बांदा में नवरात्र में दुर्गा पंडालों में बज रहे डीजे और लाउडस्पीकर की तेज आवाज को नियंत्रित करने की मांग उठी है। जिला अधिवक्ता संघ बांदा ने बुधवार को दोपहर 12:15 पर चित्रकूटधाम मंडल के आयुक्त को ज्ञापन सौंपकर मानक से अधिक तेज आवाज में डीजे और लाउडस्पीकर बजाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। संघ ने कहा कि तेज ध्वनि से बुजुर्गों, बच्चों और गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। ज्ञापन में कहा गया कि नवरात्र के दौरान विभिन्न स्थानों पर मां दुर्गा की प्रतिमाएं स्थापित कर नौ दिनों तक पूजा-अर्चना की जा रही है। इन स्थानों पर डीजे और लाउडस्पीकर लगाए गए हैं। आरोप है कि कई जगह तेज आवाज में इन्हें बजाने से आसपास रहने वाले लोगों को परेशानी होती है। खासकर बुजुर्गों, बच्चों और गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य पर इसका बुरा प्रभाव पड़ सकता है। जिला अधिवक्ता संघ ने ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के In Re: Noise Pollution (V), (2005) 5 SCC 733 मामले में जारी दिशा-निर्देशों का हवाला दिया। संघ ने कहा कि ध्वनि संबंधी निर्धारित मानकों और कानूनी प्रावधानों का पालन कराया जाना जरूरी है। ज्ञापन के माध्यम से आयुक्त से मांग की गई कि संबंधित क्षेत्र के उपजिलाधिकारियों (एसडीएम) और तहसीलदारों को निर्देश जारी किए जाएं, ताकि मानक से अधिक तेज आवाज में डीजे और लाउडस्पीकर बजाने वालों को चिह्नित किया जा सके। साथ ही नियमों का उल्लंघन करने वाले संचालकों के खिलाफ नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाए। संघ का कहना है कि धार्मिक आयोजनों के दौरान ध्वनि की निर्धारित सीमा का पालन कराया जाना चाहिए, ताकि श्रद्धालुओं की पूजा-अर्चना के साथ आसपास रहने वाले लोगों को भी अनावश्यक परेशानी न हो।

