दरभंगा के बिरौल प्रखंड के फकीरना प्राइमरी स्कूल के हेडमास्टर कुमार प्रशांत का चयन राजकीय शिक्षक सम्मान-2026 के लिए किया गया है। शिक्षक दिवस के अवसर पर आज पटना में आयोजित होने वाले राजकीय समारोह में उन्हें सम्मानित किया जाएगा। शिक्षा में इनोवेशन, डिजिटल तकनीक के यूज, साइंस बेस्ड गतिविधियों और बच्चों की प्रतिभा को मंच देने के लिए कुमार प्रशांत को सम्मानित किया जाएगा। कुमार प्रशांत ने साल 2014 में शिक्षक के रूप में अपनी सेवा शुरू की। उन्होंने लंबे समय तक मध्य विद्यालय पोखराम उत्तरी में शिक्षक के रूप में कार्य करते हुए मैथ्स और साइंस सब्जेक्ट को गतिविधि एवं प्रयोग आधारित तरीके से पढ़ाने पर जोर दिया। करीब 11 साल की टीचिंग जर्नी में उन्होंने बच्चों को केवल सिलेबस तक सीमित रखने के बजाय विज्ञान, गणित, प्रोजेक्ट आधारित लर्निंग (PBL), टीएलएम, डिजिटल शिक्षा, इंस्पायर अवार्ड, बाल विज्ञान शोध, विज्ञान संगोष्ठी और विभिन्न प्रतियोगिताओं से जोड़ा। उनके मार्गदर्शन में विद्यार्थियों ने जिला से लेकर राज्य स्तर तक कई उपलब्धियां हासिल की हैं। इलेक्ट्रॉनिक से मास्टर डिग्री के बाद चुना शिक्षक का पेशा कुमार प्रशांत का शैक्षणिक जीवन भी अलग रहा है। उन्होंने एमटेक की पढ़ाई पूरी करने के बाद बच्चों को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के उद्देश्य से शिक्षक का पेशा चुना। उनका मानना है कि शिक्षक की भूमिका केवल किताब पढ़ाने तक सीमित नहीं है। शिक्षक बच्चों में जिज्ञासा, वैज्ञानिक सोच, आत्मविश्वास, रचनात्मकता और जिम्मेदारी की भावना विकसित करने का काम करता है। उनका पैतृक गांव दरभंगा जिला के बिरौल प्रखंड पटनियां पंचायत के नारायणपुर है। उनके पिता का नाम जटा शंकर लाल दास और माता का नाम पुष्पा देवी है। चार भाइयों में वे सबसे बड़े हैं। उनके एक भाई पटना मेट्रो में कार्यरत हैं, जबकि दूसरे भाई कॉम्फेड (सुधा) में इंजीनियर हैं। एक भाई प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। उनकी पत्नी कुमारी गिन्नी भी शिक्षिका हैं और मध्य विद्यालय खिलासिन, कुशेश्वरस्थान पूर्वी में कार्यरत हैं।
कुमार प्रशांत की 2014 में शुरू हुई टीचिंग जर्नी 21 अक्टूबर 2014 को साल 2011 की शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) के आधार पर कुमार प्रशांत ने मध्य विद्यालय पोखराम उत्तरी में शिक्षक के रूप में योगदान दिया। यहां उन्होंने कक्षा 6 से 8 तक गणित एवं विज्ञान विषय का दायित्व संभाला। उन्होंने स्थानीय संसाधनों, मॉडल और प्रयोगों के माध्यम से विज्ञान को बच्चों के लिए सरल एवं रोचक बनाने की पहल शुरू की। साल 2015-16 में उन्होंने गतिविधि आधारित और बाल-केंद्रित शिक्षण को आगे बढ़ाया। विद्यालय अवधि के बाद भी जरूरतमंद विद्यार्थियों को निःशुल्क अतिरिक्त शैक्षणिक सहयोग दिया। साल 2017 से 2019 के बीच उन्होंने PTEC पोखरौरा, मुजफ्फरपुर से दो वर्षीय इन-सर्विस प्रशिक्षण पूरा किया। इसी दौरान विद्यालय में बाल संसद, खेल आधारित शिक्षण, लर्निंग कॉर्नर और नेतृत्व विकास जैसी गतिविधियों का विस्तार किया। विद्यार्थियों को NMMS परीक्षा की तैयारी कराने के लिए विशेष कक्षाएं भी शुरू कीं। निष्ठा कार्यक्रम में रिसोर्स पर्सन, बच्चों