नालंदा के अनुपम भारतीय बधिर एथलेटिक्स टीम में चयनित:मलेशिया में दिखाएंगे दम, प्रथम एशिया पैसिफिक डेफ मल्टी-स्पोर्ट्स चैंपियनशिप में करेंगे देश का प्रतिनिधित्व

नालंदा के अनुपम भारतीय बधिर एथलेटिक्स टीम में चयनित:मलेशिया में दिखाएंगे दम, प्रथम एशिया पैसिफिक डेफ मल्टी-स्पोर्ट्स चैंपियनशिप में करेंगे देश का प्रतिनिधित्व

नालंदा की खेल प्रतिभा ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय फलक पर अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है। हरनौत प्रखंड के सुदूर महमूदपुर बलवा गांव निवासी युवा बधिर एथलीट अनुपम कुमार का चयन भारतीय राष्ट्रीय बधिर एथलेटिक्स टीम में हुआ है। अनुपम मलेशिया के पेनांग में 3 से 10 अक्टूबर तक आयोजित होने वाली ‘प्रथम एशिया पैसिफिक डेफ मल्टी-स्पोर्ट्स चैंपियनशिप-2026’ में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। इस ऐतिहासिक उपलब्धि के साथ वे देश का मान बढ़ाने के लिए नई दिल्ली से मलेशिया के लिए रवाना हो रहे हैं। साधारण ग्रामीण परिवेश से ताल्लुक रखने वाले अनुपम के पिता पप्पू यादव और दादा सुरेंद्र यादव ने विषम परिस्थितियों के बावजूद बेटे के सपनों को पंख दिए। परिवार के अटूट विश्वास, प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन और अनुपम के कड़े अभ्यास ने इस मूक-बधिर धावक को अंतरराष्ट्रीय मंच पर खड़ा कर दिया है। नालंदा के मैदानों से राष्ट्रीय टीम तक का कड़ा सफर अनुपम के खेल जीवन की शुरुआत नालंदा लक्ष्य खेल अकादमी से हुई। अकादमी के कोच सह सचिव कुंदन कुमार पांडेय ने अनुपम की प्राकृतिक गति और खेल के प्रति समर्पण को पहचानकर उन्हें विधिवत प्रशिक्षण देना शुरू किया। शुरुआती वर्षों में मिली तकनीकी समझ और बुनियादी अनुशासन ने उनके आगे के रास्ते आसान किए। इसके बाद वे उच्चस्तरीय प्रशिक्षण के लिए हरियाणा के गुरुग्राम स्थित ताऊ देवीलाल स्टेडियम पहुंचे। वर्तमान में वे वहां मुख्य कोच जितेंद्र कुमार के सानिध्य में अपनी तकनीक, गति, एंड्यूरेंस और स्ट्रेंथ पर दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं की आवश्यकताओं के अनुरूप उनकी फिटनेस को अंतरराष्ट्रीय मानकों पर तैयार किया गया है। सांकेतिक भाषा बनी प्रशिक्षण की मजबूत कड़ी बधिर खिलाड़ियों के लिए मैदान पर तकनीकी बारीकियों को समझना एक बड़ी चुनौती होता है। अनुपम के प्रशिक्षण में सांकेतिक भाषा विशेषज्ञ किशोरी जाजोदिया ने अहम भूमिका निभाई। कोच द्वारा दिए जाने वाले तकनीकी निर्देशों, फाउल नियमों और ट्रैक पोजिशनिंग की रणनीतियों को सांकेतिक भाषा के जरिए अनुपम तक सहजता से पहुंचाया गया, जिससे मैदान पर उनके प्रदर्शन में जबरदस्त निखार आया। खेल जगत में उत्साह, जिले भर से मिल रही बधाइयां अनुपम के चयन से नालंदा सहित पूरे बिहार के खेल प्रेमियों में हर्ष का माहौल है। बिहार स्पोर्ट्स काउंसिल ऑफ द डेफ के महासचिव मोहम्मद अतहर अली ने इसे राज्य के लिए गर्व का क्षण बताते हुए कहा कि अनुपम की यह सफलता राज्य के अन्य दिव्यांग खिलाड़ियों के भीतर नए आत्मविश्वास का संचार करेगी। डेफ काउंसिल ऑफ नालंदा की जिला इकाई ने भी उनके पदक जीतने की उम्मीद जताई। उधर, नालंदा लक्ष्य खेल अकादमी परिसर में जश्न का माहौल रहा। अकादमी के प्रमोद कुमार, विनय कुमार, सत्यनाम कबीर, रवि कुमार, ओमप्रकाश पटेल और विकास कुमार सहित वरिष्ठ खिलाड़ियों व प्रशिक्षकों ने अनुपम को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। खेल विशेषज्ञों का कहना है कि एक छोटे से गांव