दरभंगा के लहेरियासराय में हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी स्थित महावीर मंदिर के पीछे किए जा रहे पक्के निर्माण को हटाने के लिए शनिवार को जिला प्रशासन की टीम बड़ी संख्या में पुलिस बल और जेसीबी के साथ पहुंची। जेसीबी से निर्माण तोड़ने की कार्रवाई शुरू होते ही स्थानीय लोग जुट गए और इसका विरोध करने लगे। लोगों के विरोध के बाद प्रशासन की टीम को कार्रवाई रोककर वापस लौटना पड़ा। हालांकि, बिहार राज्य आवास बोर्ड के कार्यपालक अभियंता सुजीत कुमार ने स्पष्ट किया कि मंदिर को नहीं तोड़ा गया है, बल्कि मंदिर के पीछे किए जा रहे अवैध पक्के निर्माण को हटाने की कार्रवाई की गई है। लोग बोले- कॉलोनी में पूजा-पाठ के लिए कोई बड़ा मंदिर नहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में करीब पांच हजार से अधिक लोग रहते हैं, जिनमें बड़ी संख्या हिंदू परिवारों की है। कॉलोनी में पूजा-पाठ के लिए कोई बड़ा मंदिर नहीं है। महावीर मंदिर में ही लोग पूजा करने के साथ बैठकर धार्मिक गतिविधियां करते हैं। लोगों ने प्रशासन की कार्रवाई का विरोध करते हुए कहा कि मंदिर उनके लिए आस्था का केंद्र है। उन्होंने हाउसिंग बोर्ड से मंदिर के लिए स्थायी रूप से करीब छह कट्ठा जमीन उपलब्ध कराने की मांग की। सांसद गोपाल जी ठाकुर ने किया था शिलान्यास स्थानीय लोगों ने बताया कि महावीर मंदिर का शिलान्यास दरभंगा सांसद गोपाल जी ठाकुर ने किया था। उनके स्तर से मंदिर स्थल पर मिट्टी भराई के लिए करीब चार लाख रुपये की राशि भी उपलब्ध कराई गई थी। स्थानीय लोगों के अनुसार करीब डेढ़ वर्ष से घर-घर से चंदा एकत्र कर मंदिर का निर्माण कराया जा रहा है। निर्माण अब पक्की ढलाई तक पहुंच गया था। स्थानीय रामनाथ झा ने बताया कि जिस जमीन पर मंदिर बना है, वह पहले कबीलपुर के ‘माल बाबू’ परिवार की बताई जाती है। सरकार ने जमीन का अधिग्रहण किया था, लेकिन परिवार के लोगों ने अब तक मुआवजा नहीं लिया है। उन्होंने कहा कि इसी जगह पर उस परिवार के लोग आज भी ध्वजारोहण करते हैं। बाद में यहां छोटा मंदिर बनाया गया और श्रीमद्भागवत कथा का भी आयोजन हुआ। रामनाथ झा ने कहा कि मंदिर निर्माण के दौरान प्रशासन की ओर से पहले कोई स्पष्ट सूचना नहीं दी गई। यदि पहले बताया जाता कि निर्माण गलत है तो लोग प्रशासन से बात करते। उन्होंने कहा कि कॉलोनी में मंदिर की जरूरत है और हाउसिंग बोर्ड को मंदिर के लिए जमीन आवंटित करनी चाहिए। ‘घर-घर से चंदा कर बनाया जा रहा मंदिर’ स्थानीय आशा सिंह ने कहा कि हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में करीब पांच हजार लोगों की आबादी है और यहां कोई मंदिर नहीं है। एक छोटे से मंदिर को भी तोड़ने के लिए प्रशासन के पहुंचने पर लोगों ने विरोध किया। उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों ने आपस में बैठक कर स्थायी मंदिर बनाने का निर्णय लिया था। इसके बाद घर-घर से चंदा जुटाकर करीब 10 लाख रुपये की लागत से पक्का निर्माण कराया जा रहा है। आशा सिंह ने आरोप लगाया कि कॉलोनी में अन्य अनधिकृत रूप से लोग रह रहे हैं, लेकिन उन पर कार्रवाई नहीं की जाती। उन्होंने कहा कि मंदिर निर्माण का काम लंबे समय से चल रहा था और अब तक किसी स्तर से निर्माण रोकने की कार्रवाई नहीं हुई। अचानक जेसीबी और पुलिस बल के साथ पहुंचकर निर्माण तोड़ने का प्रयास किया गया। उन्होंने कहा कि प्रशासन की कार्रवाई का लोग विरोध करेंगे। मंदिर निर्माण को लेकर स्थानीय लोगों में आस्था का विषय होने के कारण काफी नाराजगी है। उन्होंने यह भी कहा कि मंदिर के लिए हाउसिंग बोर्ड की ओर से जमीन उपलब्ध कराई जानी चाहिए। हाउसिंग