ने राज्य स्तर पर बनाई पहचान साल 2019 में SCERT एवं NCERT के निष्ठा (NISHTHA) कार्यक्रम में कुमार प्रशांत का चयन रिसोर्स पर्सन के रूप में हुआ। उन्होंने बिरौल, बेनीपुर और दरभंगा नगर के शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया। इसी वर्ष उन्होंने विद्यार्थियों के लिए व्हाट्सएप अध्ययन समूह बनाकर डिजिटल माध्यम से पढ़ाई को बढ़ावा दिया। उनके मार्गदर्शन में छात्र आयुष चौधरी ने राज्य स्तरीय विज्ञान संगोष्ठी में द्वितीय स्थान प्राप्त किया। जल-जीवन-हरियाली अभियान के तहत वृक्षारोपण और जिला स्तरीय प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। विद्यालय में मधुबनी चित्रकला को बढ़ावा देने के साथ एक विद्यार्थी का INSPIRE MANAK में चयन भी हुआ। कोरोना काल में भी जारी रखा ऑनलाइन शिक्षण वर्ष 2020 में कोविड-19 महामारी के दौरान जब विद्यालय बंद थे, तब कुमार प्रशांत ने Teachers of Bihar के साथ जुड़कर School on Mobile अभियान के माध्यम से विद्यार्थियों को ऑनलाइन शिक्षा से जोड़े रखा। उन्होंने डिजिटल माध्यम से बच्चों के साथ लगातार शैक्षणिक संपर्क बनाए रखा। वर्ष 2021 में उन्होंने अपने व्यक्तिगत संसाधनों से लैपटॉप और प्रोजेक्टर की व्यवस्था कर विद्यालय में डिजिटल कक्षाओं की शुरुआत की। कक्षा 1 से 8 तक के विद्यार्थियों को डिजिटल शिक्षण से जोड़ने का प्रयास किया। इसके साथ ही योग, व्यायाम, स्वास्थ्य जागरूकता, सुरक्षित शनिवार और आपदा प्रबंधन जागरूकता कार्यक्रम चलाए। चेतना सत्र में बच्चों का जन्मदिन मनाने की पहल भी शुरू की। WASH से लेकर FLN तक प्रशिक्षण वर्ष 2022 में उन्होंने यूनिसेफ एवं बिहार शिक्षा परियोजना परिषद के अंतर्गत WASH मास्टर ट्रेनर का प्रशिक्षण प्राप्त किया। कक्षा 3 से 5 तथा कक्षा 6 से 8 में विज्ञान शिक्षण का दायित्व संभाला। स्वच्छ एवं हरित विद्यालय अभियान में मार्गदर्शन और मूल्यांकन की भूमिका निभाई। उन्होंने SCERT पटना से FLN के ‘चहक’ मेंटर प्रशिक्षण प्राप्त किया। राष्ट्रीय आविष्कार अभियान में उनके मार्गदर्शन में छात्र अमृत राज ने जिला स्तर की विज्ञान प्रदर्शनी में प्रथम स्थान तथा गणित क्विज में द्वितीय स्थान प्राप्त किया। PBL और TLM को बनाया शिक्षण का हिस्सा वर्ष 2023 में कुमार प्रशांत ने टीएलएम, प्रोजेक्ट बेस्ड लर्निंग (PBL) और अनुभवात्मक शिक्षण को विद्यालय की नियमित शिक्षण प्रक्रिया का हिस्सा बनाया। इसका उद्देश्य बच्चों को केवल किताबों के माध्यम से पढ़ाने के बजाय उन्हें गतिविधियों, प्रयोगों और वास्तविक जीवन से जोड़कर सीखने का अवसर देना था। उनके प्रयासों से विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच, रचनात्मकता, समस्या समाधान की क्षमता और सहयोगात्मक अधिगम को बढ़ावा मिला। 