नगरपरिषद में अध्यक्ष की कुर्सी का फैसला 21 सितंबर को:अगले दिन उपाध्यक्ष का चुनाव, 34 सीटों के साथ भाजपा के पास पूर्ण बहुमत

नगरपरिषद में अध्यक्ष की कुर्सी का फैसला 21 सितंबर को:अगले दिन उपाध्यक्ष का चुनाव, 34 सीटों के साथ भाजपा के पास पूर्ण बहुमत

बांसवाड़ा जिले में नगरीय निकाय चुनाव-2026 के नतीजे आने के बाद राजनीतिक सरगर्मियां अब चरम पर पहुंच गई हैं। पार्षदों के चुनाव के बाद अब बोर्ड गठन की सबसे अहम प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। जिला निर्वाचन कार्यालय ने अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के चुनाव का कार्यक्रम जारी कर दिया है। कार्यक्रम के मुताबिक अध्यक्ष पद के लिए 21 सितंबर को मतदान होगा, जबकि उपाध्यक्ष पद का फैसला 22 सितंबर को होगा। नगर परिषद में भाजपा को 34 सीटें मिलने से पार्टी के पास पूर्ण बहुमत है। इसके बावजूद चुनाव कार्यक्रम घोषित होने के साथ ही राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। 15 सितंबर से शुरू होगी अध्यक्ष चुनाव की प्रक्रिया अध्यक्ष पद के निर्वाचन के लिए 15 सितंबर को लोक सूचना जारी होगी। इसके बाद 16 सितंबर तक उम्मीदवार नामांकन पत्र दाखिल कर सकेंगे। 17 सितंबर को नामांकन पत्रों की संवीक्षा यानी जांच होगी। 18 सितंबर को दोपहर 3 बजे तक नाम वापस लिए जा सकेंगे। नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के तुरंत बाद प्रत्याशियों को चुनाव चिह्न आवंटित किए जाएंगे। अध्यक्ष पद के लिए 21 सितंबर को सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक मतदान होगा। मतदान समाप्त होते ही वोटों की गिनती की जाएगी और परिणाम घोषित कर दिया जाएगा। 22 सितंबर को एक ही दिन में उपाध्यक्ष का चुनाव उपाध्यक्ष पद का चुनाव 22 सितंबर को एक ही दिन में पूरा कराया जाएगा। सुबह 10 बजे निर्वाचन के लिए विशेष बैठक शुरू होगी। उम्मीदवार सुबह 11 बजे तक नामांकन पत्र दाखिल कर सकेंगे। इसके बाद सुबह 11:30 बजे से नामांकन पत्रों की संवीक्षा शुरू होगी। दोपहर 2 बजे तक नाम वापस लिए जा सकेंगे। यदि एक से ज्यादा उम्मीदवार मैदान में रहते हैं और मतदान की जरूरत पड़ती है तो दोपहर 2:30 बजे से शाम 5 बजे तक वोटिंग कराई जाएगी। मतदान खत्म होते ही मतगणना होगी और उपाध्यक्ष के नाम का ऐलान कर दिया जाएगा। बाड़ेबंदी और समर्थन जुटाने की कवायद चुनाव कार्यक्रम सामने आने के बाद भाजपा में भी हलचल बढ़ गई है। भाजपा के पार्षद उम्मीदवार पहले से ही बाड़ेबंदी में हैं। अब पार्षदों को अपने पक्ष में रखने और समर्थन जुटाने की कवायद पर्दे के पीछे तेज हो गई है। सभी की नजरें अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव पर टिक गई हैं। वहीं, चुनाव हार चुके उम्मीदवारों को अब बाड़ेबंदी से घर भेजा जा सकता है, जबकि चुनाव जीतने वाले पार्षदों को कुछ दिन और बाड़ेबंदी में रखा जा सकता है।

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