बोर्ड ने कहा- मंदिर नहीं, पीछे का अवैध निर्माण तोड़ा जा रहा बिहार राज्य आवास बोर्ड के कार्यपालक अभियंता सुजीत कुमार ने कहा कि हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में पार्क के लिए जमीन चिन्हित की गई है। इसी प्रस्तावित पार्क की जमीन पर महावीर मंदिर के पीछे पक्का निर्माण किया जा रहा था। जिला प्रशासन के निर्देश पर उसी निर्माण को हटाने के लिए कार्रवाई की गई। उन्होंने कहा कि महावीर मंदिर को नहीं तोड़ा गया है। मंदिर के पीछे किए जा रहे अवैध निर्माण को हटाया गया है। अधिकारियों के अनुसार निर्माण को लेकर संबंधित लोगों को कई बार रोका गया था, लेकिन इसके बावजूद निर्माण जारी रखा गया। इसी कारण प्रशासन को कार्रवाई करनी पड़ी। कार्यपालक अभियंता ने स्थानीय लोगों द्वारा लगाए गए पैसे लेकर कार्रवाई रोकने के आरोपों को निराधार बताया। उन्होंने कहा कि यह गलत आरोप है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अभी पूरा अवैध निर्माण नहीं हटाया गया है और बचे हुए निर्माण को भी खाली कराने के लिए दोबारा कार्रवाई का प्रयास किया जाएगा। पार्क निर्माण के लिए करीब 4.98 लाख रुपये की योजना हाउसिंग बोर्ड के अधिकारियों के अनुसार, जिस स्थान पर निर्माण किया जा रहा है, वहां योजना एवं विकास विभाग की ओर से करीब 4.98 लाख रुपये की लागत से पार्क निर्माण की योजना प्रस्तावित है। इसी कारण पार्क के लिए चिन्हित जमीन को अतिक्रमणमुक्त कराने की कार्रवाई की जा रही है। इधर, स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन को मंदिर की आस्था को ध्यान में रखते हुए कार्रवाई करनी चाहिए। लोगों ने मांग की है कि हाउसिंग बोर्ड मंदिर के लिए अलग से जमीन उपलब्ध कराए, ताकि धार्मिक स्थल और पार्क दोनों की समस्या का स्थायी समाधान हो सके। दरभंगा के लहेरियासराय में हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी स्थित महावीर मंदिर के पीछे किए जा रहे पक्के निर्माण को हटाने के लिए शनिवार को जिला प्रशासन की टीम बड़ी संख्या में पुलिस बल और जेसीबी के साथ पहुंची। जेसीबी से निर्माण तोड़ने की कार्रवाई शुरू होते ही स्थानीय लोग जुट गए और इसका विरोध करने लगे। लोगों के विरोध के बाद प्रशासन की टीम को कार्रवाई रोककर वापस लौटना पड़ा। हालांकि, बिहार राज्य आवास बोर्ड के कार्यपालक अभियंता सुजीत कुमार ने स्पष्ट किया कि मंदिर को नहीं तोड़ा गया है, बल्कि मंदिर के पीछे किए जा रहे अवैध पक्के निर्माण को हटाने की कार्रवाई की गई है। लोग बोले- कॉलोनी में पूजा-पाठ के लिए कोई बड़ा मंदिर नहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में करीब पांच हजार से अधिक लोग रहते हैं, जिनमें बड़ी संख्या हिंदू परिवारों की है। कॉलोनी में पूजा-पाठ के लिए कोई बड़ा मंदिर नहीं है। महावीर मंदिर में ही लोग पूजा करने के साथ बैठकर धार्मिक गतिविधियां करते हैं। लोगों ने प्रशासन की कार्रवाई का विरोध करते हुए कहा कि मंदिर उनके लिए आस्था का केंद्र है। उन्होंने हाउसिंग बोर्ड से मंदिर के लिए स्थायी रूप से करीब छह कट्ठा जमीन उपलब्ध कराने की मांग की। सांसद गोपाल जी ठाकुर ने किया था शिलान्यास स्थानीय लोगों ने बताया कि महावीर मंदिर का शिलान्यास दरभंगा सांसद गोपाल जी ठाकुर ने किया था। उनके स्तर से मंदिर स्थल पर मिट्टी भराई के लिए करीब चार लाख रुपये की राशि भी उपलब्ध कराई गई थी। स्थानीय लोगों के अनुसार करीब डेढ़ वर्ष से घर-घर से चंदा एकत्र कर मंदिर का निर्माण कराया जा रहा है। निर्माण अब पक्की ढलाई तक पहुंच गया था। स्थानीय रामनाथ झा ने बताया कि जिस जमीन पर मंदिर बना है, वह पहले कबीलपुर