दरभंगा के 40 थानों में चाइल्ड हेल्प डेस्क का शुभारंभ:डीएम-एसएसपी ने फीता काटकर किया उद्घाटन; CWPO और महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती

दरभंगा के 40 थानों में चाइल्ड हेल्प डेस्क का शुभारंभ:डीएम-एसएसपी ने फीता काटकर किया उद्घाटन; CWPO और महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती

दरभंगा जिले में गांधी जयंती के अवसर पर शुक्रवार को सभी 40 थानों में चाइल्ड हेल्प डेस्क-चाइल्ड कॉर्नर की शुरुआत की गई। बच्चों को थाने में सुरक्षित और बालमित्रवत वातावरण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से यह व्यवस्था शुरू की गई है। लहेरियासराय थाना में एसएसपी जगुनाथ रेड्डी जला रेड्डी और महिला थाना में ग्रामीण एसपी साक्षी कुमारी ने उद्घाटन किया। वहीं कमतौल थाना परिसर में एसडीपीओ-2 एसके सुमन, मनिगाछी थाना में बेनीपुर एसडीपीओ और बिरौल थाना में एसडीपीओ प्रभाकर तिवारी ने इसका शुभारंभ किया। महिला पुलिसकर्मियों की भी तैनाती जिलाधिकारी कौशल कुमार, एसएसपी, सिटी एसपी अशोक कुमार चौधरी सहित अन्य पुलिस पदाधिकारियों ने अलग-अलग थानों का निरीक्षण कर व्यवस्था का जायजा लिया। पुलिस महानिदेशक, कमजोर वर्ग प्रभाग, अपराध अनुसंधान विभाग, बिहार, पटना और राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) के दिशा-निर्देशों के आलोक में जिले के सभी थानों में चाइल्ड हेल्प डेस्क-चाइल्ड कॉर्नर स्थापित किए गए हैं। सभी थानों में बाल कल्याण पुलिस पदाधिकारी (CWPO) और महिला पुलिस कर्मियों की प्रतिनियुक्ति भी की गई है। ‘बच्चों को थाने में नहीं लगेगा डर’ चाइल्ड हेल्प डेस्क की व्यवस्था का उद्देश्य थाने पहुंचने वाले बच्चों को सहज और सुरक्षित माहौल देना है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि सामान्य तौर पर बच्चे थाने में आने से डरते हैं। ऐसे में चाइल्ड कॉर्नर के लिए अलग कमरे में बच्चों के अनुकूल माहौल तैयार किया गया है। कमरों की दीवारों पर आकर्षक कलाकृतियां और पेंटिंग बनाई गई हैं, ताकि बच्चे खुद को सहज महसूस कर सकें। बच्चों से संवाद किया जाएगा महिला थाना में थानाध्यक्ष पुष्पलता कुमारी और दरोगा ज्योति कुमारी ने स्वयं बड़े कमरे की दीवारों पर पेंटिंग-कलाकृतियां बनाकर चाइल्ड कॉर्नर को बच्चों के अनुकूल स्वरूप दिया। पुलिस का कहना है कि यदि कोई बच्चा घटना के बाद डर या तनाव की स्थिति में थाना पहुंचता है, तो उसे पहले चाइल्ड हेल्प डेस्क पर बैठाकर सहज किया जाएगा। इसके बाद बाल कल्याण पुलिस पदाधिकारी और महिला पुलिस कर्मी उससे संवाद कर उसकी समस्या समझेंगे। इन पुलिसकर्मियों को सौंपी गई जिम्मेदारी लहेरियासराय थाना में पूजा कुमारी, विश्वविद्यालय थाना में विपिन कुमार, बहादुरपुर में दीपशिखा कुमारी, कोतवाली में माधुरी कुमारी, नगर थाना में राजीव लाल पंडित और बेंता में शशि भूषण प्रसाद समेत अन्य थानों में भी चाइल्ड हेल्प डेस्क के लिए पुलिस पदाधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई है।
शोषण, बाल श्रम और बाल विवाह से सुरक्षा पर जोर चाइल्ड हेल्प डेस्क-चाइल्ड कॉर्नर के माध्यम से जरूरतमंद बच्चों को संबंधित सेवाओं और संस्थानों से जोड़ने, संकट में फंसे बच्चों को तत्काल सहायता उपलब्ध कराने तथा बाल शोषण, बाल श्रम और बाल विवाह जैसी समस्याओं से बच्चों की सुरक्षा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा बच्चों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने, बालिकाओं से संवेदनशील तरीके से संवाद स्थापित करने और उनकी समस्याओं का समाधान करने की जिम्मेदारी भी बाल कल्याण पुलिस पदाधिकारी एवं महिला पुलिस कर्मियों को दी गई है। पुलिस के अनुसार चाइल्ड हेल्प डेस्क पर प्राप्त शिकायतों पर समयबद्ध कार्रवाई की जाएगी। बच्चों के अभिभावकों या परिजनों की ओर से सहायता के लिए फोन आने पर भी तत्काल आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है। इससे