2024 में मिले कई महत्वपूर्ण सम्मान वर्ष 2024 कुमार प्रशांत के लिए उपलब्धियों से भरा रहा। शिक्षक दिवस के अवसर पर जिलाधिकारी, दरभंगा द्वारा उन्हें बेस्ट ICT टीचर के रूप में सम्मानित किया गया। स्वतंत्रता दिवस पर अनुमंडल पदाधिकारी, बिरौल द्वारा भी सम्मानित किया गया। उनके मार्गदर्शन में छात्रा प्रियंका गर्ग ने राज्य स्तरीय विज्ञान संगोष्ठी में प्रथम स्थान प्राप्त किया। राज्य स्तरीय बाल वैज्ञानिक प्रदर्शनी में मार्गदर्शक शिक्षक के रूप में उन्हें SCERT द्वारा सम्मानित किया गया। दिसंबर 2024 में शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव एस. सिद्धार्थ एवं निदेशक, शिक्षा विभाग द्वारा उन्हें Teacher of the Month सम्मान प्रदान किया गया। इसी वर्ष INSPIRE MANAK में तीन विद्यार्थियों का चयन हुआ। बाल विज्ञान शोध कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने जिला स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त किया तथा छात्रा प्रियंका कुमारी का राज्य स्तर के लिए चयन हुआ। उन्होंने DIET सुपौल से FLN प्रशिक्षण भी पूरा किया। 2025 में भी उपलब्धियों का सिलसिला जारी जून 2025 में कुमार प्रशांत को दोबारा टीचर ऑफ मंथ का सम्मान मिला। PBL में मार्गदर्शक शिक्षक के रूप में SCERT द्वारा सम्मानित किए गए। उनके मार्गदर्शन में छात्राओं रेखा एवं सुधा कुमारी ने जिला स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त किया। बिहार दिवस 2025 के अवसर पर उन्हें जिला शिक्षा पदाधिकारी एवं जिला कार्यक्रम पदाधिकारी, दरभंगा द्वारा सम्मानित किया गया। स्काउट शिक्षक के रूप में उन्होंने विद्यार्थियों का राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में नेतृत्व किया। TLM प्रतियोगिता में भी विद्यालय को जिला स्तर तक सफलता मिली। इसी दौरान उन्होंने समावेशी शिक्षा प्रशिक्षण, PBL तकनीकी सदस्य, INSPIRE और ECO Club के प्रखंड स्तरीय दायित्वों का निर्वहन किया। BPSC के माध्यम से प्रधान शिक्षक के रूप में प्राथमिक विद्यालय फकीरना, बिरौल में योगदान दिया। विद्यालय स्वास्थ्य एवं आरोग्य राजदूत का प्रशिक्षण प्राप्त करने के साथ IGNOU से B.Ed. भी पूरा किया। 2026 में राज्य स्तरीय TLM तक पहुंची उपलब्धि वर्ष 2026 में उनकी उपलब्धियों का सिलसिला जारी रहा। TLM प्रतियोगिता में उनका चयन राज्य स्तर तक हुआ। स्काउट शिक्षक के रूप में बिहार दिवस की राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में विद्यार्थियों का नेतृत्व किया। भारत निर्वाचन आयोग के अंतर्गत असेंबली लेवल मास्टर ट्रेनर के रूप में उन्होंने BLO एवं पर्यवेक्षकों को प्रशिक्षण दिया। इसके लिए उन्होंने IIIDEM, नई दिल्ली में राष्ट्रीय स्तर का प्रशिक्षण भी प्राप्त किया। उन्होंने विद्यालय में ‘बाल संवाद’ के माध्यम से बच्चों को अपनी बात रखने और अभिव्यक्ति का अवसर दिया। सामाजिक दायित्व के तहत रेडक्रॉस के माध्यम से रक्तदान भी किया। करीब 50 विद्यार्थी NMMS के लिए चयनित कुमार प्रशांत के अनुसार अब तक उनके मार्गदर्शन में करीब 50 विद्यार्थी NMMS छात्रवृत्ति के लिए चयनित हो चुके हैं। कक्षा 1 से 8 तक के विद्यार्थियों को डिजिटल शिक्षण से जोड़ने के साथ कक्षा 1 से 5 में TLM आधारित आनंददायक शिक्षण और कक्षा 6 से 8 में PBL को प्रभावी ढंग से लागू किया गया है। विज्ञान संगोष्ठी, बाल वैज्ञानिक प्रदर्शनी, PBL, TLM, INSPIRE MANAK सहित विभिन्न प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों ने जिला और राज्य स्तर पर सफलता हासिल की है। विद्यालय में नवाचार, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, नेतृत्व विकास, डिजिटल शिक्षा और