बिहार में शिक्षा की बदहाली व नौकरियों के मुद्दे पर अब छात्र-युवा संगठनों ने सरकार के खिलाफ सीधी जंग का ऐलान कर दिया है। ‘स्कूल ठीक करो, शिक्षा सुधारो’ अभियान के तहत आइसा (AISA) और इंकलाबी नौजवान सभा (RYA) राज्यभर में छात्र-युवा संसद का आयोजन कर रहे हैं। इस मुहिम की कड़ी में गया के गांधी मंडप में छात्र युवा संसद का आयोजन किया गया। इस मौके पर वक्ताओं ने शिक्षा व बेरोजगारी को केंद्र में रखा। साथ ही आह्वान किया गया कि 6 सितंबर को पटना के एसके मेमोरियल हॉल में आयोजित होने वाले राज्यस्तरीय महाजुटान ‘जेन-जी राइजिंग’ (Gen-Z Rising) में शरीक हों। ’बिहार में शिक्षा व्यवस्था का ढांचा पूरी तरह चरमरा चुका है’ संदीप सौरभ ने कहा कि बिहार में शिक्षा व्यवस्था का ढांचा पूरी तरह चरमरा चुका है। हमारी पड़ताल में जो आंकड़े आए हैं, वे बेहद चौंकाने वाले हैं। हमने अपने विधानसभा क्षेत्र के 25 हाई स्कूल के प्रिंसिपल्स को बुलाकर बैठक की। इसमें सामने आया कि 25 में से 21 स्कूल उत्क्रमित (अपग्रैडेड) थे, लेकिन उनमें से मात्र 3 स्कूलों के पास ही अपनी बिल्डिंग है। बाकी 18 स्कूलों के पास ना कोई भवन है और ना कोई बुनियादी ढांचा। हालात यह हैं कि एक ही कमरे में 9वीं, 10वीं, 11वीं और 12वीं की कक्षाएं चलाई जा रही हैं। गणित और अंग्रेजी जैसे मुख्य विषयों के शिक्षक तक उपलब्ध नहीं हैं। 7-8 साल पहले सरकार ने हर पंचायत में उत्क्रमित उच्च माध्यमिक विद्यालय खोलने की घोषणा की थी, लेकिन सच यह है कि पूरे बिहार के 80% से अधिक उत्क्रमित हाई स्कूलों के पास न अपनी जमीन है, न भवन और ना ही पर्याप्त शिक्षक। सरकार ने इंटर के बच्चों को कॉलेजों से बाहर निकाल दिया और अब ग्रेजुएशन के छात्रों को भी निकालने की तैयारी में है। 1976 के यूनिवर्सिटी एक्ट को खत्म कर नया कानून लाया जा रहा है ताकि उच्च शिक्षा का निजीकरण किया जा सके और छात्रों को प्राइवेट कोचिंग संस्थानों के हवाले धकेला जा सके। पालीगंज विधायक ने सम्राट सरकार को मनुस्मृति वाली सरकार कहा यही नहीं विधायक संदीप सौरभ ने राज्य सरकार को मनुस्मृति वाली सरकार बताया। कहा कि सरकार मनुस्मृति वाली सोच से संचालित हो रही है जो गरीब वंचित और दलित तबके को शिक्षा से दूर रखना चाहती है। जहां भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का माहौल बनता है, चाहे वह जेएनयू हो, दिल्ली विश्वविद्यालय हो या जाधवपुर विश्वविद्यालय। सरकार वहां संस्थागत हमला करती है। 