देवास में पति की मौत के सदमे से जूझ रही एक महिला अपनी तीन माह की बेटी को लेकर घर से निकल गई और भटकते हुए बस से देवास पहुंच गई। जामगोद के पास बीएनपी थाना पुलिस को वह बच्ची के साथ मिली। महिला अपनी पहचान और पते के बारे में सही जानकारी नहीं दे पा रही थी, जबकि बच्ची को बुखार था। पुलिस ने महिला के हाथ पर गुदे नाम और कंट्रोल रूम से मिले सुरागों के आधार पर उसकी पहचान की। इसके बाद मां-बेटी को सुरक्षित विदिशा जिले के सुआखेड़ी क्षेत्र में उनके परिजनों तक पहुंचाया गया। हाथ पर गुदे नाम से शुरू हुई पहचान की तलाश
बीएनपी थाना प्रभारी प्रीति कटारे और उनकी टीम ने महिला से धैर्यपूर्वक बातचीत की। महिला अपनी पहचान और पते के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं दे पा रही थी। पुलिस ने उसके हाथ पर गुदे नाम को आधार बनाया और महिला व बच्ची की तस्वीरें अलग-अलग कंट्रोल रूम में भेजीं। इन प्रयासों के बाद विदिशा जिले के क्षेत्र में उसके घर का पता चला। बच्ची को बुखार, पुलिस ने कराया इलाज
महिला के साथ मौजूद तीन माह की बच्ची को बुखार था। पुलिस ने बच्ची को अस्पताल में दिखाया और महिला की भी जांच कराई। दोनों की देखभाल के लिए महिला पुलिसकर्मी कृष्णा सूर्यवंशी को साथ रखा गया। पुलिस ने मां-बेटी के लिए नए कपड़ों और भोजन की व्यवस्था भी की। परिजनों की पुष्टि के बाद विदिशा पहुंची टीम
महिला की मानसिक स्थिति को देखते हुए पुलिसकर्मियों ने उससे धैर्य के साथ बातचीत की और बच्ची को भी संभाला। पहचान की पुष्टि होने और परिजनों से संपर्क स्थापित होने के बाद पुलिस टीम मां-बेटी को लेकर विदिशा रवाना हुई। वहां महिला की बहन और अन्य परिजनों को दोनों सुरक्षित सौंप दिए गए। टीआई बोलीं- मासूम की सुरक्षा सबसे बड़ी चिंता थी
बीएनपी थाना प्रभारी प्रीति कटारे ने बताया कि महिला अलग-अलग बातें बता रही थी, जिससे उसकी पहचान करना मुश्किल हो रहा था। कई कंट्रोल रूम से संपर्क करने और हाथ पर गुदे नाम सहित अन्य सुरागों के आधार पर उसकी पहचान की पुष्टि हुई। बच्ची को बुखार होने पर उसका इलाज कराया गया। महिला पुलिसकर्मी और थाने की टीम लगातार मां-बेटी की देखभाल में लगी रही। इस कार्रवाई में थाना प्रभारी प्रीति कटारे, महिला पुलिसकर्मी कृष्णा सूर्यवंशी, उमेश, संदीप सहित बीएनपी थाने की टीम की भूमिका रही।