सामुदायिक सहभागिता का मॉडल विकसित करने का प्रयास किया गया है। कई प्रशिक्षण और जिम्मेदारियां कुमार प्रशांत ने राज्य एवं प्रखंड स्तर पर विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों में प्रशिक्षक की भूमिका भी निभाई है। इनमें निष्ठा प्रशिक्षण, WASH, प्रोजेक्ट बेस्ड लर्निंग, INSPIRE MANAK, ECO Club, समावेशी शिक्षा, स्वच्छ एवं हरित विद्यालय अभियान और मुख्यमंत्री विद्यालय सुरक्षा कार्यक्रम ‘सुरक्षित शनिवार’ प्रमुख हैं। जिला स्तर पर स्वच्छ विद्यालय पुरस्कार तथा प्रखंड स्तर पर PBL, ECO Club, INSPIRE और NCERT निष्ठा प्रशिक्षण से जुड़े दायित्वों का भी उन्होंने निर्वहन किया है। वर्तमान में वे स्वच्छ एवं हरित विद्यालय पुरस्कार से संबंधित गतिविधियों में भी सक्रिय हैं। बोले- शिक्षा का उद्देश्य सिर्फ परीक्षा में सफलता नहीं कुमार प्रशांत कहते हैं कि शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा में सफलता दिलाना नहीं, बल्कि प्रत्येक बच्चे को जिज्ञासु, वैज्ञानिक दृष्टिकोण से युक्त, संवेदनशील, आत्मविश्वासी और जिम्मेदार नागरिक बनाना है। इसी उद्देश्य से वे निरंतर नवाचार, समर्पण और गुणवत्तापूर्ण शिक्षण के माध्यम से विद्यार्थियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास कर रहे हैं। राजकीय शिक्षक सम्मान के लिए उनके चयन पर बीईओ मणिशंकर कुमार सिंह, भुवन कुमार दास, एमडीएम आरपी प्रभात कुमार, लेखापाल सूरज कुमार, प्रतिमा कुमारी, कुमारी गिन्नी, नरेश कुमार दास, रौशन कुमार कर्ण सहित बड़ी संख्या में शिक्षकों एवं शुभचिंतकों ने बधाई दी है। दरभंगा के बिरौल प्रखंड के फकीरना प्राइमरी स्कूल के हेडमास्टर कुमार प्रशांत का चयन राजकीय शिक्षक सम्मान-2026 के लिए किया गया है। शिक्षक दिवस के अवसर पर आज पटना में आयोजित होने वाले राजकीय समारोह में उन्हें सम्मानित किया जाएगा। शिक्षा में इनोवेशन, डिजिटल तकनीक के यूज, साइंस बेस्ड गतिविधियों और बच्चों की प्रतिभा को मंच देने के लिए कुमार प्रशांत को सम्मानित किया जाएगा। कुमार प्रशांत ने साल 2014 में शिक्षक के रूप में अपनी सेवा शुरू की। उन्होंने लंबे समय तक मध्य विद्यालय पोखराम उत्तरी में शिक्षक के रूप में कार्य करते हुए मैथ्स और साइंस सब्जेक्ट को गतिविधि एवं प्रयोग आधारित तरीके से पढ़ाने पर जोर दिया। करीब 11 साल की टीचिंग जर्नी में उन्होंने बच्चों को केवल सिलेबस तक सीमित रखने के बजाय विज्ञान, गणित, प्रोजेक्ट आधारित लर्निंग (PBL), टीएलएम, डिजिटल शिक्षा, इंस्पायर अवार्ड, बाल विज्ञान शोध, विज्ञान संगोष्ठी और विभिन्न प्रतियोगिताओं से जोड़ा। उनके मार्गदर्शन में विद्यार्थियों ने जिला से लेकर राज्य स्तर तक कई उपलब्धियां हासिल की हैं। इलेक्ट्रॉनिक से मास्टर डिग्री के बाद चुना शिक्षक का पेशा कुमार प्रशांत का शैक्षणिक जीवन भी अलग रहा है। उन्होंने एमटेक की पढ़ाई पूरी करने के बाद बच्चों को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के उद्देश्य से शिक्षक का पेशा चुना। उनका मानना है कि शिक्षक की भूमिका केवल किताब पढ़ाने तक सीमित नहीं है। शिक्षक बच्चों में जिज्ञासा, वैज्ञानिक सोच, आत्मविश्वास, रचनात्मकता और जिम्मेदारी की भावना विकसित करने का काम करता