‘न्याय मिला, पर चैन नहीं’:बेटे की हत्या के दोषियों को उम्रकैद, मां बोले- फांसी से कम कुछ मंजूर नहीं; दोषियों के मददगार घूम रहे

‘न्याय मिला, पर चैन नहीं’:बेटे की हत्या के दोषियों को उम्रकैद, मां बोले- फांसी से कम कुछ मंजूर नहीं; दोषियों के मददगार घूम रहे

‘बेटे की हत्या करने वालों को उम्र कैद की सजा हुई, पर इससे मैं संतुष्ट नहीं हूं। उम्रकैद की सजा से हमें क्या तसल्ली मिलेगी, जेल में तो उन्हें समय पर खाना-पानी मिलता ही रहेगा। मेरे हंसते-खेलते बच्चे को हमसे छीन लिया। हमें फांसी से कम कुछ मंजूर नहीं था। दोषियों के 4-6 मददगार और रिश्तेदार अब भी गांव में खुलेआम घूम रहे हैं। वे हर वक्त हमपर नजर रखते हैं। डर है कि किसी भी दिन हम पर हमला कर देंगे। न्याय तो मिला, पर जब तक सुरक्षा और कड़ी सजा नहीं मिलती, हम चैन से कैसे जिएंगे।’ ये बातें बेगूसराय के रहने वाले अनिल महतो की पत्नी अरीना देवी ने कही है। जिनके बेटे अंकुश (10) को 7 सितंबर 2024 को मां-बेटे ने मिलकर मार डाला था, सिर धड़ से अलग कर दिया था। घटना मंसूरचक थाना क्षेत्र स्थित बड़कुरवा गांव की है।
हत्या के पीछे क्या कारण है, मर्डर के बाद क्या हुआ, ग्रामीणों ने आरोपी को कैसे पकड़ा, पढ़ें रिपोर्ट… मां के उकसावे में आरोपी ने काटा सिर 7 सितंबर 2024 को तीज था। अनिल कुमार महतो का बेटा अंकुश कुमार (10) और छोटा बेटा अंशु कुमार (7) खेलते-खेलते गांव के एक बगीचे में गया था। वहां विलट महतो का बेटा विजय कुमार महतो (32) अपनी मां गजीया देवी के साथ ताड़ के पेड़ से गिरे फल चुनकर बोरी में भर रहा था। अंकुश ने उनसे बस इतना पूछा आप लोग यहां से ताड़ का फल क्यों ले रहे हैं। इसी बात पर आरोपी गजीया देवी आपे से बाहर हो गई। उसने अपने बेटे विजय महतो को उकसाना शुरू कर दिया। मां के उकसावे में आकर विजय कुमार महतो ने क्रूरता की सारी हदें पार कर दी। उसने पास में रखे लोहे के धारदार गड़ासे से 10 साल के मासूम अंकुश पर ताबड़तोड़ हमला कर दिया और झटके में उसका सिर धड़ से अलग कर दिया।
छोटा भाई जान बचाकर घर पहुंचा, मां को जानकारी दी 7 साल के छोटे भाई अंशु के सामने ही विजय महतो ने अंकुश की गर्दन पर गड़ासा चला दिया। दहशत से कांपता हुआ छोटा भाई अंशु किसी तरह वहां से जान बचाकर घर की तरफ भागा। मां अरीना देवी तीज के निर्जला व्रत के कारण घर में चौकी पर लेटी हुई थी। अंशु ने बदहवास हालत में आकर मां को जगाया और चीखते हुए कहा मम्मी-मम्मी उठो, भइया को मार रहा है, हाथ-पैर बांध दिया है। अरीना देवी बदहवास होकर नंगे पांव बागीचे की ओर दौड़ी। देखा मासूम अंकुश का सिर कटी लाश खून से लथपथ पड़ी थी। हत्या के बाद झाड़ियों में छिप गया था आरोपी ग्रामीण अखिलेश कुमार बताते हैं कि हमलोग जब मौके पर गए तो कातिल का कहीं कोई सुराग नहीं मिल रहा था। हम अपने साथ तीन-चार अन्य लोगों को लेकर गांव के चारों तरफ कातिल की तलाश में निकल पड़े। घटनास्थल से महज 300 से 500 मीटर की दूरी पर एक गहरा गड्ढा था, जिसके चारों तरफ झाड़ियां थी। जैसे ही हम लोग गड्ढे के करीब पहुंचे, नजर एक संदिग्ध शख्स पर पड़ी। वह गड्ढे के अंदर दुबक कर बैठा था। उसने काले रंग की टी-शर्ट और गमछा पहन रखा था, हाथ में एक भारी-भरकम गड़ांसा था, जो खून से लाल था। हमने उससे पूछा कि गड्ढे में क्या कर रहे हो, तो उसने बेहद शातिराना अंदाज में झूठ बोलते हुए कहा कि हम तो यहां लैट्रिन करने आए हैं। तभी मेरी नजर गड़ासे की धार पर पड़ी, जिस पर ताजा खून लगा था। जिसके बाद दरिंदे का असली रूप बाहर आ गया। उसने हम पर गड़ासे से जानलेवा वार कर दिया। आसपास मौजूद 3-4 ग्रामीण विजय को पकड़ने के लिए आगे बढ़े, तो उसने गड़ासा हवा में भांजना शुरू कर दिया। उसने धमकी दी की अगर तुम लोगों ने मुझे पकड़ने की कोशिश की, तो याद रखना, जैसे उस बच्चे को काटकर फेंक दिया है, वैसे ही तुम सब को भी काट डालूंगा।
