधे परीक्षा समिति व राजभवन को भेजने का निर्देश दिया है। पत्र की प्रतिलिपि सभी डीएम और प्रमंडलीय आयुक्तों को भी भेज दी गई है। नालंदा समेत सूबे के सभी 38 जिलों में अब विश्वविद्यालय और स्कूल बोर्ड की परीक्षाओं के दौरान सामान्य कक्षाओं के संचालन पर ब्रेक नहीं लगेगा। राज्यपाल सचिवालय ने राज्य के सभी कुलपतियों को पत्र भेजकर परीक्षा भवन और बज्र गृह के निर्माण के लिए एक से डेढ़ एकड़ जमीन बिहार विद्यालय परीक्षा समिति को तत्काल उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह की ओर से जारी निर्देश के अनुसार, कुलपतियों को कम-से-कम 288 फीट लंबी और 200 फीट चौड़ी जमीन चिह्नित कर अविलंब सौंपने को कहा गया है। कक्षाएं बाधित होने की समस्या से मिलेगा स्थायी समाधान कुलपतियों की उच्चस्तरीय बैठक में यह मुद्दा उठा था कि डिग्री और बोर्ड परीक्षाओं के दौरान कॉलेजों व स्कूलों में शिक्षण कार्य पूरी तरह ठप हो जाता है। छात्रों की नियमित पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए अलग से बहुउद्देशीय परीक्षा भवन की दरकार महसूस की जा रही थी। इसी परिप्रेक्ष्य में बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के अध्यक्ष ने राजभवन को अलग भवन निर्माण का औपचारिक प्रस्ताव भेजा था, जिस पर अब अमल शुरू हो गया है।
कॉलेजों की ओर से जमीन उपलब्ध कराई जाएगी
योजना के तहत प्रमंडल स्तर पर पहले से बने परीक्षा भवनों के अलावा अब जिला मुख्यालयों में विवि या अंगीभूत कॉलेजों की ओर से जमीन उपलब्ध कराई जाएगी। उस जमीन पर बिहार विद्यालय परीक्षा समिति अपने खर्च से आधुनिक परीक्षा भवन और अभेद्य बज्र गृह बनाएगी। जमीन का मालिकाना हक विवि के पास ही रहेगा, जबकि भवन का स्वामित्व परीक्षा समिति का होगा। आवश्यकतानुसार दोनों ही संस्थान यहां अपनी-अपनी परीक्षाएं सुगमता से आयोजित कर सकेंगे। *डीएम की अगुवाई में बनेगी संयुक्त निगरानी समिति* भवनों के समुचित रखरखाव और उपयोग के निष्पक्ष संचालन के लिए जिला स्तर पर निगरानी समिति बनाई जाएगी। इसके लिए संबंधित जिलों के डीएम अपने स्तर से कमेटी गठित करेंगे, जिसमें विश्वविद्यालय और जिला प्रशासन दोनों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। राजभवन ने कुलपतियों को तय मानक की भूमि चिह्नित कर इसकी जानकारी सीधे परीक्षा समिति व राजभवन को भेजने का निर्देश दिया है। पत्र की प्रतिलिपि सभी डीएम और प्रमंडलीय आयुक्तों को भी भेज दी गई है।