6 सितंबर को पटना में होगा बड़ा महाजुटान, 11 सवालों पर युवाओं को जोड़ रहे इंकलाबी नौजवान सभा के उपाध्यक्ष तारिक अनवर ने कहा कि बिहार के हर कोने से युवाओं और छात्रों का असंतोष सड़क पर आ रहा है। शिक्षा और रोजगार की बदहाली को लेकर छात्र-युवा संसद का आयोजन किया जा रहा है। मगध जोन के अरवल, जहानाबाद और औरंगाबाद समेत कई जिलों से छात्र-युवा इस आंदोलन से जुड़ रहे हैं। हमारी मांग है कि स्कूली शिक्षा से लेकर विश्वविद्यालय स्तर तक व्यापक सुधार हों। पढ़ाई के साथ एकेडमिक कैलेंडर जारी हो और भ्रष्टाचार पर रोक लगे। वहीं नौकरियों के लिए स्पष्ट भर्ती कैलेंडर’ जारी किया जाए, जिसमें आवेदन से लेकर परीक्षा, परिणाम और फाइनल जॉइनिंग की समयबद्ध सीमा तय हो। तारिक अनवर ने कहा कि 6 सितंबर को पटना के एसके मेमोरियल हॉल में होने वाले राज्यस्तरीय छात्र-युवा संसद में आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष कॉमरेड नेहा समेत कई प्रमुख छात्र नेता शामिल होंगे। इसके बाद हमारी टीम खुद स्कूलों का ऑडिट करेगी और जांचेगी कि वहां शिक्षक, भवन और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध है या नहीं। छात्र-युवा आंदोलन की मुख्य मांगें एकेडमिक व भर्ती कैलेंडर: सभी परीक्षाओं और भर्तियों के लिए समयबद्ध कैलेंडर जारी हो।
पारदर्शिता व पेपर लीक पर रोक: सभी भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और विश्वसनीयता सुनिश्चित की जाए।
स्कूल ऑडिट अभियान: बुनियादी सुविधाओं (भवन, शिक्षक, शौचालय) के बिना चल रहे स्कूलों को दुरुस्त किया जाए।
निजीकरण पर रोक: कॉलेजों और विश्वविद्यालयों से छात्रों को बाहर निकालने और शिक्षा के निजीकरण की नीतियों को तुरंत वापस लिया जाए। बिहार में शिक्षा की बदहाली व नौकरियों के मुद्दे पर अब छात्र-युवा संगठनों ने सरकार के खिलाफ सीधी जंग का ऐलान कर दिया है। ‘स्कूल ठीक करो, शिक्षा सुधारो’ अभियान के तहत आइसा (AISA) और इंकलाबी नौजवान सभा (RYA) राज्यभर में छात्र-युवा संसद का आयोजन कर रहे हैं। इस मुहिम की कड़ी में गया के गांधी मंडप में छात्र युवा संसद का आयोजन किया गया। इस मौके पर वक्ताओं ने शिक्षा व बेरोजगारी को केंद्र में रखा। साथ ही आह्वान किया गया कि 6 सितंबर को पटना के एसके मेमोरियल हॉल में आयोजित होने वाले राज्यस्तरीय महाजुटान ‘जेन-जी राइजिंग’ (Gen-Z Rising) में शरीक हों। ’बिहार में शिक्षा व्यवस्था का ढांचा पूरी तरह चरमरा चुका है’ संदीप सौरभ ने कहा कि बिहार में शिक्षा व्यवस्था का ढांचा पूरी तरह चरमरा चुका है। हमारी पड़ताल में जो आंकड़े आए हैं, वे बेहद चौंकाने वाले हैं। हमने अपने विधानसभा क्षेत्र के 25 हाई स्कूल के प्रिंसिपल्स को बुलाकर बैठक की। इसमें सामने आया कि 25 में से 21 स्कूल उत्क्रमित (अपग्रैडेड) थे, लेकिन उनमें से मात्र 3 स्कूलों के पास ही अपनी बिल्डिंग है। बाकी 18 स्कूलों के पास ना कोई भवन है और ना कोई बुनियादी ढांचा। हालात यह हैं कि एक ही कमरे में 9वीं, 10वीं, 11वीं और 12वीं की कक्षाएं चलाई जा रही हैं। गणित और अंग्रेजी जैसे मुख्य विषयों के शिक्षक तक उपलब्ध नहीं हैं। 