एक ग्रामीण का कातिल ने हाथ तोड़ दिया अखिलेश कहते हैं कि कातिल ने प्रवीण महतो पर सीधा गड़ासा चला दिया, जिससे उनके हाथ में चोट लग गई, खून भी निकलने लगा। प्रवीण को बचाने आए राजू कुमार पर भी दरिंदे ने हमला कर दिया और राजू का हाथ टूट गया। इसके बाद ग्रामीणों ने लाठियों और डंडे से आरोपी को कोबू में किया। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और आरोपी को कस्टडी में ले लिया।
उम्र कैद के साथ 25-25 हजार का जुर्माना हत्याकांड में मंसूरचक थाना कांड संख्या 92/24 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। अनुसंधान का जिम्मा पुअनि मनोज कुमार सिंह को सौंपा गया था। पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की। बेगूसराय के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (द्वितीय) ब्रजेश कुमार सिंह की अदालत ने मामले में सुनवाई पूरी करते हुए विजय कुमार महतो और उसकी मां गजीया देवी को दोषी पाया। धारा- 103(3) एवं 3(5) BNS में दोनों दोषियों को आजीवन कारावास। दोनों अभियुक्तों पर 25-25 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया है। अर्थदंड की राशि नहीं देने पर दोनों दोषियों को 1 साल का अतिरिक्त साधारण कारावास होगा। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से अपर लोक अभियोजक (APP) राम प्रकाश यादव ने मजबूती से पक्ष रखा।
10 लोगों की गवाही हुई कोर्ट में सुनवाई के दौरान मृतक के पिता अनिल कुमार महतो, प्रत्यक्षदर्शी छोटा भाई अंशु, मां अरीना देवी और अनुसंधानकर्ता मनोज कुमार सिंह सहित 10 लोगों की गवाही कराई गई। पुलिस ने मौके से जब्त किया गया खून से सना धारदार लोहे का गड़ासा और फॉरेंसिक रिपोर्ट अदालत में पेश की। गवाहों के बयान और पुख्ता सबूतों के आधार पर अदालत ने इसे जघन्य अपराध मानते हुए फैसला सुनाया। ‘बेटे की हत्या करने वालों को उम्र कैद की सजा हुई, पर इससे मैं संतुष्ट नहीं हूं। उम्रकैद की सजा से हमें क्या तसल्ली मिलेगी, जेल में तो उन्हें समय पर खाना-पानी मिलता ही रहेगा। मेरे हंसते-खेलते बच्चे को हमसे छीन लिया। हमें फांसी से कम कुछ मंजूर नहीं था। दोषियों के 4-6 मददगार और रिश्तेदार अब भी गांव में खुलेआम घूम रहे हैं। वे हर वक्त हमपर नजर रखते हैं। डर है कि किसी भी दिन हम पर हमला कर देंगे। न्याय तो मिला, पर जब तक सुरक्षा और कड़ी सजा नहीं मिलती, हम चैन से कैसे जिएंगे।’ ये बातें बेगूसराय के रहने वाले अनिल महतो की पत्नी अरीना देवी ने कही है। जिनके बेटे अंकुश (10) को 7 सितंबर 2024 को मां-बेटे ने मिलकर मार डाला था, सिर धड़ से अलग कर दिया था। घटना मंसूरचक थाना क्षेत्र स्थित बड़कुरवा गांव की है।
हत्या के पीछे क्या कारण है, मर्डर के बाद क्या हुआ, ग्रामीणों ने आरोपी को कैसे पकड़ा, पढ़ें रिपोर्ट… मां के उकसावे में आरोपी ने काटा सिर 7 सितंबर 2024 को तीज था। अनिल कुमार महतो का बेटा अंकुश कुमार (10) और छोटा बेटा अंशु कुमार (7) खेलते-खेलते गांव के एक बगीचे में गया था। वहां विलट महतो का बेटा विजय कुमार महतो (32) अपनी मां गजीया देवी के साथ ताड़ के पेड़ से गिरे फल चुनकर बोरी में भर रहा था। अंकुश ने उनसे बस इतना पूछा आप लोग यहां से ताड़ का फल क्यों ले रहे हैं। इसी बात पर आरोपी गजीया देवी आपे से बाहर हो गई। उसने अपने बेटे विजय महतो को उकसाना शुरू कर दिया। मां के उकसावे में आकर विजय कुमार महतो ने क्रूरता की सारी हदें पार कर दी। उसने पास में रखे लोहे के धारदार गड़ासे से 10 साल के मासूम अंकुश पर ताबड़तोड़ हमला कर दिया और झटके में उसका सिर धड़ से अलग कर दिया।
