नवरात्र की षष्टी को मां कात्यायनी की पूजा आज:देवी की पूजा से बनेंगे वैवाहिक योग, बांग्ला पद्धति में आज खुलेगा माता का पट

नवरात्र की षष्टी को मां कात्यायनी की पूजा आज:देवी की पूजा से बनेंगे वैवाहिक योग, बांग्ला पद्धति में आज खुलेगा माता का पट

आज शुक्रवार को आश्विन शुक्ल षष्टी में शोभन, सिद्ध और रवियोग में देवी के छठे स्वरूप में कात्यायनी देवी की पूजा होगी। बांग्ला पद्धति से देवी दुर्गा की पूजा करने वाले पंडालों में आज माता का पट खोला जाएगा। वहीं, वैदिक रीति पूजा करने वाले पंडालों में कल शनिवार को मंत्रोच्चार के साथ माता का पट खुलेगा। मार्कण्डेय पुराण के मुताबिक, मां कात्यायनी का स्वरूप अत्यंत दिव्य, चमकीला और प्रकाशमान है। माता की चार भुजाएं हैं। देवीश्री के दाहिने ओर का ऊपरवाला हाथ अभयमुद्रा में तथा नीचे वाला हाथ वरमुद्रा में है। बाईं ओर के ऊपर वाले हाथ में तलवार और नीचे वाले हाथ में कमल-पुष्प सुसज्जित है। शक्तिपुंज से देवी कात्यायनी की उत्पत्ति आचार्य राकेश झा ने स्कंद पुराण के हवाले से बताया कि देवी के कात्यायनी रूप की उत्पत्ति परमपिता परमेश्वर के नैसर्गिक क्रोध से हुई थी। वामन पुराण के अनुसार, सभी देवताओं ने अपनी ऊर्जा को बाहर निकालकर कात्यायन ऋषि के आश्रम में इकट्ठा किया और कात्यायन ऋषि ने उस शक्तिपूंज को एक देवी का रूप दिया। जो देवी पार्वती द्वारा प्राप्त सिंह पर विराजमान थी। कात्यायन ऋषि ने रूप दिया, इसलिए कात्यायनी के नाम से प्रसिद्ध हुई और उन्होंने ही महिषासुर का वध किया। देवी कात्यायनी की पूजा से बनेंगे वैवाहिक योग देवी कात्यायनी की पूजा करने से भक्तजनों में शक्ति का संचार होता है और वो इनकी कृपा से अपने दुश्मनों का संहार करने में सक्षम हो पाते हैं। इनकी पूजा से हर तरह के संकट दूर हो जाते हैं। मां कात्यायनी की पूजा से अविवाहित लड़कियों के विवाह के योग बनते हैं और सुयोग्य वर भी मिलता है। देवी कात्यायनी की पूजा से रोग, शोक, संताप, भय आदि का नाश हो जाता है। देवी कात्यायनी की पूजा करने से हर तरह का भय भी दूर हो जाता है। प्रदोष काल मे इस देवी की पूजन श्रेष्ठ माता कात्यायनी की पूजा प्रदोष काल यानी गोधूली बेला में करना श्रेष्ठ माना गया है। शैलपुत्री सहित अन्य देवियों की तरह इनकी भी पूजा की जाती है। इनकी पूजा में शहद का प्रयोग विशेष रूप से जरूर किया जाता है, क्योंकि इस देवी मां को शहद बहुत प्रिय है। शहद युक्त पान का भोग, लाल रंग के वस्त्र माता को अर्पित किया जाएगा। एकांतवास में करे देवी आराधना ज्योतिषी झा ने कहा कि जैसे पौराणिक काल में साधु, संत, महात्मा, ब्राह्मण, पंडित आदि लोक एकांतवास हो कर भगवान का ध्यान, पाठ,जाप आदि करते थे। ठीक उसी प्रकार एकांतवास होकर माता की पूजा, आराधना करें। नवरात्रि के समय में श्रद्धालु अपने घर में मां दुर्गा के भजन, प्रार्थना, मंत्र, जाप, पाठ, हवन आदि अपने घर में सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होगी। देवी कात्यायनी का पूजा मंत्र