नालंदा विश्वविद्यालय में ‘शोध विहार’ का शुभारंभ:एक ही छत के नीचे 6 रिसर्च सेंटर; संवाद सत्र में छात्रों ने चांसलर से पूछे सवाल

नालंदा विश्वविद्यालय में ‘शोध विहार’ का शुभारंभ:एक ही छत के नीचे 6 रिसर्च सेंटर; संवाद सत्र में छात्रों ने चांसलर से पूछे सवाल

नालंदा विश्वविद्यालय में अनुसंधान, नीतिगत अध्ययनों और अंतर-विषयक सहयोग को नई ऊंचाई देने के लिए सोमवार को साझा शोध परिसर ‘नालंदा शोध विहार’ का उद्घाटन किया गया। विश्वविद्यालय के चांसलर और 16वें वित्त आयोग के अध्यक्ष प्रोफेसर अरविंद पनगढ़िया ने इसका विधिवत लोकार्पण किया। इस नई पहल के तहत अब विश्वविद्यालय में संचालित सभी 6 केंद्रों को एक ही परिसर में लाया गया है, जिससे शोध कार्यों को और अधिक गति मिलेगी।
​उद्घाटन के बाद विश्वविद्यालय के विश्वमित्रालय सभागार में एक विशेष व्याख्यान और संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए कुलपति प्रोफेसर सचिन चतुर्वेदी ने विश्वविद्यालय की हालिया शैक्षणिक प्रगति, भावी योजनाओं और संस्थागत डेटाबेस को सुदृढ़ करने की दिशा में उठाए जा रहे कदमों की विस्तृत जानकारी दी। शिक्षण और शोध एक-दूसरे के पूरक: प्रो. पनगढ़िया समारोह को संबोधित करते हुए चांसलर प्रो. अरविंद पनगढ़िया ने अध्यापन और अनुसंधान के बीच गहरे तालमेल पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ये दोनों एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं और इन्हें साथ-साथ आगे बढ़ना चाहिए। छात्रों का मार्गदर्शन करते हुए उन्होंने कहा कि आप अपनी पसंद के विषय का चयन करें, उसमें पूरी लगन के साथ विशेषज्ञता हासिल करें और निरंतर प्रयास से उत्कृष्टता की ओर बढ़ें। ​प्रो. पनगढ़िया ने इतने कम समय में विश्वविद्यालय की ओर से की गई शानदार प्रगति और शिक्षकों-छात्रों की बढ़ती संख्या के लिए कुलपति प्रो. सचिन चतुर्वेदी की पीठ थपथपाई। साथ ही, उन्होंने समाज और स्थानीय समुदायों को जोड़ने वाली विश्वविद्यालय की ‘सहभागिता’ पहल को भी एक महत्वपूर्ण कदम बताया। छात्रों ने चांसलर से किए सीधे सवाल इस दौरान एक खुला संवाद सत्र भी हुआ, जिसमें छात्रों को चांसलर से सीधे सवाल पूछने और विचार साझा करने का मौका मिला। इस परिचर्चा ने नालंदा की प्राचीन सवाल पूछने और वैचारिक आदान-प्रदान की उस महान परंपरा को एक बार फिर जीवंत कर दिया, जो इस ज्ञान-भूमि की असली पहचान है। कार्यक्रम में मौजूद विदेश मंत्रालय के सचिव (ईस्ट) रुद्रेंद्र टंडन ने भी विश्वविद्यालय की अंतरराष्ट्रीय और संस्थागत गतिविधियों को आगे बढ़ाने में मंत्रालय की ओर से हरसंभव निरंतर सहयोग का आश्वासन दिया। ​नालंदा के विकास पर राज्यपाल की अध्यक्षता में हुआ मंथन ​इससे पहले रविवार (9 अगस्त) को बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन (सेवानिवृत्त) की अध्यक्षता में नालंदा विश्वविद्यालय के दीर्घकालिक विकास को लेकर एक महत्वपूर्ण उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। ​इस बैठक में विश्वविद्यालय की बेहतर कनेक्टिविटी, नालंदा-राजगीर नॉलेज एंड इनोवेशन कैंपस के विकास और बिहार के अन्य उच्च शिक्षा संस्थानों के साथ आपसी सहयोग बढ़ाने के रोडमैप पर गंभीर चर्चा हुई। बैठक में चांसलर, बिहार के मुख्य सचिव, विदेश मंत्रालय में सचिव (ईस्ट) और कुलपति समेत केंद्र व राज्य सरकार के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। ​ नालंदा विश्वविद्यालय में अनुसंधान, नीतिगत अध्ययनों और अंतर-विषयक सहयोग को नई ऊंचाई देने के लिए सोमवार को साझा शोध परिसर ‘नालंदा शोध विहार’ का उद्घाटन किया गया। विश्वविद्यालय के चांसलर और 16वें वित्त आयोग के अध्यक्ष प्रोफेसर अरविंद पनगढ़िया ने इसका विधिवत लोकार्पण किया। इस नई पहल के तहत अब विश्वविद्यालय में संचालित सभी 6 केंद्रों को एक ही परिसर में लाया गया है, जिससे शोध कार्यों को और अधिक गति मिलेगी।
​उद्घाटन के बाद विश्वविद्यालय के विश्वमित्रालय सभागार में एक विशेष व्याख्यान और संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए कुलपति प्रोफेसर सचिन चतुर्वेदी ने विश्वविद्यालय की हालिया शैक्षणिक प्रगति, भावी योजनाओं और संस्थागत डेटाबेस को सुदृढ़ करने की दिशा में उठाए जा रहे कदमों की विस्तृत जानकारी दी। शिक्षण और शोध एक-दूसरे के पूरक: प्रो. पनगढ़िया समारोह को संबोधित करते हुए चांसलर प्रो. अरविंद पनगढ़िया ने अध्यापन और अनुसंधान के बीच गहरे तालमेल पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ये दोनों एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं और इन्हें साथ-साथ आगे बढ़ना चाहिए। छात्रों का मार्गदर्शन करते हुए उन्होंने कहा कि आप अपनी पसंद के विषय का चयन करें, उसमें पूरी लगन के साथ विशेषज्ञता हासिल करें और निरंतर प्रयास से उत्कृष्टता की ओर बढ़ें। ​प्रो. पनगढ़िया ने इतने कम समय में विश्वविद्यालय की ओर से की गई शानदार प्रगति और शिक्षकों-छात्रों की बढ़ती संख्या के लिए कुलपति प्रो. सचिन चतुर्वेदी की पीठ थपथपाई। साथ ही, उन्होंने समाज और स्थानीय समुदायों को जोड़ने वाली विश्वविद्यालय की ‘सहभागिता’ पहल को भी एक महत्वपूर्ण कदम बताया। छात्रों ने चांसलर से किए सीधे सवाल इस दौरान एक खुला संवाद सत्र भी हुआ, जिसमें छात्रों को चांसलर से सीधे सवाल पूछने और विचार साझा करने का मौका मिला। इस परिचर्चा ने नालंदा की प्राचीन सवाल पूछने और वैचारिक आदान-प्रदान की उस महान परंपरा को एक बार फिर जीवंत कर दिया, जो इस ज्ञान-भूमि की असली पहचान है। कार्यक्रम में मौजूद विदेश मंत्रालय के सचिव (ईस्ट) रुद्रेंद्र टंडन ने भी विश्वविद्यालय की अंतरराष्ट्रीय और संस्थागत गतिविधियों को आगे बढ़ाने में मंत्रालय की ओर से हरसंभव निरंतर सहयोग का आश्वासन दिया। ​नालंदा के विकास पर राज्यपाल की अध्यक्षता में हुआ मंथन ​इससे पहले रविवार (9 अगस्त) को बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन (सेवानिवृत्त) की अध्यक्षता में नालंदा विश्वविद्यालय के दीर्घकालिक विकास को लेकर एक महत्वपूर्ण उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। ​इस बैठक में विश्वविद्यालय की बेहतर कनेक्टिविटी, नालंदा-राजगीर नॉलेज एंड इनोवेशन कैंपस के विकास और बिहार के अन्य उच्च शिक्षा संस्थानों के साथ आपसी सहयोग बढ़ाने के रोडमैप पर गंभीर चर्चा हुई। बैठक में चांसलर, बिहार के मुख्य सचिव, विदेश मंत्रालय में सचिव (ईस्ट) और कुलपति समेत केंद्र व राज्य सरकार के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। ​  

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