कानपुर में एसोसिएशन ऑफ प्रोफेशनल ग्रेजुएट सिविल इंजीनियर्स (APGCE) की ओर से भारत रत्न एवं महान अभियंता मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया की स्मृति में इंजीनियर्स डे की पूर्व संध्या पर समारोह का आयोजन किया गया। समारोह में कानपुर के विकास और इंजीनियरों की भूमिका पर चर्चा हुई। कार्यक्रम में एडीसीपी एलआईयू महेश कुमार विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे। समारोह में वक्ताओं ने कहा कि किसी भी शहर के विकास में सिविल इंजीनियरों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। सड़क, पुल, भवन, जल निकासी, यातायात व्यवस्था और अन्य आधारभूत ढांचे के निर्माण में इंजीनियर तकनीकी विशेषज्ञता के साथ शहर के भविष्य की दिशा भी तय करते हैं। इंजीनियरिंग के क्षेत्र में बदलती तकनीक पर हुई चर्चा समारोह के दौरान आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर जय राम कुमार ने इंजीनियरिंग के क्षेत्र में बदलती तकनीक, आधुनिक निर्माण प्रणाली और सुरक्षित और विकास की जरूरत पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि तेजी से बढ़ते शहरों के सामने यातायात, जल निकासी, प्रदूषण और आधारभूत सुविधाओं से जुड़ी चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में इंजीनियरों को तकनीकी ज्ञान के साथ सामाजिक जिम्मेदारी को भी प्राथमिकता देनी होगी। कानपुर के विकास के लिए काम करने पर जोर दिया संस्था के सचिव इंजीनियर रजत कुमार खरे ने कानपुर के समग्र विकास के लिए योजनाबद्ध तरीके से काम करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि शहर को सुरक्षित और बेहतर बनाने के लिए सरकारी विभागों, तकनीकी विशेषज्ञों और नागरिकों के बीच समन्वय जरूरी है। आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और उनकी निगरानी को भी बेहतर बनाया जा सकता है। समारोह में APGCE कानपुर चैप्टर के अध्यक्ष मुकेश देव, सचिव रजत कुमार खरे, महासचिव नरेश खंडेलवाल, कोषाध्यक्ष आनंद सिंह समेत बड़ी संख्या में सिविल इंजीनियर, सेवानिवृत्त इंजीनियर और तकनीकी विशेषज्ञ मौजूद रहे। AI को अपनाने पर दिया जोर वहीं चेयरमैन मुकेश देव ने कहा कि ऐसे आयोजनों का उद्देश्य नए इंजीनियरों को प्रैक्टिकल नॉलेज और अनुभव से रूबरू कराना है। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ी के इंजीनियरों को इंजीनियरिंग के साथ एआई को भी अपनाना चाहिए और नए तरीकों पर काम करना चाहिए। इससे काम का आउटपुट बेहतर होगा, क्लाइंट का नुकसान कम होगा और समाज के विकास में भी योगदान मिलेगा।

