भास्कर न्यूज | जालंधर केंद्र सरकार की नई पीएफ पॉलिसी के तहत 40 हजार से अधिक वेतन पाने वाले कर्मचारी भी कर्मचारी राज्य बीमा निगम के दायरे में आ गए हैं। हालांकि, इन नए कार्डधारकों को योजना का पूरा लाभ पाने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। नए कार्ड धारकों को पहले ही दिन से अस्पताल की ओपीडी, सामान्य जांच और भर्ती होने की सुविधा तो मिल रही है, लेकिन इमपेनल्ड अस्पतालों में सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं और उन्नत जांचों से उन्हें वंचित रखा गया है। अस्पताल प्रशासन के नियमानुसार, नए कार्डधारकों को सुपर स्पेशियलिटी इलाज की सुविधा 6 महीने का कंट्रीब्यूशन पूरा होने के बाद ही मिलेगी। इस शर्त के कारण गंभीर बीमारियों से जूझ रहे कर्मचारियों को भारी आर्थिक और मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जालंधर रीजन में वर्तमान में लगभग 3.63 लाख कार्डधारक हैं। फिलहाल विभाग द्वारा नए जुड़े कर्मचारियों का वेरिफिकेशन किया जा रहा है, जिसके बाद नए कार्डधारकों की सटीक संख्या सामने आएगी। केस 1 : गर्दन के गंभीर दर्द से पीड़ित 45 साल के अमित को ईएसआईसी अस्पताल के ऑर्थोपेडिक डॉक्टर ने एमआरआई करवाने की सलाह दी। जब वह इमपेनल्ड डायग्नोस्टिक सेंटर पहुंचे, तो नई पॉलिसी का हवाला देकर एमआरआई करने से साफ इनकार कर दिया गया। मजबूरी में अमित को खुद के पैसों से निजी सेंटर से एमआरआई करानी पड़ी। केस 2 : सिर में ट्यूमर से पीड़ित 50 वर्षीय कुलदीप सर्जरी की उम्मीद में ईएसआईसी अस्पताल पहुंचे। नियम के मुताबिक उन्हें सुपर स्पेशियलिटी इमपेनल्ड अस्पताल में सर्जरी की जरूरत थी, लेकिन अस्पताल प्रशासन ने 6 महीने की शर्त के कारण उन्हें रेफर करने से मना कर दिया। अंततः परिजन इलाज के लिए उन्हें पीजीआई ले जाने को मजबूर हुए। नियम ही ऐसे हैं… नए ईएसआईसी कार्डधारकों को ओपीडी और सामान्य चिकित्सीय सुविधाएं पहले ही दिन से प्रदान की जाती हैं। हालांकि, विभागीय नियमों और नीति के अनुसार इमपेनल्ड अस्पतालों में सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं के लिए 6 महीने की निर्धारित अवधि पूरी होना अनिवार्य है। -डॉ. ज्योति शर्मा, एमएस

