पूर्णिया में नए पंचायत सरकार भवन के निर्माण में भ्रष्टाचार और अनियमितता का आरोप लगा है। ग्रामीणों-स्थानीय युवाओं ने निर्माण स्थल पर पहुंचकर घटिया सामग्री के इस्तेमाल और तकनीकी लापरवाही का विरोध किया है। ग्रामीणों ने निर्माण कार्य की जर्जर स्थिति को उजागर करते हुए तत्काल कार्रवाई की मांग की है। इस मामले पर डगरूआ की प्रखंड पंचायती राज पदाधिकारी (बीपीआरओ) तुलसी कुमारी ने संज्ञान लिया है। उन्होंने निर्माण कार्य से संबंधित जांच रिपोर्ट उच्च विभाग को भेज दिया है। निर्माण स्थल पर मौजूद ग्रामीणों-स्थानीय लोगों ने बताया कि भवन के निर्माण में तय मानकों के अनुसार उच्च गुणवत्ता वाली ईंटों के बजाय बेहद कमजोर, दो नंबर की ईंटों का उपयोग किया गया है, जो बनने के दौरान ही झड़ने और टूटने लगी हैं। निम्न श्रेणी के सीमेंट का इस्तेमाल किया गया है। मामला डगरूआ प्रखंड की दरियापुर पंचायत के वार्ड नंबर 2 का है। सफेद बालू मिलाया गया है स्थानीय ग्रामीण नवाब ने बताया कि निर्माण कार्य के मसाले में सीमेंट का अनुपात इतना कम रखा गया है कि जोड़ पूरी तरह कमजोर हो चुके हैं। तकनीकी नियमों के विपरीत निर्माण में लोकल नदी का सफेद व कच्चा बालू मिलाया गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि बाहर केवल दिखावे के लिए लाल बालू गिराया गया था, जबकि असल कार्य में सफेद बालू खपाया गया।
दीवारों से पानी का रिसाव हो रहा है
स्थानीय ग्रामीण चंद्र दास ने कहा कि ढलाई के बावजूद छत पर भारी जलजमाव हो रहा है। दीवारों से पानी का रिसाव हो रहा है और नई दीवारों में सीलन की समस्या गंभीर रूप ले चुकी है। ढलाई के बाद छत की स्थिति इतनी कमजोर हो गई कि उसे गिरने से बचाने के लिए बीच-बीच में अस्थायी लकड़ी और लोहे के टेक लगाने पड़े हैं। निर्माण कार्य अभी पूरा भी नहीं हुआ है, लेकिन खिड़कियों के छज्जे और बालकनी के हिस्से पहले ही टूटकर नीचे गिर चुके हैं। अलग-अलग मोटाई के सरिए
स्थानीय आफताब आलम नदवी ने पिलर और सरिया को दिखाते हुए कहा कि छत पर आगे बनने वाले पिलरों में 8 अलग-अलग व्यास 12mm, 16mm, 20mm आदि) के सरिए मनमाने ढंग से खड़े किए गए हैं। जिसमें 12 एमएम, 16 एमएम तथा 20 एमएम जैसे सरिया लगा अलग हां, जो तकनीकी रूप से संरचना की मजबूती पर सवाल खड़े करते हैं।
अन्य स्थानीय ग्रामीण का कहना है कि यह निर्माण कार्य पिछले दो से तीन वर्षों से बेहद धीमी गति से चल रहा है। इसके अतिरिक्त कार्यस्थल पर कोई योजना सूचना बोर्ड नहीं लगाया गया है, जिससे निम्नलिखित जानकारियां पूरी तरह छिपाई गई हैं । योजना का कुल प्राक्कलित बजट कितना है, कार्य किस योजना के तहत हो रहा है, मुख्यमंत्री या केंद्र सरकार की निधि से, कार्य का संवेदक कौन है और कार्य पूर्ण करने की अंतिम तिथि क्या है। ये सब सवाल उठाए जा रहे हैं।
आंदोलन की दी चेतावनी
