दरभंगा- डिजिटल अरेस्ट कर बुजुर्ग से 35.74 लाख की ठगी:6 महीने में साइबर पुलिस ने पूरी रकम कराई वापस; अधिकारी बनकर शातिर ने किया था फोन

दरभंगा- डिजिटल अरेस्ट कर बुजुर्ग से 35.74 लाख की ठगी:6 महीने में साइबर पुलिस ने पूरी रकम कराई वापस; अधिकारी बनकर शातिर ने किया था फोन

दरभंगा में रिटायर्ड सरकारी कर्मचारी से 35.74 लाख की ठगी मामले में साइबर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। मामले सामने आने के छह महीने के अंदर साइबर पुलिस की तत्परता से ठगी की पूरी रकम वापस करा ली गई है। पुलिस के अनुसार, दरभंगा जिले में साइबर ठगी की इतनी बड़ी रकम वापस कराने का यह पहला मामला है। पीड़ित की पहचान विश्वविद्यालय थाना क्षेत्र के लक्ष्मी सागर गंगवाड़ा निवासी 73 वर्षीय रिटायर्ड सरकारी कर्मचारी राम बहादुर कामत के तौर पर हुई। अब जानिए क्या है पूरा मामला प्रभारी सदर एसडीपीओ-1 एसके सुमन ने बताया कि साइबर अपराधियों ने राम बहादुर कामत को फोन कर खुद को मुंबई साइबर क्राइम का अधिकारी बताया। अपराधियों ने कहा कि उनके आधार कार्ड का इस्तेमाल कर एक बैंक खाता खोला गया है, जिसमें अवैध रूप से रुपए का लेन-देन हुआ है। इसके बाद उन्हें वीडियो कॉल के माध्यम से डिजिटल अरेस्ट कर दिया गया। कुछ देर बाद एक अन्य व्यक्ति ने खुद को केनरा बैंक का अधिकारी बताया। उसने कहा कि मामले की जांच के लिए उनके बैंक खाते में जमा 35 लाख 74 हजार रुपए को दूसरे खाते में ट्रांसफर करना होगा। साथ ही भरोसा दिया गया कि जांच पूरी होने के एक सप्ताह बाद पूरी रकम वापस कर दी जाएगी। साइबर अपराधियों के झांसे में आकर राम बहादुर कामत ने अपने खाते से 35 लाख 74 हजार रुपए बताए गए खाते में ट्रांसफर कर दिए। निर्धारित समय के बाद रकम वापस नहीं मिली तो उन्हें साइबर ठगी का एहसास हुआ। इसके बाद उन्होंने 12 फरवरी 2026 को साइबर थाना में कांड संख्या 14/2026 दर्ज कराया। 1930 पर शिकायत कर रकम कराई होल्ड साइबर थाना के इंस्पेक्टर रंजीत शर्मा ने तत्काल कार्रवाई शुरू की। पुलिस ने साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराकर ठगी की रकम को होल्ड कराया। तकनीकी जांच में पता चला कि ठगी की रकम ओडिशा के भुवनेश्वर स्थित एक संस्था के यस बैंक खाते में ट्रांसफर हुई थी। इसके बाद एसएसपी के निर्देश पर पुलिस टीम ने तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर मुंबई और फिर भुवनेश्वर जाकर मामले की जांच की। पुलिस की कार्रवाई और न्यायालय की प्रक्रिया पूरी होने के बाद 35 लाख 74 हजार रुपये की पूरी रकम राम बहादुर कामत के बैंक खाते में वापस करा दी गई। डिजिटल अरेस्ट से बचने की अपील पुलिस ने लोगों से अपील की है कि कोई भी व्यक्ति फोन या वीडियो कॉल पर खुद को पुलिस, साइबर क्राइम, बैंक, सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर डराए और किसी खाते में रुपए ट्रांसफर करने को कहे तो ऐसा नहीं करें। पुलिस ने स्पष्ट किया कि डिजिटल अरेस्ट के नाम पर किसी व्यक्ति को पैसे ट्रांसफर करने के लिए बाध्य नहीं किया जाता। साइबर ठगी होने पर पीड़ित तत्काल 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं और नजदीकी साइबर थाना या पुलिस से संपर्क करें। पुलिस