बच्चों से जुड़ी शिकायतों और घटनाओं में पुलिस की त्वरित एवं संवेदनशील कार्रवाई सुनिश्चित करने की कोशिश की गई है। दरभंगा जिले में गांधी जयंती के अवसर पर शुक्रवार को सभी 40 थानों में चाइल्ड हेल्प डेस्क-चाइल्ड कॉर्नर की शुरुआत की गई। बच्चों को थाने में सुरक्षित और बालमित्रवत वातावरण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से यह व्यवस्था शुरू की गई है। लहेरियासराय थाना में एसएसपी जगुनाथ रेड्डी जला रेड्डी और महिला थाना में ग्रामीण एसपी साक्षी कुमारी ने उद्घाटन किया। वहीं कमतौल थाना परिसर में एसडीपीओ-2 एसके सुमन, मनिगाछी थाना में बेनीपुर एसडीपीओ और बिरौल थाना में एसडीपीओ प्रभाकर तिवारी ने इसका शुभारंभ किया। महिला पुलिसकर्मियों की भी तैनाती जिलाधिकारी कौशल कुमार, एसएसपी, सिटी एसपी अशोक कुमार चौधरी सहित अन्य पुलिस पदाधिकारियों ने अलग-अलग थानों का निरीक्षण कर व्यवस्था का जायजा लिया। पुलिस महानिदेशक, कमजोर वर्ग प्रभाग, अपराध अनुसंधान विभाग, बिहार, पटना और राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) के दिशा-निर्देशों के आलोक में जिले के सभी थानों में चाइल्ड हेल्प डेस्क-चाइल्ड कॉर्नर स्थापित किए गए हैं। सभी थानों में बाल कल्याण पुलिस पदाधिकारी (CWPO) और महिला पुलिस कर्मियों की प्रतिनियुक्ति भी की गई है। ‘बच्चों को थाने में नहीं लगेगा डर’ चाइल्ड हेल्प डेस्क की व्यवस्था का उद्देश्य थाने पहुंचने वाले बच्चों को सहज और सुरक्षित माहौल देना है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि सामान्य तौर पर बच्चे थाने में आने से डरते हैं। ऐसे में चाइल्ड कॉर्नर के लिए अलग कमरे में बच्चों के अनुकूल माहौल तैयार किया गया है। कमरों की दीवारों पर आकर्षक कलाकृतियां और पेंटिंग बनाई गई हैं, ताकि बच्चे खुद को सहज महसूस कर सकें। बच्चों से संवाद किया जाएगा महिला थाना में थानाध्यक्ष पुष्पलता कुमारी और दरोगा ज्योति कुमारी ने स्वयं बड़े कमरे की दीवारों पर पेंटिंग-कलाकृतियां बनाकर चाइल्ड कॉर्नर को बच्चों के अनुकूल स्वरूप दिया। पुलिस का कहना है कि यदि कोई बच्चा घटना के बाद डर या तनाव की स्थिति में थाना पहुंचता है, तो उसे पहले चाइल्ड हेल्प डेस्क पर बैठाकर सहज किया जाएगा। इसके बाद बाल कल्याण पुलिस पदाधिकारी और महिला पुलिस कर्मी उससे संवाद कर उसकी समस्या समझेंगे। इन पुलिसकर्मियों को सौंपी गई जिम्मेदारी लहेरियासराय थाना में पूजा कुमारी, विश्वविद्यालय थाना में विपिन कुमार, बहादुरपुर में दीपशिखा कुमारी, कोतवाली में माधुरी कुमारी, नगर थाना में राजीव लाल पंडित और बेंता में शशि भूषण प्रसाद समेत अन्य थानों में भी चाइल्ड हेल्प डेस्क के लिए पुलिस पदाधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई है।
शोषण, बाल श्रम और बाल विवाह से सुरक्षा पर जोर चाइल्ड हेल्प डेस्क-चाइल्ड कॉर्नर के माध्यम से जरूरतमंद बच्चों को संबंधित सेवाओं और संस्थानों से जोड़ने, संकट में फंसे बच्चों को तत्काल सहायता उपलब्ध कराने तथा बाल शोषण, बाल श्रम और बाल विवाह जैसी समस्याओं से बच्चों की सुरक्षा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा बच्चों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने, बालिकाओं से संवेदनशील तरीके से संवाद स्थापित करने और उनकी समस्याओं का समाधान करने की जिम्मेदारी भी बाल कल्याण पुलिस पदाधिकारी एवं महिला पुलिस कर्मियों को दी गई है। पुलिस के अनुसार चाइल्ड हेल्प डेस्क पर प्राप्त शिकायतों पर समयबद्ध कार्रवाई की जाएगी। बच्चों के अभिभावकों या परिजनों की ओर से सहायता के लिए फोन आने पर भी तत्काल आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है। इससे बच्चों से जुड़ी शिकायतों और घटनाओं में पुलिस की त्वरित एवं संवेदनशील कार्रवाई सुनिश्चित करने की कोशिश की गई है।  

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