नालंदा में भागन बीघा स्थित गौतम इंस्टीट्यूट ऑफ नर्सिंग एंड पैरामेडिकल कॉलेज में बुधवार को छात्र-छात्राओं ने कॉलेज प्रशासन के खिलाफ हंगामा और प्रदर्शन किया। रिजल्ट में भारी संख्या में विद्यार्थियों के फेल होने, शैक्षणिक कुव्यवस्था, शिक्षकों की कमी और नामांकन के समय परीक्षा में पास कराने यानी ‘मैनेज’ करने के नाम पर अतिरिक्त राशि वसूलने का आरोप लगाया। छात्रों ने संस्थान का मुख्य गेट बंद कर दिया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए भागन बीघा, चेरो, वेना एवं रहुई थाने की पुलिस दल-बल के साथ मौके पर पहुंची और विद्यार्थियों को समझाने-बुझाने का प्रयास किया। प्रदर्शन कर रहे छात्र ऋषिकेश पटेल ने बताया कि बीएससी नर्सिंग 5वें सेमेस्टर की परीक्षा जनवरी में हुई थी, जिसका परिणाम हाल ही में जारी हुआ है। परीक्षा में शामिल लगभग 80 फीसदी छात्रों को फेल कर दिया गया है। कई विद्यार्थियों को तीन से चार अंक और नौ अंक देकर फेल कर दिया गया है। छात्रों का कहना है कि संस्थान में बीएससी नर्सिंग के लिए छात्राओं से करीब 7.5 लाख रुपए और छात्रों से 8.7 लाख रुपए तक की फीस वसूली जाती है, जबकि सामान्य तौर पर यह फीस काफी कम होती है। ‘मैनेज’ के नाम पर 80 हजार की अतिरिक्त वसूली’ बी.फार्मा सत्र 2024-2028 के तृतीय सेमेस्टर के छात्र शशि राज ने कॉलेज प्रबंधन पर वित्तीय अनियमितता और अवैध वसूली का सीधा आरोप लगाया। उन्होंने बताया कि सरकारी योजनाओं या डीआरसीसी के माध्यम से मिलने वाले शिक्षा ऋण की तय राशि के अलावा प्रबंधन की ओरसे परीक्षा केंद्र मैनेज कराने के नाम पर प्रति छात्र 80 हजार रुपए तक की अतिरिक्त नकदी वसूली गई। जब छात्र इस अतिरिक्त ली गई रकम की रसीद मांगते हैं, तो उन्हें कोई रसीद नहीं दी जाती है। शशि राज ने बताया कि संस्थान छात्रों को गुमराह कर पैसे की उगाही करता है। हमारे परिवार मध्यमवर्गीय और किसान पृष्ठभूमि से आते हैं। कर्ज लेकर और परिजनों की गाढ़ी कमाई से कॉलेज की फीस भरी जाती है, लेकिन जब परीक्षा का समय आता है तो छात्रों को कोई शैक्षणिक मदद नहीं मिलती और फेल कर दिया जाता है। छात्रों का कहना है कि यदि निजी कॉलेज में भी यही दुर्दशा झेलनी थी तो वे लाखों रुपए खर्च करके यहां नामांकन क्यों करवाते।
शिक्षकों की कमी और साल में कई बार बदले जाते हैं प्राचार्य विद्यार्थियों ने कहा कि कागजों में संस्थान के पास 18 प्राध्यापक दर्ज हैं, लेकिन धरातल पर केवल 4 से 5 शिक्षक ही उपलब्ध रहते हैं। संस्थान में नियमित प्रयोगशाला की कक्षाएं नहीं चलती हैं और छात्रों को शिक्षकों को बुलाने के लिए बार-बार कार्यालय का चक्कर लगाना पड़ता है। इसके अलावा संस्थान में प्रशासनिक स्थिरता का घोर अभाव है। साल भर में चार से पांच बार प्राचार्य बदल दिए जाते हैं, जिससे छात्रों की शिकायतों की कोई स्थायी सुनवाई नहीं हो पाती। विद्यार्थियों ने बताया कि जब भी वे अपनी समस्याओं को लेकर प्रशासनिक अधिकारियों या प्राचार्य के पास जाते हैं, तो