दिल्ली के एक होटल में हुए छेड़खानी कांड ने बिहार की सियासत में हलचल मचा दी है। ऐसा दावा किया जा रहा है कि बिहार के एक कथित मंत्री ने होटल की महिला कर्मचारी के साथ छेड़छाड़ की। उस महिला कर्मचारी ने मंत्री की पिटाई कर दी। लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे और महुआ के पूर्व विधायक तेज प्रताप यादव ने आरोप लगाया तो मामले ने तूल पकड़ लिया। उन्होंने कहा कि इस मामले में बिहार सरकार के मंत्री संजय सिंह शामिल हैं। बिहार सरकार मामले की जांच कराए। इस आरोप पर मंत्री संजय सिंह ने तेज प्रताप को 50 करोड़ रुपए की मानहानि का नोटिस भेजा है। तेज प्रताप के बाद अब LJP(R ) के चीफ और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने भी इस मामले की CM से जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा- मेरी पार्टी क्या मेरे परिवार का भी कोई व्यक्ति अगर इस घृणित काम में शामिल रहा तो उसे कड़ी से कड़ी सजा दिलाने की जिम्मेदारी मैं लेता हूं।
ऐसे में उस संजय सिंह को जानिए जिन पर तेज प्रताप ने आरोप लगाए हैं चिराग के भरोसेमंद, विधायक बनते ही मंत्री बनवा दिया संजय सिंह करीब साल 2010 के बाद से पॉलिटिक्स में एक्टिव हैं। इनके करीबी जानकार बताते हैं, 2015 में दिवंगत नेता रामविलास पासवाान के संपर्क में आने के बाद इन्होंने लोजपा की सदस्यता ली। इसके बाद लगातार अपनी वफादारी उसी पार्टी के साथ निभा रहे हैं। संजय को 2020 में पार्टी की तरफ से पहली बार वैशाली के मुहआ विधानसभा से चुनाव लड़ाया गया। वह तीसरे स्थान पर रहे। चुनाव हारने के बाद चिराग ने पार्टी के बिहार प्रदेश संगठन प्रभारी बनाकर संगठन में बड़ी जिम्मेदारी दी। चिराग ने 2025 के चुनाव में इन पर एक बार फिर भरोसा जताया और महुआ का टिकट दिया। इस बार इनका मुकबला तेज प्रताप और RJD के सिटिंग विधायक मुकेश रौशन से था। 2020 के चुनाव में तीसरे स्थान पर रहे संजय सिंह इस बार 44,997 वोटों के बड़े अंतर जीत गए। RJD कैंडिडेट मुकेश रौशन को हराया। तेज प्रताप तीसरे स्थान पर रहे। चुनाव जीतने के बाद चिराग पासवान ने इन्हें अपनी पार्टी के कोटे से मंत्री बना दिया। पहली बार विधायक बने संजय सिंह को सम्राट कैबिनेट में PHED विभाग की जिम्मेदारी दी गई। संजय सिंह के खिलाफ महुआ और पटना में ठगी व फॉड के केस दर्ज
भास्कर ने संजय सिंह के 2020 और 2025 के चुनाव में दिए गए हलफनामे की स्टडी की। इन्होंंने स्वीकार किया है कि उन पर दो से ज्यादा केस चल रहे हैं। ये केस संगीन धाराओं में दर्ज हैं। इनपर धोखाधड़ी, जालसाजी और फर्जी डॉक्यूमेंट दिखाकर जमीन कब्जा करने जैसे आरोप लगे हैं। इसके अलावा ठगी और चेक बाउंस के भी आरोप लगे हैं। हालांकि किसी भी मामले में दोष सिद्ध नहीं हुई है। वह रिवॉल्वर और रायफल रखने के शौकीन हैं। पिता गल्ला कारोबारी, संजय ने रियल एस्टेट में जमाई धाक जाति से राजपूत संजय सिंह के पिता गल्ला कारोबारी थे। मुख्य रूप से जीरे का थोक कारोबार करते थे। संजय ने अपने पिता के कारोबार को छोड़कर अपनी अलग राह बनाई। महुआ को छोड़कर पटना को अपने कारोबार का सेंटर बनाया। परिवार और रिश्तेदारों की मदद से 2010 के आसपास पटना में रियल एस्टेट की दुनिया में कदम रखा। इसके बाद कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। छोटे