ग्रामीणों ने जिला पदाधिकारी और पंचायती राज विभाग से मांग की है कि उच्चस्तरीय तकनीकी टीम गठित कर सामग्री की लैब जांच कराई जाए और दोषी संवेदक और लापरवाह अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो वे जिला मुख्यालय पर धरना-प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होंगे। जांच रिपोर्ट विभाग को भेजा गया : बीपीआरओ
प्रखंड पंचायती राज पदाधिकारी तुलसी कुमारी ने बताया कि ग्रामीणों की ओर से उठाई गई मांग पर संज्ञान लेते हुए जांच रिपोर्ट विभाग को भेज दिया गया है। जांच रिपोर्ट देने के बाद विभाग अपने स्तर से इसपर निर्माण कार्य कर रहे हैं एजेंसी BCD से जवाब मांगेगी। हालांकि निर्माण कार्य अभी पूरा नहीं हुआ है इसलिए इस पर कोई अंतिम रिपोर्ट हमारे तरफ से नहीं बनाया जा सकता है। हमने ग्रामीणों की मांग पर आधारित रिपोर्ट भेज दिया है ।
पंचायती राज व्यवस्था के लिए बना रहा भवन
डगरूआ प्रखंड के दरियापुर पंचायत में त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था के सुचारू संचालन और ग्रामीणों की समस्याओं के त्वरित निष्पादन के लिए पंचायत सरकार भवन का निर्माण कराया जा रहा है। इस भवन का मुख्य उद्देश्य यह है कि मुखिया, सरपंच, पंचायत समिति सदस्य, वार्ड सदस्य, पंचायत सचिव एवं अन्य जन-प्रतिनिधि व अधिकारी यहां बैठकर नियमित कार्यालय चला सकें, जन-सुनवाई और शिविर आयोजित कर सकें और आम जनता की शिकायतों का निवारण कर सकें। पूर्णिया में नए पंचायत सरकार भवन के निर्माण में भ्रष्टाचार और अनियमितता का आरोप लगा है। ग्रामीणों-स्थानीय युवाओं ने निर्माण स्थल पर पहुंचकर घटिया सामग्री के इस्तेमाल और तकनीकी लापरवाही का विरोध किया है। ग्रामीणों ने निर्माण कार्य की जर्जर स्थिति को उजागर करते हुए तत्काल कार्रवाई की मांग की है। इस मामले पर डगरूआ की प्रखंड पंचायती राज पदाधिकारी (बीपीआरओ) तुलसी कुमारी ने संज्ञान लिया है। उन्होंने निर्माण कार्य से संबंधित जांच रिपोर्ट उच्च विभाग को भेज दिया है। निर्माण स्थल पर मौजूद ग्रामीणों-स्थानीय लोगों ने बताया कि भवन के निर्माण में तय मानकों के अनुसार उच्च गुणवत्ता वाली ईंटों के बजाय बेहद कमजोर, दो नंबर की ईंटों का उपयोग किया गया है, जो बनने के दौरान ही झड़ने और टूटने लगी हैं। निम्न श्रेणी के सीमेंट का इस्तेमाल किया गया है। मामला डगरूआ प्रखंड की दरियापुर पंचायत के वार्ड नंबर 2 का है। सफेद बालू मिलाया गया है स्थानीय ग्रामीण नवाब ने बताया कि निर्माण कार्य के मसाले में सीमेंट का अनुपात इतना कम रखा गया है कि जोड़ पूरी तरह कमजोर हो चुके हैं। तकनीकी नियमों के विपरीत निर्माण में लोकल नदी का सफेद व कच्चा बालू मिलाया गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि बाहर केवल दिखावे के लिए लाल बालू गिराया गया था, जबकि असल कार्य में सफेद बालू खपाया गया।
दीवारों से पानी का रिसाव हो रहा है