उन्हें केवल कोरा आश्वासन देकर लौटा दिया जाता है। परीक्षा शुल्क वापसी की मांग विद्यार्थियों ने कॉलेज प्रबंधन को लिखित आवेदन भी सौंपा। आवेदन में छात्रों ने बताया है कि नामांकन के समय बाहरी परीक्षा केंद्र के नाम पर छात्रों से अलग-अलग राशि ली गई थी, लेकिन परीक्षा में 80 से 90 फीसदी छात्र फेल हो गए हैं। छात्रों ने मांग की है कि विश्वविद्यालय के री-एग्जाम फॉर्म का शुल्क कॉलेज प्रबंधन अपने स्तर से वहन करे या फिर मैनेज के नाम पर ली गई अवैध राशि को तत्काल वापस करे।
जब तक मांगें पूरी नहीं होती, हमारा आंदोलन जारी रहेगा बुधवार सुबह करीब साढ़े दस बजे शुरू हुआ यह उग्र प्रदर्शन शाम तक जारी रहा। छात्रों का आरोप था कि कॉलेज की उच्च अधिकारी कार्यालय से बाहर आकर बात करने से बचती रहीं और कुछ चुनिंदा छात्रों को अंदर बुलाकर बात टालने का प्रयास किया जाता रहा। छात्रों ने कहा कि दाखिले के वक्त संस्थान ने मौखिक वादे किए थे, लेकिन अब उन्हीं बातों पर लिखित प्रमाण मांगकर विद्यार्थियों को प्रताड़ित किया जा रहा है। छात्रों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता और अतिरिक्त वसूली गई राशि का निपटारा नहीं होता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
गौतम इंस्टीट्यूट ऑफ नर्सिंग एंड पारामेडिकल डिपार्टमेंट ऑफ फार्मेसी के प्रिसिपल विनोद कुमार से फोन से सम्पर्क किया गया तो किसी प्रकार की कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। नालंदा में भागन बीघा स्थित गौतम इंस्टीट्यूट ऑफ नर्सिंग एंड पैरामेडिकल कॉलेज में बुधवार को छात्र-छात्राओं ने कॉलेज प्रशासन के खिलाफ हंगामा और प्रदर्शन किया। रिजल्ट में भारी संख्या में विद्यार्थियों के फेल होने, शैक्षणिक कुव्यवस्था, शिक्षकों की कमी और नामांकन के समय परीक्षा में पास कराने यानी ‘मैनेज’ करने के नाम पर अतिरिक्त राशि वसूलने का आरोप लगाया। छात्रों ने संस्थान का मुख्य गेट बंद कर दिया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए भागन बीघा, चेरो, वेना एवं रहुई थाने की पुलिस दल-बल के साथ मौके पर पहुंची और विद्यार्थियों को समझाने-बुझाने का प्रयास किया। प्रदर्शन कर रहे छात्र ऋषिकेश पटेल ने बताया कि बीएससी नर्सिंग 5वें सेमेस्टर की परीक्षा जनवरी में हुई थी, जिसका परिणाम हाल ही में जारी हुआ है। परीक्षा में शामिल लगभग 80 फीसदी छात्रों को फेल कर दिया गया है। कई विद्यार्थियों को तीन से चार अंक और नौ अंक देकर फेल कर दिया गया है। छात्रों का कहना है कि संस्थान में बीएससी नर्सिंग के लिए छात्राओं से करीब 7.5 लाख रुपए और छात्रों से 8.7 लाख रुपए तक की फीस वसूली जाती है, जबकि सामान्य तौर पर यह फीस काफी कम होती है। ‘मैनेज’ के नाम पर 80 हजार की अतिरिक्त वसूली’ बी.