नवादा में 14 सूत्री मांगों को लेकर विभिन्न जनसंगठनों ने राज्यव्यापी प्रतिरोध मार्च निकाला। खेमास, ऐपवा, इंसाफ मंच और भाकपा-माले से जुड़े कार्यकर्ताओं ने बिहार सरकार की नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन किया। इस दौरान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का पुतला दहन कर विरोध जताया गया। प्रतिरोध मार्च की शुरुआत अकौना बाईपास से हुई। यहां से प्रदर्शनकारी जुलूस की शक्ल में नारेबाजी करते हुए आगे बढ़े। इसके बाद अकौना बाईपास पर सभा आयोजित की गई। सभा में वक्ताओं ने दलितों, महिलाओं और अल्पसंख्यकों के खिलाफ कथित अत्याचार, पुलिस दमन और कमजोर वर्गों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दे उठाए। प्रदर्शनकारियों ने बिहार में दलितों के साथ हुई कथित घटनाओं, पटना में दलितों की पिटाई और 32 महिलाओं को जेल भेजे जाने के आरोपों को लेकर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि वंचित तबकों के साथ होने वाली घटनाओं पर सरकार को गंभीरता से कदम उठाने की जरूरत है। दिलनशाद अंसारी की हिरासत में मौत का मामला उठाया प्रदर्शन के दौरान पश्चिम चंपारण के बेतिया क्षेत्र के ओरैया निवासी दिलनशाद अंसारी की पुलिस हिरासत में मौत का मामला भी उठाया गया। प्रदर्शनकारियों ने इन मामलों की निष्पक्ष जांच कराने और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की। सभा में शामिल लोगों ने कहा कि दलितों, महिलाओं, अल्पसंख्यकों और अन्य कमजोर वर्गों के अधिकारों की रक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने 14 सूत्री मांगों पर गंभीरता से विचार करने, पीड़ितों को न्याय दिलाने और ऐसी घटनाओं पर रोक लगाने के लिए प्रभावी कदम उठाने की अपील की। कई महिलाएं भी मार्च में हुईं शामिल प्रतिरोध मार्च में गंगाजली देवी, पातो देवी, सुमंगली देवी, गीता देवी, सुरीचीया देवी, एतवरीया देवी और सुदामा देवी समेत कई महिलाएं शामिल रहीं। विभिन्न संगठनों के कार्यकर्ताओं ने एकजुट होकर अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया और सरकार से आवश्यक कार्रवाई की मांग की। नवादा में 14 सूत्री मांगों को लेकर विभिन्न जनसंगठनों ने राज्यव्यापी प्रतिरोध मार्च निकाला। खेमास, ऐपवा, इंसाफ मंच और भाकपा-माले से जुड़े कार्यकर्ताओं ने बिहार सरकार की नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन किया। इस दौरान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का पुतला दहन कर विरोध जताया गया। प्रतिरोध मार्च की शुरुआत अकौना बाईपास से हुई। यहां से प्रदर्शनकारी जुलूस की शक्ल में नारेबाजी करते हुए आगे बढ़े। इसके बाद अकौना बाईपास पर सभा आयोजित की गई। सभा में वक्ताओं ने दलितों, महिलाओं और अल्पसंख्यकों के खिलाफ कथित अत्याचार, पुलिस दमन और कमजोर वर्गों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दे उठाए। प्रदर्शनकारियों ने बिहार में दलितों के साथ हुई कथित घटनाओं, पटना में दलितों की पिटाई और 32 महिलाओं को जेल भेजे जाने के आरोपों को लेकर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि वंचित तबकों के साथ होने वाली घटनाओं पर सरकार को गंभीरता से कदम उठाने की जरूरत है। दिलनशाद अंसारी की हिरासत में मौत का मामला उठाया प्रदर्शन के दौरान पश्चिम चंपारण के बेतिया क्षेत्र के ओरैया निवासी दिलनशाद अंसारी की पुलिस हिरासत में मौत का मामला भी उठाया गया। प्रदर्शनकारियों ने इन मामलों की निष्पक्ष जांच कराने और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की। सभा में शामिल लोगों ने कहा कि दलितों, महिलाओं, अल्पसंख्यकों और अन्य कमजोर वर्गों के अधिकारों की रक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने 14 सूत्री मांगों पर गंभीरता से विचार करने, पीड़ितों को न्याय दिलाने और ऐसी घटनाओं पर रोक लगाने के लिए प्रभावी कदम उठाने की अपील की। कई महिलाएं भी मार्च में हुईं शामिल प्रतिरोध मार्च में गंगाजली देवी, पातो देवी, सुमंगली देवी, गीता देवी, सुरीचीया देवी, एतवरीया देवी और सुदामा देवी समेत कई महिलाएं शामिल रहीं। विभिन्न संगठनों के कार्यकर्ताओं ने एकजुट होकर अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया और सरकार से आवश्यक कार्रवाई की मांग की।

