नाबालिग से बदसलूकी पर नवादा में सीएम का पुतला जलाया:AIPWA ने निकाला जुलूस, महिलाओं की सुरक्षा और दोषियों पर कार्रवाई की मांग

नाबालिग से बदसलूकी पर नवादा में सीएम का पुतला जलाया:AIPWA ने निकाला जुलूस, महिलाओं की सुरक्षा और दोषियों पर कार्रवाई की मांग

जमुई में नाबालिग छात्रा से कथित बदसलूकी के विरोध में अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला एसोसिएशन ने बुधवार को नवादा में प्रदर्शन किया। संगठन की महिलाओं ने शहर की सड़कों पर जुलूस निकाला और महिलाओं व बेटियों की सुरक्षा को लेकर नारे लगाए। यह जुलूस भगत सिंह चौक पहुंचा, जहां मुख्यमंत्री का पुतला जलाकर विरोध जताया गया। प्रदर्शनकारियों ने महिलाओं और बेटियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ ही दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की। ”महिलाओं और छात्राओं की सुरक्षा सरकार की जिम्मेदारी” एआईपीडब्ल्यूए ने 22 सितंबर को जारी अपने प्रेस बयान में जमुई की घटना की निंदा की थी। संगठन का आरोप है कि कोचिंग से लौट रही दो नाबालिग छात्राओं के साथ असामाजिक तत्वों की भीड़ ने कथित तौर पर बदसलूकी, मारपीट और आपत्तिजनक व्यवहार किया था। घटना का वीडियो सामने आने के बाद इसे लेकर गुस्सा बढ़ गया है। प्रदर्शन के दौरान संगठन की अध्यक्ष सावित्री देवी ने कहा कि महिलाओं और छात्राओं की सुरक्षा सरकार की जिम्मेदारी है। सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में कराने की मांग उन्होंने जमुई मामले में दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की। इसके साथ ही दहेज प्रथा और महिलाओं के साथ हो रहे उत्पीड़न के मामलों पर भी सरकार से प्रभावी कदम उठाने की मांग की गई। एआईपीडब्ल्यूए ने अपने बयान में जदयू प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा द्वारा घटना को कथित तौर पर ‘छिटपुट घटना’ बताए जाने और मंत्री श्रेयसी सिंह के ‘मोरल पुलिसिंग’ संबंधी बयान पर भी सवाल उठाए हैं। संगठन ने एनकाउंटर संस्कृति खत्म करने, दोषियों को कड़ी सजा देने और मामलों की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में कराने की मांग की। साथ ही सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं की सुरक्षा की गारंटी और मुख्यमंत्री से जवाबदेही तय करने की मांग की। जमुई में नाबालिग छात्रा से कथित बदसलूकी के विरोध में अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला एसोसिएशन ने बुधवार को नवादा में प्रदर्शन किया। संगठन की महिलाओं ने शहर की सड़कों पर जुलूस निकाला और महिलाओं व बेटियों की सुरक्षा को लेकर नारे लगाए। यह जुलूस भगत सिंह चौक पहुंचा, जहां मुख्यमंत्री का पुतला जलाकर विरोध जताया गया। प्रदर्शनकारियों ने महिलाओं और बेटियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ ही दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की। ”महिलाओं और छात्राओं की सुरक्षा सरकार की जिम्मेदारी” एआईपीडब्ल्यूए ने 22 सितंबर को जारी अपने प्रेस बयान में जमुई की घटना की निंदा की थी। संगठन का आरोप है कि कोचिंग से लौट रही दो नाबालिग छात्राओं के साथ असामाजिक तत्वों की भीड़ ने कथित तौर पर बदसलूकी, मारपीट और आपत्तिजनक व्यवहार किया था। घटना का वीडियो सामने आने के बाद इसे लेकर गुस्सा बढ़ गया है। प्रदर्शन के दौरान संगठन की अध्यक्ष सावित्री देवी ने कहा कि महिलाओं और छात्राओं की सुरक्षा सरकार की जिम्मेदारी है। सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में कराने की मांग उन्होंने जमुई मामले में दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की। इसके साथ ही दहेज प्रथा और महिलाओं के साथ हो रहे उत्पीड़न के मामलों पर भी सरकार से प्रभावी कदम उठाने की मांग की गई। एआईपीडब्ल्यूए ने अपने बयान में जदयू प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा द्वारा घटना को कथित तौर पर ‘छिटपुट घटना’ बताए जाने और मंत्री श्रेयसी सिंह के ‘मोरल पुलिसिंग’ संबंधी बयान पर भी सवाल उठाए हैं। संगठन ने एनकाउंटर संस्कृति खत्म करने, दोषियों को कड़ी सजा देने और मामलों की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में कराने की मांग की। साथ ही सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं की सुरक्षा की गारंटी और मुख्यमंत्री से जवाबदेही तय करने की मांग की।  

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