गोरखपुर पांडेयहाता से धर्मशाला बाजार तक विकसित हो रहे विरासत गलियारे की तस्वीर दीवाली से पहले बदलने की तैयारी तेज हो गई है। बाजार की दुकानों और गलियों की दीवारों को एक रंग में सजाया जा रहा है। दुकानों पर नारंगी रंग चढ़ रहा है, जबकि किनारों पर सफेद बॉर्डर और दरवाजों-खिड़कियों के फ्रेम काले रंग के होंगे। दुकानों पर काली पृष्ठभूमि वाले साइनबोर्ड लगाए जाएंगे, जिन पर सफेद अक्षरों में नाम लिखे जाएंगे। रंगों का यह संयोजन गलियारे को एकरूप और आकर्षक स्वरूप देगा। एक जैसी रंगत के बीच बाजार की पुरानी पहचान को भी बनाए रखने की कोशिश की जा रही है। देखिए 3 तस्वीरें गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) ने विरासत गलियारे की 991 दुकानों को एक जैसा बाहरी स्वरूप देने के लिए रंगाई, वाटरप्रूफिंग और साइनबोर्ड का डिजाइन तय कर काम शुरू करा दिया है। इन कार्यों को 31 अक्टूबर तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की स्वीकृति के बाद जीडीए उपाध्यक्ष अभिनव गोपाल और नगर आयुक्त अजय जैन की निगरानी में काम तेजी से कराया जा रहा है। अब तक करीब 25 प्रतिशत दुकानों और मकानों की रंगाई का काम पूरा हो चुका है। अधिकारियों का लक्ष्य है कि चार-पांच नवंबर तक पूरे गलियारे की तस्वीर बदली हुई नजर आए। दुकानदार बोले- रात में रोशनी के बीच और खूबसूरत दिखेगा बाजार विरासत गलियारे में हो रहे बदलाव को लेकर दुकानदार भी उत्साहित हैं। दुकानों की एक जैसी रंगत और नए स्वरूप को देखकर उन्हें बाजार के और आकर्षक बनने की उम्मीद है। दैनिक भास्कर से बातचीत में पांडेयहाता के दुकानदार दीपक कुमार ने बताया कि विरासत गलियारे का नजारा बहुत शानदार लग रहा है। धीरे-धीरे सभी दुकानें एक ही रंग में रंगने लगी हैं। इससे बाजार की खूबसूरती बढ़ रही है। रात के समय रोशनी के बीच इसका नजारा और भी अच्छा दिखाई देता है। मुख्य पांडेयहाता में दुकान चलाने वाले हवि अहमद ने बताया कि विरासत गलियारा काफी अच्छा बनकर तैयार हो रहा है। यहां आने वाले लोग इसकी तारीफ करते हैं। उनके मुताबिक, पहले की तुलना में दुकानदारी भी बढ़ी है। सभी दुकानों को एक रंग में सजाने से बाजार में सुंदरता और एकरूपता आएगी। उन्होंने इसे सरकार की अच्छी पहल बताया। वहीं, दुकानदार राहुल कुमार गुप्ता ने बताया कि दीवाली को लेकर तैयारियां चल रही हैं। उम्मीद है कि त्योहार तक काम पूरा हो जाएगा। सभी इमारतों को एक रंग में रंगते देखकर उन्हें राजस्थान के जयपुर की याद आती है, जहां बाजारों और दुकानों का एक जैसा रंग-रूप आकर्षित करता है। उनका कहना है कि इसी तरह विरासत गलियारा भी अपनी अलग पहचान बना सकता है। पांडेयहाता से घंटाघर और धर्मशाला से अलीनगर तक रंगाई विरासत गलियारे में दोनों तरफ रंगाई का काम कराया जा रहा है। पांडेयहाता से घंटाघर और धर्मशाला से अलीनगर की ओर दुकानों और मकानों के बाहरी हिस्सों को नया स्वरूप दिया जा रहा है। इसके लिए निर्धारित रंग संयोजन का इस्तेमाल किया जा रहा है, ताकि पूरे बाजार में कहीं अलग-अलग रंगों के कारण असमानता न दिखे। सिर्फ रंगाई ही नहीं, दीवारों को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए वाटरप्रूफिंग भी कराई जा रही है। इससे दीवारों पर नमी के प्रभाव को कम करने और रंग-रोगन को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी। दुकानों के सामने के हिस्से यानी फसाड को व्यवस्थित करने के साथ साइनबोर्ड भी तय डिजाइन के अनुसार लगाए जाएंगे। अधिकारियों के मुताबिक, सोमवार को 25 मजदूर दुकानों के फसाड की रंगाई और वाटरप्रूफिंग के काम में जुटे रहे। अधिशासी अभियंता अशोक भाटी और अवर अभियंता विवेकानंद की देखरेख में काम कराया जा रहा है। निर्धारित डिजाइन के मुताबिक काम पूरा होने पर पूरे गलियारे में एक जैसी रंगत और साइनबोर्ड नजर आएंगे। पुरानी पहचान के साथ आधुनिक और व्यवस्थित स्वरूप देने की तैयारी विरासत गलियारे को विकसित करने का उद्देश्य बाजार के बाहरी स्वरूप को आकर्षक बनाने के साथ उसे व्यवस्थित पहचान देना भी है। अभी अलग-अलग दुकानों और इमारतों के रंग-रूप में अंतर दिखाई देता है। रंगाई और साइनबोर्ड की एक जैसी डिजाइन से यह अंतर कम होगा और पूरे बाजार में एकरूपता नजर आएगी। जीडीए उपाध्यक्ष अभिनव गोपाल ने बताया कि विरासत गलियारे को दीवाली से पहले नया और आकर्षक स्वरूप देने के लिए काम तेजी से कराया जा रहा है। दुकानों की रंगाई, वाटरप्रूफिंग और साइनबोर्ड का काम तय डिजाइन के अनुसार पूरा कराया जाएगा। लक्ष्य है कि चार-पांच नवंबर तक गलियारे की तस्वीर बदली हुई नजर आए और बाजार एकरूपता के साथ सुंदर दिखे।

