पटना जू में जनवरी 2027 से फिर दौड़ेगी टॉय ट्रेन:वंदे भारत जैसा होगा लुक, 40 मिनट की होगी सवारी; सुबह 9 बजे से ट्रेन चलाने की तैयारी

पटना जू में जनवरी 2027 से फिर दौड़ेगी टॉय ट्रेन:वंदे भारत जैसा होगा लुक, 40 मिनट की होगी सवारी; सुबह 9 बजे से ट्रेन चलाने की तैयारी

पटना जू में करीब 11 साल बाद एक बार फिर पर्यटकों को टॉय ट्रेन की सवारी का आनंद मिलने वाला है। इसके लिए जनवरी 2027 के अंत तक काम पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। करीब 9.88 करोड़ रुपये की लागत से 3.77 किलोमीटर लंबा नया ट्रैक तैयार किया जा रहा है। ट्रेन का लुक वंदे भारत की तर्ज पर आकर्षक बनाया जाएगा। इसका निर्माण समस्तीपुर स्थित रेलवे कारखाने में किया जाएगा। एक सप्ताह के भीतर पटरी बिछाने का काम शुरू होगी ट्रैक बिछाने के लिए रेलवे की ओर से सर्वे पूरा कर लिया गया है। रास्ते की मार्किंग करने के साथ झाड़ियों की सफाई और पुरानी पटरियों को हटाने का काम भी किया जा चुका है। जू प्रशासन के अनुसार, एक सप्ताह के भीतर पटरी बिछाने का काम शुरू होने की संभावना है। पेड़ों को नुकसान से बचाने के लिए दोबारा सर्वे कर ट्रैक का रास्ता तय किया गया है। इससे कुसुम समेत अन्य पेड़ों को सुरक्षित रखते हुए ट्रेन चलाने की तैयारी है। चार कोच में एक साथ 80 पर्यटक कर सकेंगे सफर नई टॉय ट्रेन में एक इंजन और चार कोच होंगे। प्रत्येक कोच में लगभग 20 यात्रियों के बैठने की व्यवस्था रहेगी। इस तरह एक बार में करीब 80 पर्यटक सफर कर सकेंगे। ट्रेन बैटरी से संचालित होगी, जिससे प्रदूषण कम रखने में मदद मिलेगी। यात्रियों की सुविधा के लिए एक कोच को एसी रखने का प्रस्ताव है। सभी कोच को एसी बनाने की योजना नहीं है। 40 मिनट की होगी टॉय ट्रेन की सवारी टॉय ट्रेन की सवारी करीब 40 मिनट की हो सकती है। प्रस्तावित रूट को इस तरह तैयार किया जा रहा है कि पर्यटक जू की हरियाली, जंगल ट्रेल और तालाब के नजारों का आनंद ले सकें। पुराने मार्ग में बदलाव कर जंगल ट्रेल वाले हिस्से को कुछ छोटा करने की योजना है, ताकि तालाब का दृश्य भी सफर में शामिल हो सके। चार जगहों पर मोड़ बनाने में आ रही थी परेशानी ट्रैक निर्माण के दौरान ट्रेन को मोड़ने के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध कराना बड़ी तकनीकी चुनौती थी। इसके लिए करीब 60 डिग्री के मोड़ की जरूरत थी। जू में चार स्थानों पर ऐसे मोड़ बनाने में परेशानी आ रही थी। दोबारा सर्वे के बाद इन समस्याओं का समाधान किया गया और ट्रैक का रास्ता चिह्नित कर लिया गया है। पुराने ट्रैक के कुछ हिस्सों का भी नए निर्माण में इस्तेमाल किया जाएगा। सुबह करीब 9 बजे से ट्रेन चलाने की तैयारी जू निदेशक हेमंत पाटिल के अनुसार, दानापुर रेल मंडल और चिड़ियाघर प्रशासन के बीच हुए एमओयू के तहत परियोजना पर काम हो रहा है। निर्माण पूरा होने के बाद तकनीकी जांच और सुरक्षा परीक्षण किए जाएंगे। इसके बाद ही नियमित परिचालन शुरू करने पर अंतिम निर्णय होगा। ट्रेन के परिचालन का समय, टिकट की कीमत और स्टेशनों की संख्या अभी तय नहीं की गई है। योजना के अनुसार, जू खुलने के बाद सुबह करीब नौ बजे से ट्रेन चलाने की तैयारी है। गौरतलब है कि पटना जू में पुरानी टॉय ट्रेन का परिचालन 17 अगस्त 2015 को बंद कर दिया गया था। उस समय ट्रेन के बार-बार पटरी से उतरने और ट्रैक व कोच की