है। उनका पैतृक गांव दरभंगा जिला के बिरौल प्रखंड पटनियां पंचायत के नारायणपुर है। उनके पिता का नाम जटा शंकर लाल दास और माता का नाम पुष्पा देवी है। चार भाइयों में वे सबसे बड़े हैं। उनके एक भाई पटना मेट्रो में कार्यरत हैं, जबकि दूसरे भाई कॉम्फेड (सुधा) में इंजीनियर हैं। एक भाई प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। उनकी पत्नी कुमारी गिन्नी भी शिक्षिका हैं और मध्य विद्यालय खिलासिन, कुशेश्वरस्थान पूर्वी में कार्यरत हैं।
कुमार प्रशांत की 2014 में शुरू हुई टीचिंग जर्नी 21 अक्टूबर 2014 को साल 2011 की शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) के आधार पर कुमार प्रशांत ने मध्य विद्यालय पोखराम उत्तरी में शिक्षक के रूप में योगदान दिया। यहां उन्होंने कक्षा 6 से 8 तक गणित एवं विज्ञान विषय का दायित्व संभाला। उन्होंने स्थानीय संसाधनों, मॉडल और प्रयोगों के माध्यम से विज्ञान को बच्चों के लिए सरल एवं रोचक बनाने की पहल शुरू की। साल 2015-16 में उन्होंने गतिविधि आधारित और बाल-केंद्रित शिक्षण को आगे बढ़ाया। विद्यालय अवधि के बाद भी जरूरतमंद विद्यार्थियों को निःशुल्क अतिरिक्त शैक्षणिक सहयोग दिया। साल 2017 से 2019 के बीच उन्होंने PTEC पोखरौरा, मुजफ्फरपुर से दो वर्षीय इन-सर्विस प्रशिक्षण पूरा किया। इसी दौरान विद्यालय में बाल संसद, खेल आधारित शिक्षण, लर्निंग कॉर्नर और नेतृत्व विकास जैसी गतिविधियों का विस्तार किया। विद्यार्थियों को NMMS परीक्षा की तैयारी कराने के लिए विशेष कक्षाएं भी शुरू कीं। निष्ठा कार्यक्रम में रिसोर्स पर्सन, बच्चों ने राज्य स्तर पर बनाई पहचान साल 2019 में SCERT एवं NCERT के निष्ठा (NISHTHA) कार्यक्रम में कुमार प्रशांत का चयन रिसोर्स पर्सन के रूप में हुआ। उन्होंने बिरौल, बेनीपुर और दरभंगा नगर के शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया। इसी वर्ष उन्होंने विद्यार्थियों के लिए व्हाट्सएप अध्ययन समूह बनाकर डिजिटल माध्यम से पढ़ाई को बढ़ावा दिया। उनके मार्गदर्शन में छात्र आयुष चौधरी ने राज्य स्तरीय विज्ञान संगोष्ठी में द्वितीय स्थान प्राप्त किया। जल-जीवन-हरियाली अभियान के तहत वृक्षारोपण और जिला स्तरीय प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। विद्यालय में मधुबनी चित्रकला को बढ़ावा देने के साथ एक विद्यार्थी का INSPIRE MANAK में चयन भी हुआ। कोरोना काल में भी जारी रखा ऑनलाइन शिक्षण वर्ष 2020 में कोविड-19 महामारी के दौरान जब विद्यालय बंद थे, तब कुमार प्रशांत ने Teachers of Bihar के साथ जुड़कर School on Mobile अभियान के माध्यम से विद्यार्थियों को ऑनलाइन शिक्षा से जोड़े रखा। उन्होंने डिजिटल माध्यम से बच्चों के साथ लगातार शैक्षणिक संपर्क बनाए रखा। वर्ष 2021 में उन्होंने अपने व्यक्तिगत संसाधनों से लैपटॉप और प्रोजेक्टर की व्यवस्था कर विद्यालय में डिजिटल कक्षाओं की शुरुआत की। कक्षा 1 से 8 तक के विद्यार्थियों को डिजिटल शिक्षण से जोड़ने का प्रयास किया। इसके साथ ही योग, व्यायाम, स्वास्थ्य जागरूकता, सुरक्षित शनिवार और आपदा प्रबंधन जागरूकता कार्यक्रम चलाए। चेतना सत्र में बच्चों का जन्मदिन मनाने की पहल भी शुरू की। WASH से लेकर FLN तक प्रशिक्षण