के ‘माल बाबू’ परिवार की बताई जाती है। सरकार ने जमीन का अधिग्रहण किया था, लेकिन परिवार के लोगों ने अब तक मुआवजा नहीं लिया है। उन्होंने कहा कि इसी जगह पर उस परिवार के लोग आज भी ध्वजारोहण करते हैं। बाद में यहां छोटा मंदिर बनाया गया और श्रीमद्भागवत कथा का भी आयोजन हुआ। रामनाथ झा ने कहा कि मंदिर निर्माण के दौरान प्रशासन की ओर से पहले कोई स्पष्ट सूचना नहीं दी गई। यदि पहले बताया जाता कि निर्माण गलत है तो लोग प्रशासन से बात करते। उन्होंने कहा कि कॉलोनी में मंदिर की जरूरत है और हाउसिंग बोर्ड को मंदिर के लिए जमीन आवंटित करनी चाहिए। ‘घर-घर से चंदा कर बनाया जा रहा मंदिर’ स्थानीय आशा सिंह ने कहा कि हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में करीब पांच हजार लोगों की आबादी है और यहां कोई मंदिर नहीं है। एक छोटे से मंदिर को भी तोड़ने के लिए प्रशासन के पहुंचने पर लोगों ने विरोध किया। उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों ने आपस में बैठक कर स्थायी मंदिर बनाने का निर्णय लिया था। इसके बाद घर-घर से चंदा जुटाकर करीब 10 लाख रुपये की लागत से पक्का निर्माण कराया जा रहा है। आशा सिंह ने आरोप लगाया कि कॉलोनी में अन्य अनधिकृत रूप से लोग रह रहे हैं, लेकिन उन पर कार्रवाई नहीं की जाती। उन्होंने कहा कि मंदिर निर्माण का काम लंबे समय से चल रहा था और अब तक किसी स्तर से निर्माण रोकने की कार्रवाई नहीं हुई। अचानक जेसीबी और पुलिस बल के साथ पहुंचकर निर्माण तोड़ने का प्रयास किया गया। उन्होंने कहा कि प्रशासन की कार्रवाई का लोग विरोध करेंगे। मंदिर निर्माण को लेकर स्थानीय लोगों में आस्था का विषय होने के कारण काफी नाराजगी है। उन्होंने यह भी कहा कि मंदिर के लिए हाउसिंग बोर्ड की ओर से जमीन उपलब्ध कराई जानी चाहिए। हाउसिंग बोर्ड ने कहा- मंदिर नहीं, पीछे का अवैध निर्माण तोड़ा जा रहा बिहार राज्य आवास बोर्ड के कार्यपालक अभियंता सुजीत कुमार ने कहा कि हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में पार्क के लिए जमीन चिन्हित की गई है। इसी प्रस्तावित पार्क की जमीन पर महावीर मंदिर के पीछे पक्का निर्माण किया जा रहा था। जिला प्रशासन के निर्देश पर उसी निर्माण को हटाने के लिए कार्रवाई की गई। उन्होंने कहा कि महावीर मंदिर को नहीं तोड़ा गया है। मंदिर के पीछे किए जा रहे अवैध निर्माण को हटाया गया है। अधिकारियों के अनुसार निर्माण को लेकर संबंधित लोगों को कई बार रोका गया था, लेकिन इसके बावजूद निर्माण जारी रखा गया। इसी कारण प्रशासन को कार्रवाई करनी पड़ी। कार्यपालक अभियंता ने स्थानीय लोगों द्वारा लगाए गए पैसे लेकर कार्रवाई रोकने के आरोपों को निराधार बताया। उन्होंने कहा कि यह गलत आरोप है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अभी पूरा अवैध निर्माण नहीं हटाया गया है और बचे हुए निर्माण को भी खाली कराने के लिए दोबारा कार्रवाई का प्रयास किया जाएगा। पार्क निर्माण के लिए करीब 4.98 लाख रुपये की योजना हाउसिंग बोर्ड के अधिकारियों के अनुसार, जिस स्थान पर निर्माण किया जा रहा है, वहां योजना एवं विकास विभाग की ओर से करीब 4.98 लाख रुपये की लागत से पार्क निर्माण की योजना प्रस्तावित है। इसी कारण पार्क के लिए चिन्हित जमीन को अतिक्रमणमुक्त कराने की कार्रवाई की जा रही है। इधर, स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन को मंदिर की आस्था को ध्यान में रखते हुए कार्रवाई करनी चाहिए। लोगों ने मांग की है कि हाउसिंग बोर्ड मंदिर के लिए अलग से जमीन उपलब्ध कराए, ताकि धार्मिक स्थल और पार्क दोनों की समस्या का स्थायी समाधान हो सके।