सुरक्षा को लेकर चिंताएं सामने आई थीं। अब आधुनिक ट्रेन और नए ट्रैक के साथ इसे दोबारा शुरू करने की तैयारी है। पटना जू में करीब 11 साल बाद एक बार फिर पर्यटकों को टॉय ट्रेन की सवारी का आनंद मिलने वाला है। इसके लिए जनवरी 2027 के अंत तक काम पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। करीब 9.88 करोड़ रुपये की लागत से 3.77 किलोमीटर लंबा नया ट्रैक तैयार किया जा रहा है। ट्रेन का लुक वंदे भारत की तर्ज पर आकर्षक बनाया जाएगा। इसका निर्माण समस्तीपुर स्थित रेलवे कारखाने में किया जाएगा। एक सप्ताह के भीतर पटरी बिछाने का काम शुरू होगी ट्रैक बिछाने के लिए रेलवे की ओर से सर्वे पूरा कर लिया गया है। रास्ते की मार्किंग करने के साथ झाड़ियों की सफाई और पुरानी पटरियों को हटाने का काम भी किया जा चुका है। जू प्रशासन के अनुसार, एक सप्ताह के भीतर पटरी बिछाने का काम शुरू होने की संभावना है। पेड़ों को नुकसान से बचाने के लिए दोबारा सर्वे कर ट्रैक का रास्ता तय किया गया है। इससे कुसुम समेत अन्य पेड़ों को सुरक्षित रखते हुए ट्रेन चलाने की तैयारी है। चार कोच में एक साथ 80 पर्यटक कर सकेंगे सफर नई टॉय ट्रेन में एक इंजन और चार कोच होंगे। प्रत्येक कोच में लगभग 20 यात्रियों के बैठने की व्यवस्था रहेगी। इस तरह एक बार में करीब 80 पर्यटक सफर कर सकेंगे। ट्रेन बैटरी से संचालित होगी, जिससे प्रदूषण कम रखने में मदद मिलेगी। यात्रियों की सुविधा के लिए एक कोच को एसी रखने का प्रस्ताव है। सभी कोच को एसी बनाने की योजना नहीं है। 40 मिनट की होगी टॉय ट्रेन की सवारी टॉय ट्रेन की सवारी करीब 40 मिनट की हो सकती है। प्रस्तावित रूट को इस तरह तैयार किया जा रहा है कि पर्यटक जू की हरियाली, जंगल ट्रेल और तालाब के नजारों का आनंद ले सकें। पुराने मार्ग में बदलाव कर जंगल ट्रेल वाले हिस्से को कुछ छोटा करने की योजना है, ताकि तालाब का दृश्य भी सफर में शामिल हो सके। चार जगहों पर मोड़ बनाने में आ रही थी परेशानी ट्रैक निर्माण के दौरान ट्रेन को मोड़ने के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध कराना बड़ी तकनीकी चुनौती थी। इसके लिए करीब 60 डिग्री के मोड़ की जरूरत थी। जू में चार स्थानों पर ऐसे मोड़ बनाने में परेशानी आ रही थी। दोबारा सर्वे के बाद इन समस्याओं का समाधान किया गया और ट्रैक का रास्ता चिह्नित कर लिया गया है। पुराने ट्रैक के कुछ हिस्सों का भी नए निर्माण में इस्तेमाल किया जाएगा। सुबह करीब 9 बजे से ट्रेन चलाने की तैयारी जू निदेशक हेमंत पाटिल के अनुसार, दानापुर रेल मंडल और चिड़ियाघर प्रशासन के बीच हुए एमओयू के तहत परियोजना पर काम हो रहा है। निर्माण पूरा होने के बाद तकनीकी जांच और सुरक्षा परीक्षण किए जाएंगे। इसके बाद ही नियमित परिचालन शुरू करने पर अंतिम निर्णय होगा। ट्रेन के परिचालन का समय, टिकट की कीमत और स्टेशनों की संख्या अभी तय नहीं की गई है। योजना के अनुसार, जू खुलने के बाद सुबह करीब नौ बजे से ट्रेन चलाने की तैयारी है। गौरतलब है कि पटना जू में पुरानी टॉय ट्रेन का परिचालन 17 अगस्त 2015 को बंद कर दिया गया था। उस समय ट्रेन के बार-बार पटरी से उतरने और ट्रैक व कोच की सुरक्षा को लेकर चिंताएं सामने आई थीं। अब आधुनिक ट्रेन और नए ट्रैक के साथ इसे दोबारा शुरू करने की तैयारी है।  

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