रेलवे की ‘वन स्टेशन वन प्रोडक्ट’ (OSOP) योजना के तहत किशनगंज जिले के तीन रेलवे स्टेशनों का चयन किया गया है। इस पहल से स्थानीय उत्पादों को रेलवे स्टेशनों पर बिक्री का अवसर मिलेगा, जिससे कारीगरों, किसानों, स्वयं सहायता समूहों और सूक्ष्म उद्यमियों को नया बाजार उपलब्ध होगा। योजना के अंतर्गत, किशनगंज रेलवे स्टेशन पर जिले के पारंपरिक व्यंजन लिट्टी-चोखा की बिक्री होगी। गलगलिया रेलवे स्टेशन पर ताजी सब्जियां उपलब्ध होंगी, जबकि ठाकुरगंज रेलवे स्टेशन पर हस्तशिल्प सामग्री बेची जाएगी। इन उत्पादों के लिए रेलवे स्टेशनों पर विशेष स्टॉल लगाए जाएंगे। खाद्य संस्कृति को मिलेगा बढ़ावा किशनगंज स्टेशन पर लिट्टी-चोखा को शामिल करने से जिले की खाद्य संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा। इसी तरह, गलगलिया स्टेशन पर ताजी सब्जियों की बिक्री से स्थानीय किसानों को अपने उत्पाद सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचाने का सीधा अवसर प्राप्त होगा। ठाकुरगंज स्टेशन पर हस्तशिल्प उत्पादों की बिक्री से स्थानीय शिल्पकारों को अपने हुनर को व्यापक बाजार तक पहुंचाने में मदद मिलेगी। स्टॉल आवंटन के लिए कारीगर एवं बुनकर पहचान-पत्र धारक, जनजातीय शिल्पकार, पंजीकृत स्वयं सहायता समूह और एमएसएमई के तहत पंजीकृत सूक्ष्म उद्यम पात्र होंगे। लोगों को रोजगार के नए अवसर मिलने की उम्मीद इस योजना से स्थानीय स्तर पर उत्पादन करने वाले लोगों को रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर मिलने की उम्मीद है। जिला प्रशासन ने पात्र कारीगरों, बुनकरों, स्वयं सहायता समूहों और सूक्ष्म उद्यमियों से इस योजना का लाभ उठाने की अपील की है। प्रशासन का मानना है कि रेलवे स्टेशनों पर स्थानीय उत्पादों की बिक्री से न केवल उत्पादकों की आय बढ़ेगी, बल्कि जिले की पहचान और स्थानीय संस्कृति को भी राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी। रेलवे की यह पहल स्थानीय उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। रेलवे की ‘वन स्टेशन वन प्रोडक्ट’ (OSOP) योजना के तहत किशनगंज जिले के तीन रेलवे स्टेशनों का चयन किया गया है। इस पहल से स्थानीय उत्पादों को रेलवे स्टेशनों पर बिक्री का अवसर मिलेगा, जिससे कारीगरों, किसानों, स्वयं सहायता समूहों और सूक्ष्म उद्यमियों को नया बाजार उपलब्ध होगा। योजना के अंतर्गत, किशनगंज रेलवे स्टेशन पर जिले के पारंपरिक व्यंजन लिट्टी-चोखा की बिक्री होगी। गलगलिया रेलवे स्टेशन पर ताजी सब्जियां उपलब्ध होंगी, जबकि ठाकुरगंज रेलवे स्टेशन पर हस्तशिल्प सामग्री बेची जाएगी। इन उत्पादों के लिए रेलवे स्टेशनों पर विशेष स्टॉल लगाए जाएंगे। खाद्य संस्कृति को मिलेगा बढ़ावा किशनगंज स्टेशन पर लिट्टी-चोखा को शामिल करने से जिले की खाद्य संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा। इसी तरह, गलगलिया स्टेशन पर ताजी सब्जियों की बिक्री से स्थानीय किसानों को अपने उत्पाद सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचाने का सीधा अवसर प्राप्त होगा। ठाकुरगंज स्टेशन पर हस्तशिल्प उत्पादों की बिक्री से स्थानीय शिल्पकारों को अपने हुनर को व्यापक बाजार तक पहुंचाने में मदद मिलेगी। स्टॉल आवंटन के लिए कारीगर एवं बुनकर पहचान-पत्र धारक, जनजातीय शिल्पकार, पंजीकृत स्वयं सहायता समूह और एमएसएमई के तहत पंजीकृत सूक्ष्म उद्यम पात्र होंगे। लोगों को रोजगार के नए अवसर मिलने की उम्मीद इस योजना से स्थानीय स्तर पर उत्पादन करने वाले लोगों को रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर मिलने की उम्मीद है। जिला प्रशासन ने पात्र कारीगरों, बुनकरों, स्वयं सहायता समूहों और सूक्ष्म उद्यमियों से इस योजना का लाभ उठाने की अपील की है। प्रशासन का मानना है कि रेलवे स्टेशनों पर स्थानीय उत्पादों की बिक्री से न केवल उत्पादकों की आय बढ़ेगी, बल्कि जिले की पहचान और स्थानीय संस्कृति को भी राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी। रेलवे की यह पहल स्थानीय उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