वर्ष 2022 में उन्होंने यूनिसेफ एवं बिहार शिक्षा परियोजना परिषद के अंतर्गत WASH मास्टर ट्रेनर का प्रशिक्षण प्राप्त किया। कक्षा 3 से 5 तथा कक्षा 6 से 8 में विज्ञान शिक्षण का दायित्व संभाला। स्वच्छ एवं हरित विद्यालय अभियान में मार्गदर्शन और मूल्यांकन की भूमिका निभाई। उन्होंने SCERT पटना से FLN के ‘चहक’ मेंटर प्रशिक्षण प्राप्त किया। राष्ट्रीय आविष्कार अभियान में उनके मार्गदर्शन में छात्र अमृत राज ने जिला स्तर की विज्ञान प्रदर्शनी में प्रथम स्थान तथा गणित क्विज में द्वितीय स्थान प्राप्त किया। PBL और TLM को बनाया शिक्षण का हिस्सा वर्ष 2023 में कुमार प्रशांत ने टीएलएम, प्रोजेक्ट बेस्ड लर्निंग (PBL) और अनुभवात्मक शिक्षण को विद्यालय की नियमित शिक्षण प्रक्रिया का हिस्सा बनाया। इसका उद्देश्य बच्चों को केवल किताबों के माध्यम से पढ़ाने के बजाय उन्हें गतिविधियों, प्रयोगों और वास्तविक जीवन से जोड़कर सीखने का अवसर देना था। उनके प्रयासों से विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच, रचनात्मकता, समस्या समाधान की क्षमता और सहयोगात्मक अधिगम को बढ़ावा मिला। 2024 में मिले कई महत्वपूर्ण सम्मान वर्ष 2024 कुमार प्रशांत के लिए उपलब्धियों से भरा रहा। शिक्षक दिवस के अवसर पर जिलाधिकारी, दरभंगा द्वारा उन्हें बेस्ट ICT टीचर के रूप में सम्मानित किया गया। स्वतंत्रता दिवस पर अनुमंडल पदाधिकारी, बिरौल द्वारा भी सम्मानित किया गया। उनके मार्गदर्शन में छात्रा प्रियंका गर्ग ने राज्य स्तरीय विज्ञान संगोष्ठी में प्रथम स्थान प्राप्त किया। राज्य स्तरीय बाल वैज्ञानिक प्रदर्शनी में मार्गदर्शक शिक्षक के रूप में उन्हें SCERT द्वारा सम्मानित किया गया। दिसंबर 2024 में शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव एस. सिद्धार्थ एवं निदेशक, शिक्षा विभाग द्वारा उन्हें Teacher of the Month सम्मान प्रदान किया गया। इसी वर्ष INSPIRE MANAK में तीन विद्यार्थियों का चयन हुआ। बाल विज्ञान शोध कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने जिला स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त किया तथा छात्रा प्रियंका कुमारी का राज्य स्तर के लिए चयन हुआ। उन्होंने DIET सुपौल से FLN प्रशिक्षण भी पूरा किया। 2025 में भी उपलब्धियों का सिलसिला जारी जून 2025 में कुमार प्रशांत को दोबारा टीचर ऑफ मंथ का सम्मान मिला। PBL में मार्गदर्शक शिक्षक के रूप में SCERT द्वारा सम्मानित किए गए। उनके मार्गदर्शन में छात्राओं रेखा एवं सुधा कुमारी ने जिला स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त किया। बिहार दिवस 2025 के अवसर पर उन्हें जिला शिक्षा पदाधिकारी एवं जिला कार्यक्रम पदाधिकारी, दरभंगा द्वारा सम्मानित किया गया। स्काउट शिक्षक के रूप में उन्होंने विद्यार्थियों का राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में नेतृत्व किया। TLM प्रतियोगिता में भी विद्यालय को जिला स्तर तक सफलता मिली। इसी दौरान उन्होंने समावेशी शिक्षा प्रशिक्षण, PBL तकनीकी सदस्य, INSPIRE और ECO Club के प्रखंड स्तरीय दायित्वों का निर्वहन किया। BPSC के माध्यम से प्रधान शिक्षक के रूप में प्राथमिक विद्यालय फकीरना, बिरौल में योगदान दिया। विद्यालय स्वास्थ्य एवं आरोग्य राजदूत का प्रशिक्षण प्राप्त करने के साथ IGNOU से B.Ed. भी पूरा किया। 