का कहना है कि ठगी की सूचना जितनी जल्दी मिलेगी, रकम को होल्ड कराकर वापस कराने की संभावना उतनी ही अधिक रहेगी। दरभंगा में रिटायर्ड सरकारी कर्मचारी से 35.74 लाख की ठगी मामले में साइबर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। मामले सामने आने के छह महीने के अंदर साइबर पुलिस की तत्परता से ठगी की पूरी रकम वापस करा ली गई है। पुलिस के अनुसार, दरभंगा जिले में साइबर ठगी की इतनी बड़ी रकम वापस कराने का यह पहला मामला है। पीड़ित की पहचान विश्वविद्यालय थाना क्षेत्र के लक्ष्मी सागर गंगवाड़ा निवासी 73 वर्षीय रिटायर्ड सरकारी कर्मचारी राम बहादुर कामत के तौर पर हुई। अब जानिए क्या है पूरा मामला प्रभारी सदर एसडीपीओ-1 एसके सुमन ने बताया कि साइबर अपराधियों ने राम बहादुर कामत को फोन कर खुद को मुंबई साइबर क्राइम का अधिकारी बताया। अपराधियों ने कहा कि उनके आधार कार्ड का इस्तेमाल कर एक बैंक खाता खोला गया है, जिसमें अवैध रूप से रुपए का लेन-देन हुआ है। इसके बाद उन्हें वीडियो कॉल के माध्यम से डिजिटल अरेस्ट कर दिया गया। कुछ देर बाद एक अन्य व्यक्ति ने खुद को केनरा बैंक का अधिकारी बताया। उसने कहा कि मामले की जांच के लिए उनके बैंक खाते में जमा 35 लाख 74 हजार रुपए को दूसरे खाते में ट्रांसफर करना होगा। साथ ही भरोसा दिया गया कि जांच पूरी होने के एक सप्ताह बाद पूरी रकम वापस कर दी जाएगी। साइबर अपराधियों के झांसे में आकर राम बहादुर कामत ने अपने खाते से 35 लाख 74 हजार रुपए बताए गए खाते में ट्रांसफर कर दिए। निर्धारित समय के बाद रकम वापस नहीं मिली तो उन्हें साइबर ठगी का एहसास हुआ। इसके बाद उन्होंने 12 फरवरी 2026 को साइबर थाना में कांड संख्या 14/2026 दर्ज कराया। 1930 पर शिकायत कर रकम कराई होल्ड साइबर थाना के इंस्पेक्टर रंजीत शर्मा ने तत्काल कार्रवाई शुरू की। पुलिस ने साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराकर ठगी की रकम को होल्ड कराया। तकनीकी जांच में पता चला कि ठगी की रकम ओडिशा के भुवनेश्वर स्थित एक संस्था के यस बैंक खाते में ट्रांसफर हुई थी। इसके बाद एसएसपी के निर्देश पर पुलिस टीम ने तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर मुंबई और फिर भुवनेश्वर जाकर मामले की जांच की। पुलिस की कार्रवाई और न्यायालय की प्रक्रिया पूरी होने के बाद 35 लाख 74 हजार रुपये की पूरी रकम राम बहादुर कामत के बैंक खाते में वापस करा दी गई। डिजिटल अरेस्ट से बचने की अपील पुलिस ने लोगों से अपील की है कि कोई भी व्यक्ति फोन या वीडियो कॉल पर खुद को पुलिस, साइबर क्राइम, बैंक, सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर डराए और किसी खाते में रुपए ट्रांसफर करने को कहे तो ऐसा नहीं करें। पुलिस ने स्पष्ट किया कि डिजिटल अरेस्ट के नाम पर किसी व्यक्ति को पैसे ट्रांसफर करने के लिए बाध्य नहीं किया जाता। साइबर ठगी होने पर पीड़ित तत्काल 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं और नजदीकी साइबर थाना या पुलिस से संपर्क करें। पुलिस का कहना है कि ठगी की सूचना जितनी जल्दी मिलेगी, रकम को होल्ड कराकर वापस कराने की संभावना उतनी ही अधिक रहेगी।  

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