दरभंगा- सुरक्षा बांध के किनारे से मिट्टी कटाई का विरोध:निर्माणाधीन AIIMS के लिए लाई जा रही थी, ग्रामीण बोले- 15 से 20 फीट तक खोद रहे

दरभंगा- सुरक्षा बांध के किनारे से मिट्टी कटाई का विरोध:निर्माणाधीन AIIMS के लिए लाई जा रही थी, ग्रामीण बोले- 15 से 20 फीट तक खोद रहे

दरभंगा के बहादुरपुर प्रखंड क्षेत्र के मनिहारी में सुरक्षा बांध के किनारे कथित रूप से हो रहे मिट्टी खनन के विरोध में शनिवार को दर्जनों स्थानीय युवक और ग्रामीण मौके पर जुट गए। ग्रामीणों का आरोप है कि मनिहारी में करीब 20 हाइवा लगाकर जेसीबी के माध्यम से बड़े पैमाने पर मिट्टी की कटाई की जा रही है। ग्रामीणों के विरोध के बावजूद मिट्टी कटाई का काम जारी रहने पर लोगों ने नाराजगी जताई। ग्रामीणों का कहना है कि जिस जगह से मिट्टी काटी जा रही है, उसके पास सुरक्षा बांध है। यह बांध दरभंगा शहर को बाढ़ से बचाने के लिए बनाया गया है। बांध के समीप से नदी भी गुजरती है। ऐसे में बांध के किनारे बड़े पैमाने पर मिट्टी काटे जाने से उसकी मजबूती प्रभावित होने की आशंका है। ग्रामीणों ने कहा कि यदि भविष्य में बाढ़ के दौरान बांध कमजोर होकर टूटता है तो दरभंगा शहर के बड़े हिस्से में पानी घुसने का खतरा पैदा हो सकता है। ग्रामीणों का आरोप है कि खेत से मिट्टी काटने के लिए निर्धारित सीमा से कई गुना अधिक गहराई तक खुदाई की जा रही है। सामान्य तौर पर निजी जमीन से मिट्टी कटाई की अनुमति सीमित गहराई तक ही होने की बात ग्रामीणों ने कही, लेकिन यहां 15 से 20 फीट तक मिट्टी काटे जाने का आरोप लगाया गया है। एम्स में मिट्टी भराई के लिए ले जाने का आरोप स्थानीय लोगों के अनुसार, मनिहारी से काटी जा रही मिट्टी को दरभंगा एम्स के निर्माण स्थल पर भराई के लिए हाइवा के माध्यम से ले जाया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि एम्स में मिट्टी भराई का काम जरूरी हो सकता है, लेकिन इसके लिए सुरक्षा बांध के किनारे से मिट्टी काटना उचित नहीं है। ग्रामीणों ने यह भी कहा कि एम्स में मिट्टी भराई को लेकर पहले ऐसी जानकारी सामने आई थी कि नदी के गाद अथवा निर्धारित स्थान से मिट्टी निकालकर भराई की जाएगी। इसके विपरीत बांध के किनारे से मिट्टी काटे जाने पर उन्होंने सवाल उठाया है। राधेश्याम यादव बोले- नियम सभी के लिए समान होना चाहिए स्थानीय निवासी राधेश्याम यादव ने कहा कि मिट्टी कटाई के नियम सभी के लिए समान होने चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि जब आम लोग अपनी निजी जमीन से अपने उपयोग के लिए मिट्टी काटते हैं तो प्रशासन रोक लगा देता है, लेकिन बड़े पैमाने पर हाइवा और जेसीबी लगाकर मिट्टी काटे जाने के बावजूद कार्रवाई नहीं हो रही है। उन्होंने कहा, “हम लोगों ने प्रशासन और खनन विभाग को इसकी सूचना दी है, लेकिन अब तक कोई अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचे हैं। मिट्टी कटाई लगातार जारी है। इस पर रोक लगनी चाहिए और नियम के विरुद्ध काम करने वालों पर कार्रवाई होनी चाहिए।” राधेश्याम यादव ने कहा कि यदि निजी खेत से मिट्टी कटाई की अनुमति है भी तो उसकी सीमा तय है। यहां 15 से 20 फीट तक खुदाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि बांध के किनारे इस तरह की गहरी खुदाई भविष्य में बड़ी समस्या पैदा कर सकती है। राजेश बोले- बांध टूटा तो शहर में बाढ़ की जिम्मेदारी कौन लेगा स्थानीय युवक राजेश कुमार यादव ने आरोप लगाया