7-8 साल पहले सरकार ने हर पंचायत में उत्क्रमित उच्च माध्यमिक विद्यालय खोलने की घोषणा की थी, लेकिन सच यह है कि पूरे बिहार के 80% से अधिक उत्क्रमित हाई स्कूलों के पास न अपनी जमीन है, न भवन और ना ही पर्याप्त शिक्षक। सरकार ने इंटर के बच्चों को कॉलेजों से बाहर निकाल दिया और अब ग्रेजुएशन के छात्रों को भी निकालने की तैयारी में है। 1976 के यूनिवर्सिटी एक्ट को खत्म कर नया कानून लाया जा रहा है ताकि उच्च शिक्षा का निजीकरण किया जा सके और छात्रों को प्राइवेट कोचिंग संस्थानों के हवाले धकेला जा सके। पालीगंज विधायक ने सम्राट सरकार को मनुस्मृति वाली सरकार कहा यही नहीं विधायक संदीप सौरभ ने राज्य सरकार को मनुस्मृति वाली सरकार बताया। कहा कि सरकार मनुस्मृति वाली सोच से संचालित हो रही है जो गरीब वंचित और दलित तबके को शिक्षा से दूर रखना चाहती है। जहां भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का माहौल बनता है, चाहे वह जेएनयू हो, दिल्ली विश्वविद्यालय हो या जाधवपुर विश्वविद्यालय। सरकार वहां संस्थागत हमला करती है। 6 सितंबर को पटना में होगा बड़ा महाजुटान, 11 सवालों पर युवाओं को जोड़ रहे इंकलाबी नौजवान सभा के उपाध्यक्ष तारिक अनवर ने कहा कि बिहार के हर कोने से युवाओं और छात्रों का असंतोष सड़क पर आ रहा है। शिक्षा और रोजगार की बदहाली को लेकर छात्र-युवा संसद का आयोजन किया जा रहा है। मगध जोन के अरवल, जहानाबाद और औरंगाबाद समेत कई जिलों से छात्र-युवा इस आंदोलन से जुड़ रहे हैं। हमारी मांग है कि स्कूली शिक्षा से लेकर विश्वविद्यालय स्तर तक व्यापक सुधार हों। पढ़ाई के साथ एकेडमिक कैलेंडर जारी हो और भ्रष्टाचार पर रोक लगे। वहीं नौकरियों के लिए स्पष्ट भर्ती कैलेंडर’ जारी किया जाए, जिसमें आवेदन से लेकर परीक्षा, परिणाम और फाइनल जॉइनिंग की समयबद्ध सीमा तय हो। तारिक अनवर ने कहा कि 6 सितंबर को पटना के एसके मेमोरियल हॉल में होने वाले राज्यस्तरीय छात्र-युवा संसद में आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष कॉमरेड नेहा समेत कई प्रमुख छात्र नेता शामिल होंगे। इसके बाद हमारी टीम खुद स्कूलों का ऑडिट करेगी और जांचेगी कि वहां शिक्षक, भवन और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध है या नहीं। छात्र-युवा आंदोलन की मुख्य मांगें एकेडमिक व भर्ती कैलेंडर: सभी परीक्षाओं और भर्तियों के लिए समयबद्ध कैलेंडर जारी हो।
पारदर्शिता व पेपर लीक पर रोक: सभी भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और विश्वसनीयता सुनिश्चित की जाए।
स्कूल ऑडिट अभियान: बुनियादी सुविधाओं (भवन, शिक्षक, शौचालय) के बिना चल रहे स्कूलों को दुरुस्त किया जाए।
निजीकरण पर रोक: कॉलेजों और विश्वविद्यालयों से छात्रों को बाहर निकालने और शिक्षा के निजीकरण की नीतियों को तुरंत वापस लिया जाए।

