पटना में फोन पर ऑर्डर, फिर कट्टे की सप्लाई:बख्तियारपुर के टाल इलाके में चल रहा था मिनी गन फैक्ट्री, चिकसौरा का मिस्त्री समेत 4 अरेस्ट

पटना में फोन पर ऑर्डर, फिर कट्टे की सप्लाई:बख्तियारपुर के टाल इलाके में चल रहा था मिनी गन फैक्ट्री, चिकसौरा का मिस्त्री समेत 4 अरेस्ट

पटना जिले के बख्तियारपुर में पुलिस और एसटीएफ ने बड़ी कार्रवाई है। एक अवैध मिनी गन फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया है। एसटीएफ को गुप्त सूचना मिली थी कि टेकाबिगहा गांव के पास धोबा पुल के मुहाने पर झाड़ियों में चार लोग अवैध हथियारों का निर्माण कर रहे हैं। सूचना मिलते ही टीम ने स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर छापेमारी की। पुलिस को देखते ही झाड़ियों में छिपे चारों तस्कर भागने लगे, जिन्हें खदेड़कर पकड़ लिया गया। जिसकी पहचान नालंदा जिले के चिकसौरा निवासी विजय प्रसाद, धनंजय कुमार, सकलदीप प्रसाद और मिथिलेश बिंद के रूप में हुई है। इनमें सकलदीप पर पहले भी कई आपराधिक मामले दर्ज है। 5 लोगों ने बनाया था गैंग मौके से तीन बेस मशीन, दो निर्मित और तीन अर्धनिर्मित हथियार बरामद किए गए। इसके अलावा, हथियार बनाने में इस्तेमाल होने वाली एक खंडा भाती, तीन कारतूस के खोखे, एक हैंड ड्रिल मशीन और कई बटखरे भी जब्त किए गए हैं। पूछताछ में पता चला कि पांच लोगों ने मिलकर यह गैंग बनाया था। यह गिरोह बेहद शातिर तरीके से काम करता था। डिमांड के अनुसार कट्टों का निर्माण करते थे। छापेमारी के डर से हथियार को दूसरी जगह छिपा देते थे। 10 से 15 हजार में बेचते थे गिरोह के सदस्य फोन पर ऑर्डर लेते थे। मांग के अनुसार, प्रतिदिन चार से पांच कट्टों का निर्माण कर तुरंत उनकी आपूर्ति कर देते थे। यह गिरोह नालंदा, धनरूआ, बख्तियारपुर और पटना सहित आसपास के जिलों में सक्रिय था। एक कट्टे के लिए 10 से 15 हजार रुपए लिए जाते थे। जिसकी कीमत कट्टे की गुणवत्ता, ग्राहक की हैसियत और बट के प्रकार (लकड़ी या स्टील) पर निर्भर करती थी। कट्टा बनाने वाले मिस्त्री चिकसौरा के रहने वाले थे, जो इलाके में अपने काम के लिए जाने जाते थे। पुलिस को अब इस अंतरराज्यीय हथियार सप्लायर गिरोह के सरगना की तलाश में है। पुलिस गिरोह के सदस्यों से पूछताछ में नेटवर्क और हथियार निर्माण के लिए रॉ मटेरियल की सप्लाई के बारे में भी जानने में जुटी है। पटना जिले के बख्तियारपुर में पुलिस और एसटीएफ ने बड़ी कार्रवाई है। एक अवैध मिनी गन फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया है। एसटीएफ को गुप्त सूचना मिली थी कि टेकाबिगहा गांव के पास धोबा पुल के मुहाने पर झाड़ियों में चार लोग अवैध हथियारों का निर्माण कर रहे हैं। सूचना मिलते ही टीम ने स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर छापेमारी की। पुलिस को देखते ही झाड़ियों में छिपे चारों तस्कर भागने लगे, जिन्हें खदेड़कर पकड़ लिया गया। जिसकी पहचान नालंदा जिले के चिकसौरा निवासी विजय प्रसाद, धनंजय कुमार, सकलदीप प्रसाद और मिथिलेश बिंद के रूप में हुई है। इनमें सकलदीप पर पहले भी कई आपराधिक मामले दर्ज है। 5 लोगों ने बनाया था गैंग मौके से तीन बेस मशीन, दो निर्मित और तीन अर्धनिर्मित हथियार बरामद किए गए। इसके अलावा, हथियार बनाने में इस्तेमाल होने वाली एक खंडा भाती, तीन कारतूस के खोखे, एक हैंड ड्रिल मशीन और कई बटखरे भी जब्त किए गए हैं। पूछताछ में पता चला कि पांच लोगों ने मिलकर यह गैंग बनाया था। यह गिरोह बेहद शातिर तरीके से काम करता था। डिमांड के अनुसार कट्टों का निर्माण करते थे। छापेमारी के डर से हथियार को दूसरी जगह छिपा देते थे। 10 से 15 हजार में बेचते थे गिरोह के सदस्य फोन पर ऑर्डर लेते थे। मांग के अनुसार, प्रतिदिन चार से पांच कट्टों का निर्माण कर तुरंत उनकी आपूर्ति कर देते थे। यह गिरोह नालंदा, धनरूआ, बख्तियारपुर और पटना सहित आसपास के जिलों में सक्रिय था। एक कट्टे के लिए 10 से 15 हजार रुपए लिए जाते थे। जिसकी कीमत कट्टे की गुणवत्ता, ग्राहक की हैसियत और बट के प्रकार (लकड़ी या स्टील) पर निर्भर करती थी। कट्टा बनाने वाले मिस्त्री चिकसौरा के रहने वाले थे, जो इलाके में अपने काम के लिए जाने जाते थे। पुलिस को अब इस अंतरराज्यीय हथियार सप्लायर गिरोह के सरगना की तलाश में है। पुलिस गिरोह के सदस्यों से पूछताछ में नेटवर्क और हथियार निर्माण के लिए रॉ मटेरियल की सप्लाई के बारे में भी जानने में जुटी है।  

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