से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करना साबित करता है कि यदि लगन सच्ची हो, तो कोई भी शारीरिक बाधा सफलता के रास्ते में रुकावट नहीं बन सकती। नालंदा की खेल प्रतिभा ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय फलक पर अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है। हरनौत प्रखंड के सुदूर महमूदपुर बलवा गांव निवासी युवा बधिर एथलीट अनुपम कुमार का चयन भारतीय राष्ट्रीय बधिर एथलेटिक्स टीम में हुआ है। अनुपम मलेशिया के पेनांग में 3 से 10 अक्टूबर तक आयोजित होने वाली ‘प्रथम एशिया पैसिफिक डेफ मल्टी-स्पोर्ट्स चैंपियनशिप-2026’ में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। इस ऐतिहासिक उपलब्धि के साथ वे देश का मान बढ़ाने के लिए नई दिल्ली से मलेशिया के लिए रवाना हो रहे हैं। साधारण ग्रामीण परिवेश से ताल्लुक रखने वाले अनुपम के पिता पप्पू यादव और दादा सुरेंद्र यादव ने विषम परिस्थितियों के बावजूद बेटे के सपनों को पंख दिए। परिवार के अटूट विश्वास, प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन और अनुपम के कड़े अभ्यास ने इस मूक-बधिर धावक को अंतरराष्ट्रीय मंच पर खड़ा कर दिया है। नालंदा के मैदानों से राष्ट्रीय टीम तक का कड़ा सफर अनुपम के खेल जीवन की शुरुआत नालंदा लक्ष्य खेल अकादमी से हुई। अकादमी के कोच सह सचिव कुंदन कुमार पांडेय ने अनुपम की प्राकृतिक गति और खेल के प्रति समर्पण को पहचानकर उन्हें विधिवत प्रशिक्षण देना शुरू किया। शुरुआती वर्षों में मिली तकनीकी समझ और बुनियादी अनुशासन ने उनके आगे के रास्ते आसान किए। इसके बाद वे उच्चस्तरीय प्रशिक्षण के लिए हरियाणा के गुरुग्राम स्थित ताऊ देवीलाल स्टेडियम पहुंचे। वर्तमान में वे वहां मुख्य कोच जितेंद्र कुमार के सानिध्य में अपनी तकनीक, गति, एंड्यूरेंस और स्ट्रेंथ पर दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं की आवश्यकताओं के अनुरूप उनकी फिटनेस को अंतरराष्ट्रीय मानकों पर तैयार किया गया है। सांकेतिक भाषा बनी प्रशिक्षण की मजबूत कड़ी बधिर खिलाड़ियों के लिए मैदान पर तकनीकी बारीकियों को समझना एक बड़ी चुनौती होता है। अनुपम के प्रशिक्षण में सांकेतिक भाषा विशेषज्ञ किशोरी जाजोदिया ने अहम भूमिका निभाई। कोच द्वारा दिए जाने वाले तकनीकी निर्देशों, फाउल नियमों और ट्रैक पोजिशनिंग की रणनीतियों को सांकेतिक भाषा के जरिए अनुपम तक सहजता से पहुंचाया गया, जिससे मैदान पर उनके प्रदर्शन में जबरदस्त निखार आया। खेल जगत में उत्साह, जिले भर से मिल रही बधाइयां अनुपम के चयन से नालंदा सहित पूरे बिहार के खेल प्रेमियों में हर्ष का माहौल है। बिहार स्पोर्ट्स काउंसिल ऑफ द डेफ के महासचिव मोहम्मद अतहर अली ने इसे राज्य के लिए गर्व का क्षण बताते हुए कहा कि अनुपम की यह सफलता राज्य के अन्य दिव्यांग खिलाड़ियों के भीतर नए आत्मविश्वास का संचार करेगी। डेफ काउंसिल ऑफ नालंदा की जिला इकाई ने भी उनके पदक जीतने की उम्मीद जताई। उधर, नालंदा लक्ष्य खेल अकादमी परिसर में जश्न का माहौल रहा। अकादमी के प्रमोद कुमार, विनय कुमार, सत्यनाम कबीर, रवि कुमार, ओमप्रकाश पटेल और विकास कुमार सहित वरिष्ठ खिलाड़ियों व प्रशिक्षकों ने अनुपम को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। खेल विशेषज्ञों का कहना है कि एक छोटे से गांव से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करना साबित करता है कि यदि लगन सच्ची हो, तो कोई भी शारीरिक बाधा सफलता के रास्ते में रुकावट नहीं बन सकती।  

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