2026 में राज्य स्तरीय TLM तक पहुंची उपलब्धि वर्ष 2026 में उनकी उपलब्धियों का सिलसिला जारी रहा। TLM प्रतियोगिता में उनका चयन राज्य स्तर तक हुआ। स्काउट शिक्षक के रूप में बिहार दिवस की राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में विद्यार्थियों का नेतृत्व किया। भारत निर्वाचन आयोग के अंतर्गत असेंबली लेवल मास्टर ट्रेनर के रूप में उन्होंने BLO एवं पर्यवेक्षकों को प्रशिक्षण दिया। इसके लिए उन्होंने IIIDEM, नई दिल्ली में राष्ट्रीय स्तर का प्रशिक्षण भी प्राप्त किया। उन्होंने विद्यालय में ‘बाल संवाद’ के माध्यम से बच्चों को अपनी बात रखने और अभिव्यक्ति का अवसर दिया। सामाजिक दायित्व के तहत रेडक्रॉस के माध्यम से रक्तदान भी किया। करीब 50 विद्यार्थी NMMS के लिए चयनित कुमार प्रशांत के अनुसार अब तक उनके मार्गदर्शन में करीब 50 विद्यार्थी NMMS छात्रवृत्ति के लिए चयनित हो चुके हैं। कक्षा 1 से 8 तक के विद्यार्थियों को डिजिटल शिक्षण से जोड़ने के साथ कक्षा 1 से 5 में TLM आधारित आनंददायक शिक्षण और कक्षा 6 से 8 में PBL को प्रभावी ढंग से लागू किया गया है। विज्ञान संगोष्ठी, बाल वैज्ञानिक प्रदर्शनी, PBL, TLM, INSPIRE MANAK सहित विभिन्न प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों ने जिला और राज्य स्तर पर सफलता हासिल की है। विद्यालय में नवाचार, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, नेतृत्व विकास, डिजिटल शिक्षा और सामुदायिक सहभागिता का मॉडल विकसित करने का प्रयास किया गया है। कई प्रशिक्षण और जिम्मेदारियां कुमार प्रशांत ने राज्य एवं प्रखंड स्तर पर विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों में प्रशिक्षक की भूमिका भी निभाई है। इनमें निष्ठा प्रशिक्षण, WASH, प्रोजेक्ट बेस्ड लर्निंग, INSPIRE MANAK, ECO Club, समावेशी शिक्षा, स्वच्छ एवं हरित विद्यालय अभियान और मुख्यमंत्री विद्यालय सुरक्षा कार्यक्रम ‘सुरक्षित शनिवार’ प्रमुख हैं। जिला स्तर पर स्वच्छ विद्यालय पुरस्कार तथा प्रखंड स्तर पर PBL, ECO Club, INSPIRE और NCERT निष्ठा प्रशिक्षण से जुड़े दायित्वों का भी उन्होंने निर्वहन किया है। वर्तमान में वे स्वच्छ एवं हरित विद्यालय पुरस्कार से संबंधित गतिविधियों में भी सक्रिय हैं। बोले- शिक्षा का उद्देश्य सिर्फ परीक्षा में सफलता नहीं कुमार प्रशांत कहते हैं कि शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा में सफलता दिलाना नहीं, बल्कि प्रत्येक बच्चे को जिज्ञासु, वैज्ञानिक दृष्टिकोण से युक्त, संवेदनशील, आत्मविश्वासी और जिम्मेदार नागरिक बनाना है। इसी उद्देश्य से वे निरंतर नवाचार, समर्पण और गुणवत्तापूर्ण शिक्षण के माध्यम से विद्यार्थियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास कर रहे हैं। राजकीय शिक्षक सम्मान के लिए उनके चयन पर बीईओ मणिशंकर कुमार सिंह, भुवन कुमार दास, एमडीएम आरपी प्रभात कुमार, लेखापाल सूरज कुमार, प्रतिमा कुमारी, कुमारी गिन्नी, नरेश कुमार दास, रौशन कुमार कर्ण सहित बड़ी संख्या में शिक्षकों एवं शुभचिंतकों ने बधाई दी है।