फार्मा सत्र 2024-2028 के तृतीय सेमेस्टर के छात्र शशि राज ने कॉलेज प्रबंधन पर वित्तीय अनियमितता और अवैध वसूली का सीधा आरोप लगाया। उन्होंने बताया कि सरकारी योजनाओं या डीआरसीसी के माध्यम से मिलने वाले शिक्षा ऋण की तय राशि के अलावा प्रबंधन की ओरसे परीक्षा केंद्र मैनेज कराने के नाम पर प्रति छात्र 80 हजार रुपए तक की अतिरिक्त नकदी वसूली गई। जब छात्र इस अतिरिक्त ली गई रकम की रसीद मांगते हैं, तो उन्हें कोई रसीद नहीं दी जाती है। शशि राज ने बताया कि संस्थान छात्रों को गुमराह कर पैसे की उगाही करता है। हमारे परिवार मध्यमवर्गीय और किसान पृष्ठभूमि से आते हैं। कर्ज लेकर और परिजनों की गाढ़ी कमाई से कॉलेज की फीस भरी जाती है, लेकिन जब परीक्षा का समय आता है तो छात्रों को कोई शैक्षणिक मदद नहीं मिलती और फेल कर दिया जाता है। छात्रों का कहना है कि यदि निजी कॉलेज में भी यही दुर्दशा झेलनी थी तो वे लाखों रुपए खर्च करके यहां नामांकन क्यों करवाते।
शिक्षकों की कमी और साल में कई बार बदले जाते हैं प्राचार्य विद्यार्थियों ने कहा कि कागजों में संस्थान के पास 18 प्राध्यापक दर्ज हैं, लेकिन धरातल पर केवल 4 से 5 शिक्षक ही उपलब्ध रहते हैं। संस्थान में नियमित प्रयोगशाला की कक्षाएं नहीं चलती हैं और छात्रों को शिक्षकों को बुलाने के लिए बार-बार कार्यालय का चक्कर लगाना पड़ता है। इसके अलावा संस्थान में प्रशासनिक स्थिरता का घोर अभाव है। साल भर में चार से पांच बार प्राचार्य बदल दिए जाते हैं, जिससे छात्रों की शिकायतों की कोई स्थायी सुनवाई नहीं हो पाती। विद्यार्थियों ने बताया कि जब भी वे अपनी समस्याओं को लेकर प्रशासनिक अधिकारियों या प्राचार्य के पास जाते हैं, तो उन्हें केवल कोरा आश्वासन देकर लौटा दिया जाता है। परीक्षा शुल्क वापसी की मांग विद्यार्थियों ने कॉलेज प्रबंधन को लिखित आवेदन भी सौंपा। आवेदन में छात्रों ने बताया है कि नामांकन के समय बाहरी परीक्षा केंद्र के नाम पर छात्रों से अलग-अलग राशि ली गई थी, लेकिन परीक्षा में 80 से 90 फीसदी छात्र फेल हो गए हैं। छात्रों ने मांग की है कि विश्वविद्यालय के री-एग्जाम फॉर्म का शुल्क कॉलेज प्रबंधन अपने स्तर से वहन करे या फिर मैनेज के नाम पर ली गई अवैध राशि को तत्काल वापस करे।
जब तक मांगें पूरी नहीं होती, हमारा आंदोलन जारी रहेगा बुधवार सुबह करीब साढ़े दस बजे शुरू हुआ यह उग्र प्रदर्शन शाम तक जारी रहा। छात्रों का आरोप था कि कॉलेज की उच्च अधिकारी कार्यालय से बाहर आकर बात करने से बचती रहीं और कुछ चुनिंदा छात्रों को अंदर बुलाकर बात टालने का प्रयास किया जाता रहा। छात्रों ने कहा कि दाखिले के वक्त संस्थान ने मौखिक वादे किए थे, लेकिन अब उन्हीं बातों पर लिखित प्रमाण मांगकर विद्यार्थियों को प्रताड़ित किया जा रहा है। छात्रों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता और अतिरिक्त वसूली गई राशि का निपटारा नहीं होता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
गौतम इंस्टीट्यूट ऑफ नर्सिंग एंड पारामेडिकल डिपार्टमेंट ऑफ फार्मेसी के प्रिसिपल विनोद कुमार से फोन से सम्पर्क किया गया तो किसी प्रकार की कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली।

