देवरिया में दो वर्षों से अधिक समय से मानदेय नहीं मिलने का आरोप लगाते हुए समूह सखी वर्कर्स एसोसिएशन से जुड़ी महिलाओं ने सोमवार को कलेक्ट्रेट पर धरना-प्रदर्शन किया। समूह सखियां विकास भवन से प्रदर्शन करते हुए जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचीं। यहां उन्होंने मांगों को लेकर नारेबाजी की और धरने पर बैठ गईं। इसके बाद प्रशासन को सात सूत्री मांगों का ज्ञापन सौंपा। समूह सखियों ने चेतावनी दी कि जल्द मांगों का समाधान नहीं हुआ तो वे लखनऊ में आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगी।
समूह सखी वर्कर्स एसोसिएशन के अनुसार, समूह सखियां ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़ने, समूहों के गठन और संचालन में सहयोग करने के साथ सरकार की योजनाओं को ग्रामीण महिलाओं तक पहुंचाने का काम करती हैं। उनका कहना है कि जिम्मेदारियां नियमित रूप से निभाने के बावजूद दो साल से अधिक समय से मानदेय का भुगतान नहीं किया गया है। लंबे समय से भुगतान लंबित होने के कारण उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। ब्लॉक कार्यालय आने-जाने के खर्च से लेकर परिवार की रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने में भी परेशानी हो रही है। 21 हजार रुपये मासिक मानदेय की मांग समूह सखियों ने बकाया मानदेय का तत्काल भुगतान करने के साथ उन्हें स्थायी राज्य कर्मचारी घोषित करने की मांग की। उन्होंने न्यूनतम 21 हजार रुपये मासिक मानदेय निर्धारित करने और प्रत्येक समूह सखी का 50 लाख रुपये का दुर्घटना बीमा कराने की मांग भी रखी। ज्ञापन में ब्लॉक स्तर पर कथित शोषण और उत्पीड़न पर रोक लगाने, ऑनलाइन कार्य के लिए मोबाइल और डेटा उपलब्ध कराने तथा मानदेय सीधे समूह सखियों के बैंक खातों में भेजने की मांग शामिल है। उनका कहना है कि ऑनलाइन काम बढ़ने के बावजूद इसके लिए जरूरी संसाधन उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। कई बार पत्राचार के बाद भी भुगतान नहीं बनकटा ब्लॉक अध्यक्ष तुलसी ने कहा कि दो वर्षों से अधिक समय से मानदेय नहीं मिलने के कारण समूह सखियों को गंभीर आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। भुगतान को लेकर कई बार संबंधित अधिकारियों को पत्राचार और जानकारी दी गई, लेकिन अब तक समस्या का समाधान नहीं हुआ। इसी कारण कलेक्ट्रेट पहुंचकर धरना-प्रदर्शन करना पड़ा। उन्होंने कहा कि यदि बकाया मानदेय का भुगतान और अन्य मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो समूह सखियां लखनऊ में आंदोलन करेंगी। प्रदर्शन में समूह सखी वर्कर्स एसोसिएशन की महिलाओं के साथ अखिल भारतीय खेत एवं ग्रामीण मजदूर सभा के पदाधिकारी और कार्यकर्ता भी शामिल रहे।