स्तर पर शुरू हुआ इनका भवानी कंस्ट्रक्शन आज इस फील्ड में बड़ा प्लेयर है। करोड़ों रुपए खर्च कर इन्होंने पटना में अपना आलीशान बंगला बनवाया है। महुआ की सियासत में दबदबा बनाने की कोशिश संजय सिंह तीन भाइयों में सबसे छोटे हैं। इनके दो बड़े भाई (मृत्युंजय और धनंजय सिंह) बिजनेसमैन हैं। विधायक बनने से पहले संजय सिंह का परिवार महुआ के लोकल बॉडी पॉलिटिक्स में भी एक्टिव रहा है। इनके बड़े भाई मृत्युंजय सिंह की पत्नी नगर परिषद में सभापति रह चुकी हैं। इसके बाद मृत्युंजय सिंह भी चुनाव लड़े, लेकिन हार गए थे। घनंजय सिंह पहले मोटर पार्ट्स का बिजनेस करते है। फिलहाल हाजीपुर में श्रीलेदर्स का शोरूम चलाते हैं। पहले महुआ में संघर्ष, बाइक से फॉर्च्युनर तक पहुंचे संजय सिंह के करीबी सुमित सहगल बताते हैं। संजय सिंह ने अपने कारोबार की शुरुआत महुआ से की थी। तब ये स्प्लेंडर बाइक से घूमते थे। एक तरीके से स्मॉल बैंकिंग का काम करते थे। छोटे कारोबारियों को पैसे देते और उनसे ब्याज वसूलते।
इंटर और ग्रेजुएशन के बीच 16 साल का गैप चुनावी हलफनामे के अनुसार संजय सिंह ने 13 साल की उम्र में मैट्रिक पास किया था। 2000 में इंटर की पढ़ाई पूरी की। 35 साल की उम्र में 2016 में ग्रेजुएशन की डिग्री ली। इंटर और ग्रेजुएशन के बीच 16 साल का गैप है। 5 साल में 70% बढ़ी संपत्ति 2020 से 2025 के बीच संजय सिंह की संपत्ति में तकरीबन 70% से ज्यादा की वृद्धि हुई है। 2020 के चुनाव में दिए गए हलफनामे में इनकी कुल संपत्ति ( चल और अचल मिलाकर) करीब 4.30 करोड़ रुपए थी। 2025 के विधानसभा चुनाव में दिए गए हलफनामे में इनकी कुल संपत्ति 7 करोड़ 30 लाख रुपए की है। इनके पास लगभग एक किलो से ज्यादा सोना है। अब जानिए, इस पूरे विवाद पर किसने क्या कहा? घिनौना काम करने वाले को नहीं छोड़ूंगा: चिराग पासवान चिराग पासवान ने कहा, ‘आरोप इतने घिनौने हैं कि इसका संरक्षण कोई नहीं कर सकता है। मुझे नहीं पता कि वो मंत्री किस पार्टी का है। कहां का है। लेकिन, अगर वो बिहार का है। अगर वो मेरी पार्टी से है तो कड़ी से कड़ी सजा उस व्यक्ति को हो, इसकी जिम्मेदारी मैं खुद लेता हूं। बिहार सरकार से आग्रह करता हूं कि इसकी निष्पक्ष जांच हो। उस लड़की से भी आग्रह करता हूं कि अपनी पहचान बताए बिना तथ्यों को सामने लाए। होटल जानकारी साझा करे।’ अगर मेरे परिवार से कोई होता है तो चिराग पासवान कड़ी से कड़ी सजा देगा। बिहार की छवि और महिलाओं के साथ गृणत अपराध करने वाले की निंदा करता हूं।’ 25 लाख रुपए में मामले को दबाया गया: तेज प्रताप तेज प्रताप ने कहा, ’दिल्ली के एक होटल में महिला स्टाफ के साथ छेड़छाड़ करने वाले संजय सिंह ने 25 लाख रुपए देकर पूरा मामला दबा दिया है। पैसों के लेन-देन के आरोपों की जांच होनी चाहिए। संजय सिंह हमें जान से मरवाना चाहते हैं।’ मंत्री ने कहा- सबूत दिखाएं राजनीति छोड़ दूंगा, 50 करोड़ का नोटिस मंत्री संजय सिंह ने कहा, ‘तेज प्रताप के आरोप से मंत्रिपरिषद को बदनाम करने की कोशिश हो रही है। बिहार शर्मसार हो रहा है। कोई माई का लाल साबित कर दे, राजनीति से सन्यास ले लूंगा। किसी के पास सबूत है तो पेश करे।’ इसके साथ ही उन्होंने तेज प्रताप को 50 करोड़ रुपए का नोटिस भेजने के साथ ही उनसे कई सवालों के जवाब मांगे हैं। दिल्ली के एक होटल में हुए छेड़खानी कांड ने बिहार की सियासत में हलचल मचा दी है। ऐसा दावा किया जा रहा है कि बिहार के एक कथित मंत्री ने होटल की महिला कर्मचारी के साथ छेड़छाड़ की। उस महिला कर्मचारी ने मंत्री की पिटाई कर दी। लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे और महुआ के पूर्व विधायक तेज प्रताप यादव ने आरोप लगाया तो मामले ने तूल पकड़ लिया। उन्होंने कहा कि इस मामले में बिहार सरकार के मंत्री संजय सिंह शामिल हैं। बिहार सरकार मामले की जांच कराए। इस आरोप पर मंत्री संजय सिंह ने तेज प्रताप को 50 करोड़ रुपए की मानहानि का नोटिस भेजा है। तेज प्रताप के बाद अब LJP(R ) के चीफ और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने भी इस मामले की CM से जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा- मेरी पार्टी क्या मेरे परिवार का भी कोई व्यक्ति अगर इस घृणित काम में शामिल रहा तो उसे कड़ी से कड़ी सजा दिलाने की जिम्मेदारी मैं लेता हूं।
ऐसे में उस संजय सिंह को जानिए जिन पर तेज प्रताप ने आरोप लगाए हैं चिराग के भरोसेमंद, विधायक बनते ही मंत्री बनवा दिया संजय सिंह करीब साल 2010 के बाद से पॉलिटिक्स में एक्टिव हैं। इनके करीबी जानकार बताते हैं, 2015 में दिवंगत नेता रामविलास पासवाान के संपर्क में आने के बाद इन्होंने लोजपा की सदस्यता ली। इसके बाद लगातार अपनी वफादारी उसी पार्टी के साथ निभा रहे हैं। संजय को 2020 में पार्टी की तरफ से पहली बार वैशाली के मुहआ विधानसभा से चुनाव लड़ाया गया। वह तीसरे स्थान पर रहे। चुनाव हारने के बाद चिराग ने पार्टी के बिहार प्रदेश संगठन प्रभारी बनाकर संगठन में बड़ी जिम्मेदारी दी। चिराग ने 2025 के चुनाव में इन पर एक बार फिर भरोसा जताया और महुआ का टिकट दिया। इस बार इनका मुकबला तेज प्रताप और RJD के सिटिंग विधायक मुकेश रौशन से था। 2020 के चुनाव में तीसरे स्थान पर रहे संजय सिंह इस बार 44,997 वोटों के बड़े अंतर जीत गए। RJD कैंडिडेट मुकेश रौशन को हराया। तेज प्रताप तीसरे स्थान पर रहे। चुनाव जीतने के बाद चिराग पासवान ने इन्हें अपनी पार्टी के कोटे से मंत्री बना दिया। पहली बार विधायक बने संजय सिंह को सम्राट कैबिनेट में PHED विभाग की जिम्मेदारी दी गई। संजय सिंह के खिलाफ महुआ और पटना में ठगी व फॉड के केस दर्ज
भास्कर ने संजय सिंह के 2020 और 2025 के चुनाव में दिए गए हलफनामे की स्टडी की। इन्होंंने स्वीकार किया है कि उन पर दो से ज्यादा केस चल रहे हैं। ये केस संगीन धाराओं में दर्ज हैं। इनपर धोखाधड़ी, जालसाजी और फर्जी डॉक्यूमेंट दिखाकर जमीन कब्जा करने जैसे आरोप लगे हैं। इसके अलावा ठगी और चेक बाउंस के भी आरोप लगे हैं। हालांकि किसी भी मामले में दोष सिद्ध नहीं हुई है। वह रिवॉल्वर और रायफल रखने के शौकीन हैं। पिता गल्ला कारोबारी, संजय ने रियल एस्टेट में जमाई धाक जाति से राजपूत संजय सिंह के पिता गल्ला कारोबारी थे। मुख्य रूप से जीरे का थोक कारोबार करते थे। संजय ने अपने पिता के कारोबार को छोड़कर अपनी अलग राह बनाई। महुआ को छोड़कर पटना को अपने कारोबार का सेंटर बनाया। परिवार और रिश्तेदारों की मदद से 2010 के आसपास पटना में रियल एस्टेट की दुनिया में कदम रखा। इसके बाद कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। छोटे