कि बिहार में बारिश के मौसम में खनन और मिट्टी कटाई को लेकर निर्धारित नियमों के बावजूद मनिहारी में काम जारी है। उन्होंने कहा कि 15 जून से 15 अक्टूबर तक मिट्टी खनन पर रोक होने की बात कही जाती है, ऐसे में इस अवधि में हो रही मिट्टी कटाई की अनुमति और वैधता स्पष्ट होनी चाहिए। ग्रामीण बोले- राज्यसभा के रिश्तेदार हैं ठेकेदार ग्रामीण राजेश ने कहा कि एक राज्यसभा सांसद हैं। उनके रिश्तेदार यहां के ठेकेदार हैं। खनन विभाग के अधिकारियों को कई बार फोन कर मामले की जानकारी दी गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। उनके अनुसार कभी अधिकारी के मीटिंग में होने तो कभी पर्याप्त पुलिस बल उपलब्ध नहीं होने की बात कही जाती है। उन्होंने कहा कि यदि संबंधित ठेकेदार के पास खनन की अनुमति, माइनिंग प्लान या अन्य आधिकारिक दस्तावेज हैं तो उसे सार्वजनिक किया जाना चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि किस अनुमति के आधार पर बांध के किनारे से मिट्टी काटी जा रही है। प्रशासनिक मिलीभगत का भी लगाया आरोप ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि लगातार शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं होने से प्रशासनिक स्तर पर मिलीभगत की आशंका पैदा हो रही है। ग्रामीणों ने मांग की कि खनन विभाग और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंचकर मिट्टी कटाई की जांच करे। साथ ही यह भी जांच हो कि मिट्टी काटने और उसे एम्स में भराई के लिए ले जाने की अनुमति किसके द्वारा दी गई है। ग्रामीणों का कहना है कि दरभंगा शहर पहले से ही जलजमाव की समस्या से जूझता है। ऐसे में यदि बाढ़ के समय सुरक्षा बांध को नुकसान पहुंचा तो स्थिति गंभीर हो सकती है। उन्होंने तत्काल मिट्टी कटाई रोकने और बांध की सुरक्षा की जांच कराने की मांग की है। दरभंगा के बहादुरपुर प्रखंड क्षेत्र के मनिहारी में सुरक्षा बांध के किनारे कथित रूप से हो रहे मिट्टी खनन के विरोध में शनिवार को दर्जनों स्थानीय युवक और ग्रामीण मौके पर जुट गए। ग्रामीणों का आरोप है कि मनिहारी में करीब 20 हाइवा लगाकर जेसीबी के माध्यम से बड़े पैमाने पर मिट्टी की कटाई की जा रही है। ग्रामीणों के विरोध के बावजूद मिट्टी कटाई का काम जारी रहने पर लोगों ने नाराजगी जताई। ग्रामीणों का कहना है कि जिस जगह से मिट्टी काटी जा रही है, उसके पास सुरक्षा बांध है। यह बांध दरभंगा शहर को बाढ़ से बचाने के लिए बनाया गया है। बांध के समीप से नदी भी गुजरती है। ऐसे में बांध के किनारे बड़े पैमाने पर मिट्टी काटे जाने से उसकी मजबूती प्रभावित होने की आशंका है। ग्रामीणों ने कहा कि यदि भविष्य में बाढ़ के दौरान बांध कमजोर होकर टूटता है तो दरभंगा शहर के बड़े हिस्से में पानी घुसने का खतरा पैदा हो सकता है। ग्रामीणों का आरोप है कि खेत से मिट्टी काटने के लिए निर्धारित सीमा से कई गुना अधिक गहराई तक खुदाई की जा रही है। सामान्य तौर पर निजी जमीन से मिट्टी कटाई की अनुमति सीमित गहराई तक ही होने की बात ग्रामीणों ने कही, लेकिन यहां 15 से 20 फीट तक मिट्टी काटे जाने का आरोप लगाया गया है। एम्स में मिट्टी भराई के लिए ले जाने का आरोप स्थानीय लोगों के अनुसार, मनिहारी से काटी जा रही मिट्टी को दरभंगा एम्स के निर्माण स्थल पर भराई के लिए हाइवा के माध्यम से ले जाया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि एम्स में मिट्टी भराई का काम जरूरी हो सकता