पठानकोट में 5 महीने पहले निगम अधिकारी से 21.9 लाख रुपए की ठगी करने वाले 2 व्यक्तियों को जिला पुलिस ने छत्तीसगढ़ से गिरफ्तार कर लिया। आरोपी पहले गुरुग्राम में फर्जी काउंसलिंग सेंटर चलाते थे। जहां वे बड़े शैक्षणिक संस्थानों में एडमिशन दिलवाने के नाम पर लोगों को ठगते थे। उन्होंने कई लोगों को शिकार बनाया और फिर दफ्तर समेटकर चलते बने। आरोपियों ने अब छत्तीसगढ़ के रायपुर में नया दफ्तार खोला था। जहां पठानकोट पुलिस ने छापेमारी कर 2 मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस जब रायपुर स्थित फर्जीवाड़े के केंद्र में पहुंची तो उसे फूलों से सजाया गया था। दफ्तर में लोगों को ठगने का काम जोर-शोर से चल रहा था और किसी बड़ी कंपनी के दफ्तर की तरह कर्मचारी बैठ अपना-अपना काम कर रहे थे। पुलिस ने दफ्तर में काम करने वाले लोगों को भी जांच में शामिल किया है। आरोपियों से बड़ी संख्या में लैपटॉप, मोबाइल, फर्जी दस्तावेज, बड़े शैक्षणिक संस्थानों का डाटा, डेबिट कार्ड और फर्जी पहचान पत्र बरामद किए हैं। उक्त कार्रवाई पठानकोट साइबर क्राइम पुलिस की ओर से की गई है। 21.9 लाख रुपये की ठगी का ऐसे हुआ खुलासा पीड़ित की शिकायत: पठानकोट नगर निगम के सेनेटेशन ऑफिसर विक्रमजीत ने साइबर पुलिस को दी शिकायत में बताया कि वर्ष 2025 में उनके बेटे गौरव ने NEET की परीक्षा दी थी।
फर्जी कॉल और झांसा: परीक्षा के बाद पीड़ित परिवार को अलग-अलग फोन नंबरों से कॉल्स आईं। फोन करने वालों ने खुद को गुरुग्राम (हरियाणा) स्थित ‘द एडमिशन सॉल्यूशन’ काउंसलिंग सेंटर का प्रतिनिधि बताया और फैजाबाद के सरकारी मेडिकल कॉलेज में कम फीस पर एमबीबीएस की सीट दिलाने का झांसा दिया।
21.9 लाख रुपये का भुगतान: आरोपियों के झांसे में आकर पीड़ित परिवार गुरुग्राम सेक्टर-48 स्थित उनके दफ्तर पहुंचा। वहां आरोपियों ने भरोसा जीतकर सितंबर 2025 से नवंबर 2025 के बीच नकद, यूपीआई और बैंक ट्रांसफर के जरिए कुल 21.9 लाख रुपये ऐंठ लिए।
दफ्तर समेट हुए फरार: 15 नवंबर 2025 को जब पीड़ित परिवार गुरुग्राम ऑफिस पहुंचा, तो वहां ताला लटका मिला और आरोपियों के फोन बंद आने लगे। पहचान बदलकर रायपुर में खोला नया ऑफिस जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि गिरोह के सदस्यों ने गुरुग्राम का ऑफिस बंद करने के बाद अपनी पहचान छिपाने के लिए जाली दस्तावेजों का सहारा लिया था। आरोपियों ने रायपुर (छत्तीसगढ़) में ‘ब्राइटमार्ग’ नाम से नया फर्जी काउंसलिंग सेंटर खोल लिया था। गिरोह के सदस्य नए छात्रों और अभिभावकों को जाल में फंसाने के लिए फर्जी पहचान पत्रों का इस्तेमाल कर रहे थे। जांच में सामने आया है कि इस फर्जी कंपनी ने 10 से 12 अन्य लोगों से भी करोड़ों रुपये की ठगी की है। रायपुर से 2 आरोपी गिरफ्तार; भारी मात्रा में सामान जब्त पठानकोट साइबर पुलिस ने तकनीकी तरीकों से गिरोह को ट्रेस किया और रायपुर में छापेमारी कर दोनों मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान बंटी कुमार तिवारी पुत्र शिव कुमार तिवारी,निवासी बिहार और मोहम्मद जुबेर पुत्र शेर खान निवासी दिल्ली के तौर पर हुई। एसपी विश्वजीत सिंह ने बताया कि आरोपियों से स्कॉर्पियो (एन), 3 लैपटॉप, 48 मोबाइल फोन (फर्जी सिम कार्ड सहित), 3 जाली पहचान पत्र,3 डेबिट कार्ड, विद्यार्थियों और एमबीबीएस कॉलेजों से संबंधित डेटा, ऑफिस डायरियां और अन्य फर्जी दस्तावेज बरामद किए गए। देशभर में फैला है नेटवर्क; एफआईआर दर्ज एसपी विश्वजीत सिंह ने बताया कि प्राथमिक जांच में यह बात सामने आई है कि इस गिरोह की शाखाएं अलग-अलग नामों से कई राज्यों में सक्रिय हैं और यह नेटवर्क बड़े पैमाने पर लोगों को ठग रहा है। इस गिरोह के तार उच्च स्तर पर जुड़े हुए हैं और इसमें शामिल अन्य मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी है। इस संबंध में थाना साइबर क्राइम पठानकोट में मामला दर्ज किया गया है। यह प्राथमिकी भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 61(2), 336(2), 336(3), 340(2), 111 और आईटी एक्ट 2000 की धारा 66(D) के तहत दर्ज कर आगे की कानूनी जांच की जा रही है। पुलिस की जनता से अपील पठानकोट पुलिस ने आम जनता और अभिभावकों को सचेत करते हुए अपील की है। एसपी विश्वजीत सिंह ने कहा कि किसी भी प्रकार के लालच, झांसे या फर्जी एडमिशन स्कीमों के बहकावे में न आएं। अपना ओटीपी, पिन या पासवर्ड किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ साझा न करें। यदि आपके साथ किसी भी प्रकार की ऑनलाइन/साइबर ठगी होती है, तो बिना देरी किए राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर 1930 पर रिपोर्ट करें, www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं या तुरंत नजदीकी साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन से संपर्क करें।