चन्द्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना। कात्यायनी च शुभदा देवी दानवघातिनी।। आज शुक्रवार को आश्विन शुक्ल षष्टी में शोभन, सिद्ध और रवियोग में देवी के छठे स्वरूप में कात्यायनी देवी की पूजा होगी। बांग्ला पद्धति से देवी दुर्गा की पूजा करने वाले पंडालों में आज माता का पट खोला जाएगा। वहीं, वैदिक रीति पूजा करने वाले पंडालों में कल शनिवार को मंत्रोच्चार के साथ माता का पट खुलेगा। मार्कण्डेय पुराण के मुताबिक, मां कात्यायनी का स्वरूप अत्यंत दिव्य, चमकीला और प्रकाशमान है। माता की चार भुजाएं हैं। देवीश्री के दाहिने ओर का ऊपरवाला हाथ अभयमुद्रा में तथा नीचे वाला हाथ वरमुद्रा में है। बाईं ओर के ऊपर वाले हाथ में तलवार और नीचे वाले हाथ में कमल-पुष्प सुसज्जित है। शक्तिपुंज से देवी कात्यायनी की उत्पत्ति आचार्य राकेश झा ने स्कंद पुराण के हवाले से बताया कि देवी के कात्यायनी रूप की उत्पत्ति परमपिता परमेश्वर के नैसर्गिक क्रोध से हुई थी। वामन पुराण के अनुसार, सभी देवताओं ने अपनी ऊर्जा को बाहर निकालकर कात्यायन ऋषि के आश्रम में इकट्ठा किया और कात्यायन ऋषि ने उस शक्तिपूंज को एक देवी का रूप दिया। जो देवी पार्वती द्वारा प्राप्त सिंह पर विराजमान थी। कात्यायन ऋषि ने रूप दिया, इसलिए कात्यायनी के नाम से प्रसिद्ध हुई और उन्होंने ही महिषासुर का वध किया। देवी कात्यायनी की पूजा से बनेंगे वैवाहिक योग देवी कात्यायनी की पूजा करने से भक्तजनों में शक्ति का संचार होता है और वो इनकी कृपा से अपने दुश्मनों का संहार करने में सक्षम हो पाते हैं। इनकी पूजा से हर तरह के संकट दूर हो जाते हैं। मां कात्यायनी की पूजा से अविवाहित लड़कियों के विवाह के योग बनते हैं और सुयोग्य वर भी मिलता है। देवी कात्यायनी की पूजा से रोग, शोक, संताप, भय आदि का नाश हो जाता है। देवी कात्यायनी की पूजा करने से हर तरह का भय भी दूर हो जाता है। प्रदोष काल मे इस देवी की पूजन श्रेष्ठ माता कात्यायनी की पूजा प्रदोष काल यानी गोधूली बेला में करना श्रेष्ठ माना गया है। शैलपुत्री सहित अन्य देवियों की तरह इनकी भी पूजा की जाती है। इनकी पूजा में शहद का प्रयोग विशेष रूप से जरूर किया जाता है, क्योंकि इस देवी मां को शहद बहुत प्रिय है। शहद युक्त पान का भोग, लाल रंग के वस्त्र माता को अर्पित किया जाएगा। एकांतवास में करे देवी आराधना ज्योतिषी झा ने कहा कि जैसे पौराणिक काल में साधु, संत, महात्मा, ब्राह्मण, पंडित आदि लोक एकांतवास हो कर भगवान का ध्यान, पाठ,जाप आदि करते थे। ठीक उसी प्रकार एकांतवास होकर माता की पूजा, आराधना करें। नवरात्रि के समय में श्रद्धालु अपने घर में मां दुर्गा के भजन, प्रार्थना, मंत्र, जाप, पाठ, हवन आदि अपने घर में सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होगी। देवी कात्यायनी का पूजा मंत्र चन्द्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना। कात्यायनी च शुभदा देवी दानवघातिनी।।  

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