देवघर-रोहिणी रेललाइन तैयार, अब दौड़ेंगी ट्रेनें:अब जसीडीह में इंजन बदलने की जरूरत नहीं, 45 मिनट तक समय भी बचेगा

देवघर-रोहिणी रेललाइन तैयार, अब दौड़ेंगी ट्रेनें:अब जसीडीह में इंजन बदलने की जरूरत नहीं, 45 मिनट तक समय भी बचेगा

जसीडीह-रोहिणी बाइपास रेललाइन पर ट्रेनों के नियमित परिचालन का रास्ता साफ हो गया है। पूर्व सर्किल के रेल संरक्षा आयुक्त (सीआरएस) गुरु प्रकाश ने नवनिर्मित 4.905 किलोमीटर लंबी देवघर-रोहिणी रेल बाइपास लिंक को खोलने की औपचारिक अनुमति दे दी है। इससे इस रूट पर ट्रेनों की आवाजाही तेज होगी। यात्री व माल परिवहन में समय की बचत होगी। आसनसोल से दुमका, बांका और हरलाटांड़ तथा विपरीत दिशा में चलने वाली मेल, एक्सप्रेस और मालगाड़ियों को अब जसीडीह जंक्शन पर दिशा बदलने के लिए इंजन बदलने की जरूरत नहीं होगी। इससे प्रति ट्रेन औसतन 35 से 45 मिनट की बचत होगी। कुल परिचालन समय में 60 से 90 मिनट तक की कमी आने की संभावना है। प्लेटफॉर्म-1 का यात्री ट्रेनों के लिए होगा बेहतर इस्तेमाल बाइपास शुरू होने से जसीडीह जंक्शन पर परिचालन व्यवस्था भी सुगम होगी। अभी इंजन बदलने में लगने वाले अतिरिक्त समय के कारण पीछे से आने वाली डाउन ट्रेनों पर भी विलंब का असर पड़ता है। नई रेललाइन चालू होने के बाद यह समय बचेगा और रेलपथ भी जल्द उपलब्ध हो सकेगा। इससे ट्रेनों की आवाजाही अधिक निर्बाध होने की उम्मीद है। जसीडीह स्टेशन का प्लेटफॉर्म संख्या-1 भी अप और डाउन यात्री ट्रेनों के लिए अधिक सुलभ हो जाएगा। यह बाइपास देवघर, कटोरिया, बांका और सुल्तानगंज होते हुए किऊल तक पहुंचने के लिए एक वैकल्पिक रेल मार्ग भी उपलब्ध कराएगा। इस रेललाइन पर यात्री और मालगाड़ियों को अधिकतम 100 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चलाने की अनुमति दी गई है। लिंक केबिन, आरसीसी बॉक्स पुल समेत कई महत्वपूर्ण काम हुए देवघर-रोहिणी बाइपास रेललाइन देवघर लिंक केबिन और कुमराबाद रोहिणी स्टेशन के बीच स्थित है। परियोजना के तहत कुमराबाद रोहिणी को हॉल्ट से पूर्ण ब्लॉक स्टेशन में बदलने का काम किया गया है। इसके अलावा देवघर लिंक केबिन का निर्माण और जसीडीह-वैद्यनाथ धाम रेललाइन के नीचे आरसीसी बॉक्स पुल बनाने जैसे महत्वपूर्ण कार्य भी किए गए हैं। बाइपास के चालू होने से जसीडीह स्टेशन पर ट्रेनों का दबाव कम होगा और देवघर समेत संताल परगना के विभिन्न क्षेत्रों की रेल कनेक्टिविटी को मजबूती मिलेगी। पूर्व रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी शिबराम माझी ने कहा कि यह रणनीतिक बाइपास रेललाइन क्षेत्र की रेल अवसंरचना में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। जसीडीह-रोहिणी बाइपास रेललाइन पर ट्रेनों के नियमित परिचालन का रास्ता साफ हो गया है। पूर्व सर्किल के रेल संरक्षा आयुक्त (सीआरएस) गुरु प्रकाश ने नवनिर्मित 4.905 किलोमीटर लंबी देवघर-रोहिणी रेल बाइपास लिंक को खोलने की औपचारिक अनुमति दे दी है। इससे इस रूट पर ट्रेनों की आवाजाही तेज होगी। यात्री व माल परिवहन में समय की बचत होगी। आसनसोल से दुमका, बांका और हरलाटांड़ तथा विपरीत दिशा में चलने वाली मेल, एक्सप्रेस और मालगाड़ियों को अब जसीडीह जंक्शन पर दिशा बदलने के लिए इंजन बदलने की जरूरत नहीं होगी। इससे प्रति ट्रेन औसतन 35 से 45 मिनट की बचत होगी। कुल परिचालन समय में 60 से 90 मिनट तक की कमी आने की संभावना है। प्लेटफॉर्म-1 का यात्री ट्रेनों के लिए होगा बेहतर इस्तेमाल बाइपास शुरू होने से जसीडीह जंक्शन पर परिचालन व्यवस्था भी सुगम होगी। अभी इंजन बदलने में लगने वाले अतिरिक्त समय के कारण पीछे से आने वाली डाउन ट्रेनों पर भी विलंब का असर पड़ता है। नई रेललाइन चालू होने के बाद यह समय बचेगा और रेलपथ भी जल्द उपलब्ध हो सकेगा। इससे ट्रेनों की आवाजाही अधिक निर्बाध होने की उम्मीद है। जसीडीह स्टेशन का प्लेटफॉर्म संख्या-1 भी अप और डाउन यात्री ट्रेनों के लिए अधिक सुलभ हो जाएगा। यह बाइपास देवघर, कटोरिया, बांका और सुल्तानगंज होते हुए किऊल तक पहुंचने के लिए एक वैकल्पिक रेल मार्ग भी उपलब्ध कराएगा। इस रेललाइन पर यात्री और मालगाड़ियों को अधिकतम 100 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चलाने की अनुमति दी गई है। लिंक केबिन, आरसीसी बॉक्स पुल समेत कई महत्वपूर्ण काम हुए देवघर-रोहिणी बाइपास रेललाइन देवघर लिंक केबिन और कुमराबाद रोहिणी स्टेशन के बीच स्थित है। परियोजना के तहत कुमराबाद रोहिणी को हॉल्ट से पूर्ण ब्लॉक स्टेशन में बदलने का काम किया गया है। इसके अलावा देवघर लिंक केबिन का निर्माण और जसीडीह-वैद्यनाथ धाम रेललाइन के नीचे आरसीसी बॉक्स पुल बनाने जैसे महत्वपूर्ण कार्य भी किए गए हैं। बाइपास के चालू होने से जसीडीह स्टेशन पर ट्रेनों का दबाव कम होगा और देवघर समेत संताल परगना के विभिन्न क्षेत्रों की रेल कनेक्टिविटी को मजबूती मिलेगी। पूर्व रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी शिबराम माझी ने कहा कि यह रणनीतिक बाइपास रेललाइन क्षेत्र की रेल अवसंरचना में महत्वपूर्ण उपलब्धि है।  

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