स्थानीय ग्रामीण चंद्र दास ने कहा कि ढलाई के बावजूद छत पर भारी जलजमाव हो रहा है। दीवारों से पानी का रिसाव हो रहा है और नई दीवारों में सीलन की समस्या गंभीर रूप ले चुकी है। ढलाई के बाद छत की स्थिति इतनी कमजोर हो गई कि उसे गिरने से बचाने के लिए बीच-बीच में अस्थायी लकड़ी और लोहे के टेक लगाने पड़े हैं। निर्माण कार्य अभी पूरा भी नहीं हुआ है, लेकिन खिड़कियों के छज्जे और बालकनी के हिस्से पहले ही टूटकर नीचे गिर चुके हैं। अलग-अलग मोटाई के सरिए
स्थानीय आफताब आलम नदवी ने पिलर और सरिया को दिखाते हुए कहा कि छत पर आगे बनने वाले पिलरों में 8 अलग-अलग व्यास 12mm, 16mm, 20mm आदि) के सरिए मनमाने ढंग से खड़े किए गए हैं। जिसमें 12 एमएम, 16 एमएम तथा 20 एमएम जैसे सरिया लगा अलग हां, जो तकनीकी रूप से संरचना की मजबूती पर सवाल खड़े करते हैं।
अन्य स्थानीय ग्रामीण का कहना है कि यह निर्माण कार्य पिछले दो से तीन वर्षों से बेहद धीमी गति से चल रहा है। इसके अतिरिक्त कार्यस्थल पर कोई योजना सूचना बोर्ड नहीं लगाया गया है, जिससे निम्नलिखित जानकारियां पूरी तरह छिपाई गई हैं । योजना का कुल प्राक्कलित बजट कितना है, कार्य किस योजना के तहत हो रहा है, मुख्यमंत्री या केंद्र सरकार की निधि से, कार्य का संवेदक कौन है और कार्य पूर्ण करने की अंतिम तिथि क्या है। ये सब सवाल उठाए जा रहे हैं।
आंदोलन की दी चेतावनी
ग्रामीणों ने जिला पदाधिकारी और पंचायती राज विभाग से मांग की है कि उच्चस्तरीय तकनीकी टीम गठित कर सामग्री की लैब जांच कराई जाए और दोषी संवेदक और लापरवाह अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो वे जिला मुख्यालय पर धरना-प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होंगे। जांच रिपोर्ट विभाग को भेजा गया : बीपीआरओ
प्रखंड पंचायती राज पदाधिकारी तुलसी कुमारी ने बताया कि ग्रामीणों की ओर से उठाई गई मांग पर संज्ञान लेते हुए जांच रिपोर्ट विभाग को भेज दिया गया है। जांच रिपोर्ट देने के बाद विभाग अपने स्तर से इसपर निर्माण कार्य कर रहे हैं एजेंसी BCD से जवाब मांगेगी। हालांकि निर्माण कार्य अभी पूरा नहीं हुआ है इसलिए इस पर कोई अंतिम रिपोर्ट हमारे तरफ से नहीं बनाया जा सकता है। हमने ग्रामीणों की मांग पर आधारित रिपोर्ट भेज दिया है ।
पंचायती राज व्यवस्था के लिए बना रहा भवन
डगरूआ प्रखंड के दरियापुर पंचायत में त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था के सुचारू संचालन और ग्रामीणों की समस्याओं के त्वरित निष्पादन के लिए पंचायत सरकार भवन का निर्माण कराया जा रहा है। इस भवन का मुख्य उद्देश्य यह है कि मुखिया, सरपंच, पंचायत समिति सदस्य, वार्ड सदस्य, पंचायत सचिव एवं अन्य जन-प्रतिनिधि व अधिकारी यहां बैठकर नियमित कार्यालय चला सकें, जन-सुनवाई और शिविर आयोजित कर सकें और आम जनता की शिकायतों का निवारण कर सकें।


