Kangana Ranaut Praisies Nepal School Principal: नेपाल में आई भीषण बाढ़ और अचानक बढ़े जलस्तर के बीच एक स्कूल प्रिंसिपल की सूझ-बूझ ने सैकड़ों बच्चों की जान बचा ली। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही बहादुरी और सूझ-बूझ की इस कहानी को बॉलीवुड एक्ट्रेस और बीजेपी सांसद कंगना रनौत ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर शेयर किया है। एक्ट्रेस ने इस रील को शेयर करते हुए एक नोट भी लिखा है, जिसमें उन्होंने हेडमास्टर की तारीफ करते हुए उनकी समझदारी और समय रहते लिए गए फैसले को सलाम किया है।

कंगना रनौत ने शेयर की हेडमास्टर की कहानी
कंगना रनौत ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर एक पोस्ट शेयर की, जिसमें नेपाल में बाढ़ के दौरान एक स्कूल प्रिंसिपल द्वारा बच्चों की जान बचाने की घटना का जिक्र था। इस पोस्ट के साथ कंगना ने लिखा, “एक धूप भरी सुबह में ऐसा करना, जब बाढ़ का कोई नामो-निशान न हो, आसमान साफ हो और किसी भी अधिकारी की तरफ से कोई चेतावनी न आई हो, इसके लिए सिर्फ सूझ-बूझ ही नहीं, बल्कि इंट्यूशन और ईश्वर की कृपा भी चाहिए। शाबाश हेडमास्टर।”
कैसे स्कूल प्रिंसिपल ने कैसे बचाई 1,643 बच्चों की जान?
रिपोर्ट के मुताबिक, बीते बुधवार यानी 26 अगस्त की सुबह करीब 9:20 बजे उत्तरी-मध्य नेपाल की त्रिशूली घाटी में स्थित त्रिभुवन त्रिशूली माध्यमिक विद्यालय में करीब 900 बच्चे सुबह की शिफ्ट में पढ़ रहे थे। वहीं, करीब 700 अन्य बच्चे पैदल और बसों से स्कूल पहुंच रहे थे। तभी स्कूल के प्रिंसिपल राजेंद्र ददाबी के पास बेत्रावती में रहने वाले एक दोस्त का फोन आया। दादाबी ने बताया, “उन्होंने कहा कि गांव खत्म हो गया है, नदी उसे बहा ले गई है। इतना ही नहीं उन्होंने मुझसे वहां से भागने को कहा।”
दोस्त ने उन्हें बताया कि गांव नदी के तेज बहाव में बह गया है और उन्हें तुरंत भागने के लिए कहा। 47 वर्षीय इंग्लिश टीचर ददाबी ने खतरे को समझते हुए तुरंत स्कूल बसों के ड्राइवरों से कॉन्टैक्ट किया। उन्हें याद आया कि स्कूल की बसें रास्ते में थीं और हर बस में 80 बच्चे सवार थे। उन्होंने सभी ड्राइवरों को बस वापस मोड़ने के लिए कहा, हालांकि एक ड्राइवर से उनका संपर्क नहीं हो सका।
जैसे ही बस दूसरी तरफ पहुंची, वो पुल ढह गया
वायरल रील के मुताबिक, ददाबी ने बताया कि “मैंने एक ड्राइवर को छोड़कर बाकी सभी से संपर्क किया और उन्हें वापस लौटने को कहा। फिर मैंने उस बस को पुल पार करते देखा जिससे मैं संपर्क नहीं कर पाया था। तब तक पानी स्कूल के मैदान में आ चुका था, पानी का बहाव बहुत तेज था, इसलिए मैंने ड्राइवर से बस घुमाने को कहा। जैसे ही बस दूसरी तरफ पहुंची, वो पुल ढह गया।”
प्रिंसिपल राजेंद्र ददाबी की इस तेज सोच और सही समय पर लिए गए फैसले की वजह से 1,643 बच्चों की जान बच गई। बता दें कि इस घटना में शिक्षकों के स्टाफ में से सिर्फ एक सदस्य को छोड़कर बाकी सभी सुरक्षित बच गए।
नेपाल बाढ़ त्रासदी के बारे में
नेपाल में 26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, ब्होटेकोशी-त्रिशूली बाढ़ में अब तक 734 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 2,400 से ज्यादा लोग अब भी लापता हैं। माना जा रहा है कि हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर का एक हिस्सा टूटने से अचानक तेज जलप्रवाह और मलबा नीचे की ओर आया, जिसने नेपाल के कई इलाकों में भारी तबाही मचाई। राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है और दुर्गम इलाकों में पहुंचने में मुश्किल के कारण मृतकों और लापता लोगों की संख्या बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है।


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URGENTE – MILES DE PERSONAS ENTERRADAS VIVAS, PUEBLOS BORRADOS DEL MAPA: LOS HUMANOS SOMOS NADA ANTE LA NATURALEZA.
En segundos el alud se llevó todo, hizo desaparecer pueblos enteros, miles de personas han muerto y otras miles están desaparecidas.