छोटा भाई जान बचाकर घर पहुंचा, मां को जानकारी दी 7 साल के छोटे भाई अंशु के सामने ही विजय महतो ने अंकुश की गर्दन पर गड़ासा चला दिया। दहशत से कांपता हुआ छोटा भाई अंशु किसी तरह वहां से जान बचाकर घर की तरफ भागा। मां अरीना देवी तीज के निर्जला व्रत के कारण घर में चौकी पर लेटी हुई थी। अंशु ने बदहवास हालत में आकर मां को जगाया और चीखते हुए कहा मम्मी-मम्मी उठो, भइया को मार रहा है, हाथ-पैर बांध दिया है। अरीना देवी बदहवास होकर नंगे पांव बागीचे की ओर दौड़ी। देखा मासूम अंकुश का सिर कटी लाश खून से लथपथ पड़ी थी। हत्या के बाद झाड़ियों में छिप गया था आरोपी ग्रामीण अखिलेश कुमार बताते हैं कि हमलोग जब मौके पर गए तो कातिल का कहीं कोई सुराग नहीं मिल रहा था। हम अपने साथ तीन-चार अन्य लोगों को लेकर गांव के चारों तरफ कातिल की तलाश में निकल पड़े। घटनास्थल से महज 300 से 500 मीटर की दूरी पर एक गहरा गड्ढा था, जिसके चारों तरफ झाड़ियां थी। जैसे ही हम लोग गड्ढे के करीब पहुंचे, नजर एक संदिग्ध शख्स पर पड़ी। वह गड्ढे के अंदर दुबक कर बैठा था। उसने काले रंग की टी-शर्ट और गमछा पहन रखा था, हाथ में एक भारी-भरकम गड़ांसा था, जो खून से लाल था। हमने उससे पूछा कि गड्ढे में क्या कर रहे हो, तो उसने बेहद शातिराना अंदाज में झूठ बोलते हुए कहा कि हम तो यहां लैट्रिन करने आए हैं। तभी मेरी नजर गड़ासे की धार पर पड़ी, जिस पर ताजा खून लगा था। जिसके बाद दरिंदे का असली रूप बाहर आ गया। उसने हम पर गड़ासे से जानलेवा वार कर दिया। आसपास मौजूद 3-4 ग्रामीण विजय को पकड़ने के लिए आगे बढ़े, तो उसने गड़ासा हवा में भांजना शुरू कर दिया। उसने धमकी दी की अगर तुम लोगों ने मुझे पकड़ने की कोशिश की, तो याद रखना, जैसे उस बच्चे को काटकर फेंक दिया है, वैसे ही तुम सब को भी काट डालूंगा।
एक ग्रामीण का कातिल ने हाथ तोड़ दिया अखिलेश कहते हैं कि कातिल ने प्रवीण महतो पर सीधा गड़ासा चला दिया, जिससे उनके हाथ में चोट लग गई, खून भी निकलने लगा। प्रवीण को बचाने आए राजू कुमार पर भी दरिंदे ने हमला कर दिया और राजू का हाथ टूट गया। इसके बाद ग्रामीणों ने लाठियों और डंडे से आरोपी को कोबू में किया। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और आरोपी को कस्टडी में ले लिया।
उम्र कैद के साथ 25-25 हजार का जुर्माना हत्याकांड में मंसूरचक थाना कांड संख्या 92/24 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। अनुसंधान का जिम्मा पुअनि मनोज कुमार सिंह को सौंपा गया था। पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की। बेगूसराय के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (द्वितीय) ब्रजेश कुमार सिंह की अदालत ने मामले में सुनवाई पूरी करते हुए विजय कुमार महतो और उसकी मां गजीया देवी को दोषी पाया। धारा- 103(3) एवं 3(5) BNS में दोनों दोषियों को आजीवन कारावास। दोनों अभियुक्तों पर 25-25 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया है। अर्थदंड की राशि नहीं देने पर दोनों दोषियों को 1 साल का अतिरिक्त साधारण कारावास होगा। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से अपर लोक अभियोजक (APP) राम प्रकाश यादव ने मजबूती से पक्ष रखा।
10 लोगों की गवाही हुई कोर्ट में सुनवाई के दौरान मृतक के पिता अनिल कुमार महतो, प्रत्यक्षदर्शी छोटा भाई अंशु, मां अरीना देवी और अनुसंधानकर्ता मनोज कुमार सिंह सहित 10 लोगों की गवाही कराई गई। पुलिस ने मौके से जब्त किया गया खून से सना धारदार लोहे का गड़ासा और फॉरेंसिक रिपोर्ट अदालत में पेश की। गवाहों के बयान और पुख्ता सबूतों के आधार पर अदालत ने इसे जघन्य अपराध मानते हुए फैसला सुनाया।  

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