है, लेकिन इसके लिए सुरक्षा बांध के किनारे से मिट्टी काटना उचित नहीं है। ग्रामीणों ने यह भी कहा कि एम्स में मिट्टी भराई को लेकर पहले ऐसी जानकारी सामने आई थी कि नदी के गाद अथवा निर्धारित स्थान से मिट्टी निकालकर भराई की जाएगी। इसके विपरीत बांध के किनारे से मिट्टी काटे जाने पर उन्होंने सवाल उठाया है। राधेश्याम यादव बोले- नियम सभी के लिए समान होना चाहिए स्थानीय निवासी राधेश्याम यादव ने कहा कि मिट्टी कटाई के नियम सभी के लिए समान होने चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि जब आम लोग अपनी निजी जमीन से अपने उपयोग के लिए मिट्टी काटते हैं तो प्रशासन रोक लगा देता है, लेकिन बड़े पैमाने पर हाइवा और जेसीबी लगाकर मिट्टी काटे जाने के बावजूद कार्रवाई नहीं हो रही है। उन्होंने कहा, “हम लोगों ने प्रशासन और खनन विभाग को इसकी सूचना दी है, लेकिन अब तक कोई अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचे हैं। मिट्टी कटाई लगातार जारी है। इस पर रोक लगनी चाहिए और नियम के विरुद्ध काम करने वालों पर कार्रवाई होनी चाहिए।” राधेश्याम यादव ने कहा कि यदि निजी खेत से मिट्टी कटाई की अनुमति है भी तो उसकी सीमा तय है। यहां 15 से 20 फीट तक खुदाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि बांध के किनारे इस तरह की गहरी खुदाई भविष्य में बड़ी समस्या पैदा कर सकती है। राजेश बोले- बांध टूटा तो शहर में बाढ़ की जिम्मेदारी कौन लेगा स्थानीय युवक राजेश कुमार यादव ने आरोप लगाया कि बिहार में बारिश के मौसम में खनन और मिट्टी कटाई को लेकर निर्धारित नियमों के बावजूद मनिहारी में काम जारी है। उन्होंने कहा कि 15 जून से 15 अक्टूबर तक मिट्टी खनन पर रोक होने की बात कही जाती है, ऐसे में इस अवधि में हो रही मिट्टी कटाई की अनुमति और वैधता स्पष्ट होनी चाहिए। ग्रामीण बोले- राज्यसभा के रिश्तेदार हैं ठेकेदार ग्रामीण राजेश ने कहा कि एक राज्यसभा सांसद हैं। उनके रिश्तेदार यहां के ठेकेदार हैं। खनन विभाग के अधिकारियों को कई बार फोन कर मामले की जानकारी दी गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। उनके अनुसार कभी अधिकारी के मीटिंग में होने तो कभी पर्याप्त पुलिस बल उपलब्ध नहीं होने की बात कही जाती है। उन्होंने कहा कि यदि संबंधित ठेकेदार के पास खनन की अनुमति, माइनिंग प्लान या अन्य आधिकारिक दस्तावेज हैं तो उसे सार्वजनिक किया जाना चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि किस अनुमति के आधार पर बांध के किनारे से मिट्टी काटी जा रही है। प्रशासनिक मिलीभगत का भी लगाया आरोप ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि लगातार शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं होने से प्रशासनिक स्तर पर मिलीभगत की आशंका पैदा हो रही है। ग्रामीणों ने मांग की कि खनन विभाग और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंचकर मिट्टी कटाई की जांच करे। साथ ही यह भी जांच हो कि मिट्टी काटने और उसे एम्स में भराई के लिए ले जाने की अनुमति किसके द्वारा दी गई है। ग्रामीणों का कहना है कि दरभंगा शहर पहले से ही जलजमाव की समस्या से जूझता है। ऐसे में यदि बाढ़ के समय सुरक्षा बांध को नुकसान पहुंचा तो स्थिति गंभीर हो सकती है। उन्होंने तत्काल मिट्टी कटाई रोकने और बांध की सुरक्षा की जांच कराने की मांग की है।  

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