स्तर पर शुरू हुआ इनका भवानी कंस्ट्रक्शन आज इस फील्ड में बड़ा प्लेयर है। करोड़ों रुपए खर्च कर इन्होंने पटना में अपना आलीशान बंगला बनवाया है। महुआ की सियासत में दबदबा बनाने की कोशिश संजय सिंह तीन भाइयों में सबसे छोटे हैं। इनके दो बड़े भाई (मृत्युंजय और धनंजय सिंह) बिजनेसमैन हैं। विधायक बनने से पहले संजय सिंह का परिवार महुआ के लोकल बॉडी पॉलिटिक्स में भी एक्टिव रहा है। इनके बड़े भाई मृत्युंजय सिंह की पत्नी नगर परिषद में सभापति रह चुकी हैं। इसके बाद मृत्युंजय सिंह भी चुनाव लड़े, लेकिन हार गए थे। घनंजय सिंह पहले मोटर पार्ट्स का बिजनेस करते है। फिलहाल हाजीपुर में श्रीलेदर्स का शोरूम चलाते हैं। पहले महुआ में संघर्ष, बाइक से फॉर्च्युनर तक पहुंचे संजय सिंह के करीबी सुमित सहगल बताते हैं। संजय सिंह ने अपने कारोबार की शुरुआत महुआ से की थी। तब ये स्प्लेंडर बाइक से घूमते थे। एक तरीके से स्मॉल बैंकिंग का काम करते थे। छोटे कारोबारियों को पैसे देते और उनसे ब्याज वसूलते।
इंटर और ग्रेजुएशन के बीच 16 साल का गैप चुनावी हलफनामे के अनुसार संजय सिंह ने 13 साल की उम्र में मैट्रिक पास किया था। 2000 में इंटर की पढ़ाई पूरी की। 35 साल की उम्र में 2016 में ग्रेजुएशन की डिग्री ली। इंटर और ग्रेजुएशन के बीच 16 साल का गैप है। 5 साल में 70% बढ़ी संपत्ति 2020 से 2025 के बीच संजय सिंह की संपत्ति में तकरीबन 70% से ज्यादा की वृद्धि हुई है। 2020 के चुनाव में दिए गए हलफनामे में इनकी कुल संपत्ति ( चल और अचल मिलाकर) करीब 4.30 करोड़ रुपए थी। 2025 के विधानसभा चुनाव में दिए गए हलफनामे में इनकी कुल संपत्ति 7 करोड़ 30 लाख रुपए की है। इनके पास लगभग एक किलो से ज्यादा सोना है। अब जानिए, इस पूरे विवाद पर किसने क्या कहा? घिनौना काम करने वाले को नहीं छोड़ूंगा: चिराग पासवान चिराग पासवान ने कहा, ‘आरोप इतने घिनौने हैं कि इसका संरक्षण कोई नहीं कर सकता है। मुझे नहीं पता कि वो मंत्री किस पार्टी का है। कहां का है। लेकिन, अगर वो बिहार का है। अगर वो मेरी पार्टी से है तो कड़ी से कड़ी सजा उस व्यक्ति को हो, इसकी जिम्मेदारी मैं खुद लेता हूं। बिहार सरकार से आग्रह करता हूं कि इसकी निष्पक्ष जांच हो। उस लड़की से भी आग्रह करता हूं कि अपनी पहचान बताए बिना तथ्यों को सामने लाए। होटल जानकारी साझा करे।’ अगर मेरे परिवार से कोई होता है तो चिराग पासवान कड़ी से कड़ी सजा देगा। बिहार की छवि और महिलाओं के साथ गृणत अपराध करने वाले की निंदा करता हूं।’ 25 लाख रुपए में मामले को दबाया गया: तेज प्रताप तेज प्रताप ने कहा, ’दिल्ली के एक होटल में महिला स्टाफ के साथ छेड़छाड़ करने वाले संजय सिंह ने 25 लाख रुपए देकर पूरा मामला दबा दिया है। पैसों के लेन-देन के आरोपों की जांच होनी चाहिए। संजय सिंह हमें जान से मरवाना चाहते हैं।’ मंत्री ने कहा- सबूत दिखाएं राजनीति छोड़ दूंगा, 50 करोड़ का नोटिस मंत्री संजय सिंह ने कहा, ‘तेज प्रताप के आरोप से मंत्रिपरिषद को बदनाम करने की कोशिश हो रही है। बिहार शर्मसार हो रहा है। कोई माई का लाल साबित कर दे, राजनीति से सन्यास ले लूंगा। किसी के पास सबूत है तो पेश करे।’ इसके साथ ही उन्होंने तेज प्रताप को 50 करोड़ रुपए का नोटिस भेजने के साथ ही उनसे कई सवालों के जवाब मांगे हैं।

