केरलम पुलिस ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के विरोध में दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान एनएसयूआई की कार्यकर्ता अतिरा विजयन के साथ कथित मारपीट के मामले में बृहस्पतिवार को जीरो प्राथमिकी दर्ज की। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। विजयन की ओर से राज्य के पुलिस प्रमुख को शिकायत दिए जाने के बाद यहां म्यूजियम पुलिस थाने में जीरो प्राथमिकी दर्ज की गई।
जीरो प्राथमिकी ऐसी प्राथमिकी होती है, जिसे किसी भी पुलिस थाने में दर्ज कराया जा सकता है भले ही अपराध किसी दूसरे स्थान पर हुआ हो। प्राथमिकी के अनुसार, यह घटना 13 अक्टूबर को दिल्ली के कनॉट प्लेस में एनएसयूआई के अचानक किए गए प्रदर्शन के दौरान हुई। प्राथमिकी में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत महिला की गरिमा भंग करने के इरादे से हमला करने, महिला के कपड़े उतारने का प्रयास करने, जानबूझकर चोट पहुंचाने, गलत तरीके से रोकने, गाली-गलौज करने और आपराधिक धमकी देने से संबंधित आरोप लगाए गए हैं।
अधिकारियों ने बताया कि प्राथमिकी में किसी पुलिस अधिकारी या अन्य व्यक्ति को आरोपी के रूप में नामजद नहीं किया गया है। प्राथमिकी के अनुसार, शिकायतकर्ता और अन्य कार्यकर्ताओं को बस से कनॉट प्लेस ले जाया गया, जहां उन्हें कथित तौर पर जबरन खींचकर सड़क पर उतारा गया। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि शिकायतकर्ता के कपड़े फाड़ने की कोशिश की गई।
प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है कि इसके बाद कनॉट प्लेस पुलिस थाने के पास आरोपियों ने शिकायतकर्ता के चेहरे पर वार किया और उसके हाथों को पीठ के पीछे ले जाकर मोड़ा। आरोपियों ने उसके निजी अंगों और पेट के निचले हिस्से पर लात भी मारी तथा उसका फोन छीनने की कोशिश की। प्राथमिकी में आगे आरोप लगाया गया है, ‘‘जब उसने इसका विरोध किया, तो उन्होंने उसके गले में पहने दुपट्टे को कस दिया और उसे जान से मारने की धमकी दी।
आरोपियों ने मिलकर, एक-दूसरे को उकसाते हुए और मदद करते हुए दुपट्टे से गला कसकर शिकायतकर्ता की गर्दन पर चोट पहुंचाई, जिसके कारण उसे अस्पताल में उपचार कराना पड़ा। उन्होंने उसे अपमानित किया और मानसिक पीड़ा पहुंचाई। इस तरह उन्होंने उपरोक्त धाराओं के तहत अपराध किए।’’
पुलिस ने बताया कि बीएनएस के प्रावधानों के तहत घटना कहीं भी हुई हो, देश के किसी भी हिस्से में प्राथमिकी दर्ज की जा सकती है।
अधिकारियों ने बताया कि हालांकि, मामले की जांच दिल्ली के संबंधित पुलिस थाने को सौंप दी जाएगी, क्योंकि घटना वहीं हुई थी। शिकायतकर्ता ने इससे पहले आरोप लगाया था कि शिकायत देने के बावजूद दिल्ली पुलिस ने मामला दर्ज नहीं किया। केरल में यह प्राथमिकी ऐसे समय दर्ज की गई है, जब राज्य के सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने केरल राज्य परिवहन परियोजना (केएसटीपी) की सड़क निर्माण परियोजना में भ्रष्टाचार के आरोपों और इससे जुड़े एक मलेशियाई ठेकेदार की 2006 में हुई मौत की जांच शुरू की है।
उस समय ज्ञानेश कुमार राज्य में लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के सचिव के पद पर कार्यरत थे।

