दावा- जीतू पटवारी के काम आएगा ‘मोहन का नया प्लेन’:विधायक ने प्रभु श्रीराम को पहना दी अपने गले की माला; मंच पर सीएम-विजयवर्गीय की गुफ्तगू

दावा- जीतू पटवारी के काम आएगा ‘मोहन का नया प्लेन’:विधायक ने प्रभु श्रीराम को पहना दी अपने गले की माला; मंच पर सीएम-विजयवर्गीय की गुफ्तगू

मध्य प्रदेश की राजनीति, नौकरशाही और अन्य घटनाओं पर चुटीली और खरी बात का वीडियो (VIDEO) देखने के लिए ऊपर क्लिक करें। इन खबरों को आप पढ़ भी सकते हैं। ‘बात खरी है’ मंगलवार से रविवार तक हर सुबह 6 बजे से दैनिक भास्कर एप पर मिलेगा। सरकार के नए प्लेन पर विरोध भी, खुशी भी
मध्य प्रदेश में मोहन सरकार के नए प्लेन को लेकर कांग्रेस विरोध कर रही है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने प्लेन की जरूरत पर सवाल उठाते हुए सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि जब प्रदेश पर छह लाख करोड़ रुपए का कर्ज है, तो प्लेन की आवश्यकता क्या थी? लेकिन कांग्रेस के ही एक नेता ने इस मुद्दे पर ऐसा बयान दे दिया कि विरोध के बीच खुशी की झलक भी दिखने लगी। दरअसल, प्रदेश कांग्रेस के मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक ने नए प्लेन को लेकर खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने जो हवाई जहाज खरीदा है, वह चुनाव के बाद जीतू पटवारी के काम आएगा, क्योंकि अगली सरकार कांग्रेस की बनेगी। नायक के इस बयान को जीतू पटवारी के लिए सीएम पद की दावेदारी से जोड़कर भी देखा जा रहा है। इशारों-इशारों में उन्होंने पटवारी को अगली सरकार के मुख्यमंत्री के तौर पर पेश करने की कोशिश की। अब इससे पटवारी के मन में लड्डू फूटे या नहीं, यह तो वही जानें, लेकिन नायक ने अपनी तरफ से सियासी संकेत जरूर दे दिया। वैसे, अगली सरकार किसकी बनेगी, इसका फैसला तो चुनाव के नतीजे ही करेंगे। फिलहाल, कांग्रेस के भीतर से आए इस बयान ने नए प्लेन पर पार्टी के विरोध को लेकर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं। लोग तंज कस रहे हैं कि पहले यह तो तय कर लीजिए कि नए प्लेन का विरोध करना है या फिर उसी में अगली सरकार के सफर के सपने देखने हैं। अब दिखीं मोहन और कैलाश की नजदीकियां
कभी दूर जाना, कभी पास आना… वैसे तो ये एक गाने की लाइन है, लेकिन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के बीच की केमिस्ट्री इन दिनों कुछ ऐसी ही नजर आ रही है। कभी दूरियां दिखती हैं, तो कभी नजदीकियां। सीएम मोहन यादव के इंदौर के पिछले दो दौरों की बात करें, तो उनकी मुलाकात कैलाश विजयवर्गीय से नहीं हो पाई। इसे लेकर सियासी गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं भी होती रहीं। अब इंदौर में ही एक कार्यक्रम में जब दोनों नेता शामिल हुए, तो तस्वीर कुछ अलग नजर आई। दोनों के बीच मुलाकात हुई, बातचीत हुई और नजदीकियां भी दिखीं। दोनों नेता काफी देर तक गुफ्तगू करते नजर आए। इससे सियासी चर्चाओं को एक नया सिरा मिल गया। वैसे, राजनीति में हर तस्वीर के कई मायने निकाले जाते हैं। यहां जो दिखता है, जरूरी नहीं कि वही हो और जो होता है, वह हमेशा दिखाई दे, यह भी जरूरी नहीं। विधायक ने भगवान राम को पहना दी अपनी माला
कटनी से भाजपा विधायक संजय पाठक ने भी गजब ही कर दिया। खुद को पहनाई गई माला गले से उतारी और प्रभु श्रीराम को पहना दी। दरअसल, विधायक एक कार्यक्रम के मंच पर पहुंचे थे, जहां आयोजकों ने बड़ी-सी माला पहनाकर उनका स्वागत किया। इसके बाद विधायक ने माला अपने गले से उतारी और पास ही भगवान श्रीराम के किरदार में खड़े कलाकार को पहना दी। यानी जिस माला से विधायक जी का स्वागत हुआ था, उसी माला से उन्होंने प्रभु श्रीराम के स्वरूप का स्वागत कर दिया। इस दौरान उन्होंने पूरी श्रद्धा के साथ शीश भी नवाया। अब विधायक जी की इस श्रद्धा-भक्ति पर लोग चुटकी ले रहे हैं। सवाल उठा रहे हैं कि इसे भक्ति कहें या स्वागत में मिली माला का सदुपयोग। और अब अंदर की बात.. साहब का कामकाज में नहीं लग रहा मन
मध्य प्रदेश के एक विभाग में जंगलराज जैसी स्थिति है। इस विभाग के मुखिया यानी प्रमुख सचिव का कामकाज में मन नहीं लग रहा है। इससे न केवल यहां का कामकाज प्रभावित हो रहा है, बल्कि उनके अधीनस्थ अधिकारी-कर्मचारी भी परेशान हैं। सुना है कि प्रमुख सचिव अक्सर दोपहर बाद दफ्तर में मिलते ही नहीं हैं। मतलब, हाफ ड्यूटी करते हैं। हाल ही में इस विभाग में प्रमोशन और ट्रांसफर को लेकर एक बैठक बुलाई गई थी। इस बैठक में साहब मौजूद थे, लेकिन फर्स्ट हाफ के बाद वे चले गए और फिर लौटकर ही नहीं आए। ऐसे में बाकी अधिकारी-कर्मचारी मीटिंग रूम में बैठकर उनका इंतजार करते रह गए। यह भी सुना है कि प्रमुख सचिव का काम उनके पीए ही संभाल रहे हैं। तमाम डॉक भी वही देखते हैं। बताया जा रहा है कि साहब इस विभाग में आना ही नहीं चाहते थे। यही वजह है कि उनका यहां मन नहीं लग रहा है। वैसे, इस विभाग का दुर्भाग्य ही है कि इससे पहले वाले साहब भी नहले पर दहला थे। अभी वाले साहब कम से कम हाफ ड्यूटी तो करते हैं। पहले वाले तो पूरा-पूरा दिन ही दफ्तर नहीं आते थे। यहां तक कि सीएस की बैठक में भी शामिल नहीं होते थे। इनपुट सहयोग – विजय सिंह बघेल (भोपाल), संतोष शितोले (इंदौर), मोहम्मद एजाज (कटनी) ये भी पढ़ें –
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