महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव में नागपुर सीट से कांग्रेस उम्मीदवार अभिजीत वंजारी को बृहस्पतिवार को विजेता घोषित किया गया। इस चुनाव के लिए मतगणना प्रक्रिया 40 घंटे से भी अधिक समय तक चली, जिस पर सबकी नजरें टिकी थीं। वंजारी ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सुधाकर कोहले को 3,271 मतों से हराया और नागपुर संभाग स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की सीट बरकरार रखी।
यह सीट पारंपरिक रूप से भाजपा का गढ़ रही है। मतगणना मंगलवार सुबह शुरू हुई और बृहस्पतिवार तड़के समाप्त हुई। मौजूदा विधान परिषद सदस्य वंजारी को 67,231 वोट मिले, जबकि पूर्व विधायक कोहले को 63,960 वोट प्राप्त हुए।
यह भाजपा के लिए एक बड़ा झटका है क्योंकि पार्टी को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के गृह नगर में हार का सामना करना पड़ा है। इन दोनों नेताओं ने कोहले के लिए जोर-शोर से प्रचार किया था। गडकरी जुलाई 1990 से मई 2014 तक 24 वर्षों तक नागपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से महाराष्ट्र विधान परिषद के सदस्य रहे थे।
कांग्रेस उम्मीदवार की जीत के साथ विपक्षी ‘महा विकास आघाडी’ (एमवीए) ने 23 अक्टूबर को हुए चुनाव में विधान परिषद की पांच में से तीन सीट जीत ली हैं। वहीं, भाजपा के नेतृत्व वाले सत्तारूढ़ ‘महायुति’ गठबंधन को दो सीट मिलीं। कांग्रेस नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस सहित भाजपा नेताओं पर तंज कसने में देर नहीं की।
मोदी और फडणवीस ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में संकेत दिया था कि विपक्षी पार्टी चुनाव में एक भी सीट नहीं जीत पाई। महाराष्ट्र कांग्रेस ने सोशल मीडिया पर फडणवीस के एक डिलीट किए गए ट्वीट का स्क्रीनशॉट साझा किया। इस पोस्ट में उन्होंने कहा था कि (कांग्रेस) पार्टी को चुनावों में ‘‘बड़ा शून्य’’ मिला है।
महाराष्ट्र कांग्रेस ने ‘एक्स’ पर कहा, ‘‘ट्वीट डिलीट करके, फडणवीस ने एक बार फिर सावरकर की विरासत को बचा लिया है। पूरे नतीजे आने से पहले ही एक बड़ा तीर चलाने के चक्कर में फडणवीस ने ट्वीट कर दिया। लेकिन वही तीर पलटकर सीधे उनके सीने में जा लगा।
आखिरकार, उन्हें वह ट्वीट डिलीट करना ही पड़ा।’’
उन्होंने कहा, ‘‘फडणवीस अभी से डर गए? यह तो बस ‘ट्रेलर’ है! 2029 में महाराष्ट्र की जनता आप पर ऐसा राजनीतिक बम गिराएगी कि आज का यह ट्वीट भी आपको याद आएगा और परेशान करेगा!
शुभकामनाएं, मिस्टर फडणवीस! अगले झटके के लिए तैयार रहें।’’
कांग्रेस की महाराष्ट्र इकाई के प्रमुख हर्षवर्धन सपकाल ने कहा कि नागपुर में जहां राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का मुख्यालय है, वहां भाजपा उम्मीदवार को करारी हार का सामना करना पड़ा है। महाराष्ट्र विधान परिषद की जिन पांच सीट पर 23 अक्टूबर को मतदान हुआ था उनमें से भाजपा और शिवसेना ने एक-एक सीट पर जीत दर्ज की।
दोनों दल सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन के घटक हैं। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी-शरदचंद्र पवार (राकांपा-शप) ने पुणे स्नातक और छत्रपति संभाजीनगर स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में जीत हासिल की। वर्ष 2023 में राकांपा के विभाजन से पहले इन दोनों सीट पर अविभाजित राकांपा का कब्जा था।
शिवसेना के किरण सरनाइक ने अमरावती शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में जीत हासिल की जबकि भाजपा उम्मीदवार कौस्तुभ गावडे पुणे शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से विजयी हुए। राकांपा (शप) की उम्मीदवार हर्षदा देशमुख-जाधव ने भाजपा उम्मीदवार स्मिता जाधव को हराकर पुणे स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की सीट जीती। सपकाल ने कहा कि मोदी ने यह कहकर कांग्रेस का मजाक उड़ाया था कि पार्टी चुनावों में एक भी सीट नहीं जीत पाई।
उन्होंने कहा, ‘‘हालांकि, अंत में भ्रम का बुलबुला फूट गया।’’
राकांपा नेता प्रफुल्ल पटेल ने पार्टी के एकमात्र उम्मीदवार की चुनाव में हार के बाद उसकी प्राथमिकताओं और संगठनात्मक ढांचे की तत्काल समीक्षा करने की मांग की। महाराष्ट्र में 78 सदस्यीय विधान परिषद में भाजपा 35 सदस्यों के साथ सबसे बड़ी पार्टी है। इसके बाद शिवसेना के 12 और राकांपा के 10 सदस्य हैं।
विपक्षी दलों में कांग्रेस और शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के पास पांच-पांच सदस्य हैं जबकि राकांपा (शप) के दो सदस्य हैं। सदन में चार निर्दलीय सदस्य भी हैं।

