दो जिगरी दोस्त, वही शब्द और 4 दिन का अजीब संयोग! क्या अजित पवार की तरह नाना पाटेकर को था अनहोनी का आभास?

दो जिगरी दोस्त, वही शब्द और 4 दिन का अजीब संयोग! क्या अजित पवार की तरह नाना पाटेकर को था अनहोनी का आभास?

Nana Patekar Ajit Pawar Friendship: दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के निधन से महाराष्ट्र समेत पूरे देश में शोक की लहर है। नाना के चाहने वाले, फिल्म जगत से जुड़े लोग और राजनीतिक क्षेत्र के कई नेता उन्हें याद कर श्रद्धांजलि दे रहे हैं। नाना पाटेकर सिर्फ एक बेहतरीन अभिनेता ही नहीं थे, बल्कि सामाजिक मुद्दों पर बेबाकी से अपनी बात रखने के लिए भी जाने जाते थे।

नाना पाटेकर के देशभर के कई राजनीतिक नेताओं से करीबी संबंध रहे। इनमें महाराष्ट्र के दिवंगत उपमुख्यमंत्री अजित पवार के साथ भी उनकी गहरी दोस्ती थी। बताया जाता है कि दोनों दिग्गजों के बीच करीब पांच दशक लंबी दोस्ती थी। उनके दोस्ती के कई किस्से सामने आते रहे हैं। अब दोनों के निधन से जुड़ा एक ऐसा संयोग सामने आया है, जिसने लोगों को भावुक कर दिया है।

उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने श्रद्धांजलि देते हुए कहा, “नाना पाटेकर के दादा (अजित पवार) के साथ बेहद आत्मीय और करीबी संबंध थे। इसलिए उनके निधन से मेरे लिए और हमारे परिवार के लिए भी जो शून्य पैदा हुआ है, वह बेहद दुखद है।”

निधन से चार दिन पहले दोनों ने कही थी एक जैसी बात

अजित पवार का जनवरी में विमान हादसे में निधन हुआ था। उनके निधन से चार दिन पहले उन्होंने बारामती में आयोजित एक कार्यक्रम में जीवन और मृत्यु को लेकर बात की थी। उन्होंने कहा था कि इंसान आज है और कल नहीं भी हो सकता, इसलिए जब तक जीवन है, समाज के लिए काम करना चाहिए।

अजित पवार ने कहा था कि राजनीति जीवन का सबकुछ नहीं है। चुनाव और राजनीति एक समय के बाद पीछे छूट जाते हैं, लेकिन व्यक्ति को अपने काम के जरिए समाज और अपने क्षेत्र में खुशहाली लाने का प्रयास करना चाहिए। उनका यह बयान उनके निधन के बाद काफी चर्चा में आया था।

अब नाना पाटेकर का भी निधन से करीब चार दिन पहले का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें वह भी जीवन की अनिश्चितता और समाज के लिए काम करने की जरूरत पर बात करते नजर आ रहे हैं। यह संयोग दोनों के प्रशंसकों और उन्हें करीब से जानने वालों को भावुक कर रहा है।

4 अक्टूबर को नाना पाटेकर ने कही थी दिल छू लेने वाली बात

गोवा में एक कार्यक्रम के दौरान नाना पाटेकर ने दिवंगत गोवा मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर को याद करते हुए जीवन और मृत्यु पर अपनी बात रखी थी। उन्होंने कहा था कि पर्रिकर उनसे उम्र में छोटे थे, लेकिन उनके काम और व्यक्तित्व की ऊंचाई इतनी बड़ी थी कि उन्हें सम्मान से सिर उठाकर देखना पड़ता था।

नाना ने पर्रिकर के काम और समर्पण का उदाहरण देते हुए कहा था कि इंसान को एक दिन जाना ही है। उन्होंने सवाल उठाया था कि जब तक जीवन है, तब तक वह अपने लिए तय किए गए काम को पूरा करने के लिए कितनी कोशिश कर रहा है।

नाना ने कहा था कि उन्हें भी एक दिन जाना है। “मैं भी आज हूं, कल नहीं हूं। पता नहीं, क्योंकि हर किसी की जिंदगी में वह वक्त आता ही है। लेकिन उससे पहले मुझे जो करना है, वह मैं कर सकता हूं क्या? मैंने कोशिश की है क्या?”

‘सिर्फ अपने तक सीमित रहेंगे तो फिर जीने का क्या मतलब?’

नाना पाटेकर ने इसी दौरान लोगों को सामाजिक जिम्मेदारी का एहसास कराने वाली बात भी कही थी। उन्होंने कहा था कि अगर इंसान अपने जीवन को केवल अपने तक सीमित रखता है, तो उसके जीवन का उद्देश्य अधूरा रह जाता है।

उनका संदेश था कि व्यक्ति को अपने जीवन में कुछ ऐसा करना चाहिए, जिससे समाज और दूसरे लोगों को भी फायदा मिले। नाना का यह अंदाज उनके सामाजिक सरोकारों और संवेदनशील व्यक्तित्व को दर्शाता है।

अजित पवार से थी नाना पाटेकर की खास दोस्ती

नाना पाटेकर और अजित पवार की दोस्ती महाराष्ट्र के राजनीतिक और सामाजिक हलकों में अक्सर चर्चा का विषय रही। दोनों अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े होने के बावजूद एक-दूसरे के प्रति सम्मान और आत्मीयता रखते थे।

नाना कई मौकों पर अजित पवार के साथ अपनी दोस्ती का जिक्र कर चुके थे। वहीं अजित पवार भी नाना के व्यक्तित्व और सामाजिक सोच का सम्मान करते थे।

अब दोनों के निधन के बाद उनके प्रशंसक उस संयोग को याद कर रहे हैं, जब दोनों ने अपने निधन से कुछ दिन पहले ही जीवन की अनिश्चितता और समाज के लिए कुछ करने की जरूरत पर लगभग एक जैसी बात कही थी।

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