गोपालगंज के विश्वविख्यात और आस्था के बड़े केंद्र मां थावे भवानी के मंदिर में हुई चोरी के चर्चित मामले में सिविल कोर्ट के सीजेएम की अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने इस सनसनीखेज मामले में संलिप्त पाए गए पांचों अभियुक्तों को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई है। पावन नवरात्रि के अवसर पर आए इस फैसले से श्रद्धालुओं में संतोष का माहौल है, क्योंकि न्याय की देवी के दरबार में ही चोरी करने वाले अपराधियों को कानून का कड़ा पाठ पढ़ाया गया है। इस गंभीर मामले में सुनवाई पूरी होने के बाद सीजेएम कोर्ट ने चार अभियुक्तों को सात-सात साल सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। चोरी की बड़ी घटना को दिया था अंजाम इसके साथ ही इन सभी पर दस दस हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया गया है। वहीं, मामले से जुड़े पांचवें अभियुक्त को अदालत ने तीन साल की सजा सुनाई है। कोर्ट के इस कड़े रुख से अपराधियों और असामाजिक तत्वों के बीच एक स्पष्ट संदेश गया है कि धार्मिक स्थलों या आम जनजीवन की आस्था और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। बता दें कि मां थावेवाली के दरबार में असामाजिक तत्वों ने दुस्साहस की हदें पार करते हुए मंदिर के अंदर प्रवेश किया था। चोरों ने मां के दरबार में घुसकर तिजोरी और गल्ले में रखे जेवरात, मुकुट और कई अन्य कीमती सामानों की चोरी की इस बड़ी घटना को अंजाम दिया था। आम लोगों और मां के भक्तों के बीच चर्चा इस दुस्साहसिक वारदात से जिलेभर के लोगों में भारी आक्रोश फैल गया था। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अनुसंधान शुरू किया और साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। चूंकि यह बहुचर्चित फैसला ठीक नवरात्रि के पवित्र दिनों में आया है, इसलिए आम लोगों और मां के भक्तों के बीच इसकी खासी चर्चा है। भक्तों का मानना है कि शक्ति की आराधना के इन विशेष दिनों में मां के दरबार के चोरों को सजा मिलना एक प्रकार से देवी न्याय का प्रतीक है। जिला प्रशासन और पुलिस महकमे के लिए भी इस मामले में स्पीडी ट्रायल के जरिए सजा दिलाना एक बड़ी सफलता माना जा रहा है। गोपालगंज के विश्वविख्यात और आस्था के बड़े केंद्र मां थावे भवानी के मंदिर में हुई चोरी के चर्चित मामले में सिविल कोर्ट के सीजेएम की अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने इस सनसनीखेज मामले में संलिप्त पाए गए पांचों अभियुक्तों को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई है। पावन नवरात्रि के अवसर पर आए इस फैसले से श्रद्धालुओं में संतोष का माहौल है, क्योंकि न्याय की देवी के दरबार में ही चोरी करने वाले अपराधियों को कानून का कड़ा पाठ पढ़ाया गया है। इस गंभीर मामले में सुनवाई पूरी होने के बाद सीजेएम कोर्ट ने चार अभियुक्तों को सात-सात साल सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। चोरी की बड़ी घटना को दिया था अंजाम इसके साथ ही इन सभी पर दस दस हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया गया है। वहीं, मामले से जुड़े पांचवें अभियुक्त को अदालत ने तीन साल की सजा सुनाई है। कोर्ट के इस कड़े रुख से अपराधियों और असामाजिक तत्वों के बीच एक स्पष्ट संदेश गया है कि धार्मिक स्थलों या आम जनजीवन की आस्था और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। बता दें कि मां थावेवाली के दरबार में असामाजिक तत्वों ने दुस्साहस की हदें पार करते हुए मंदिर के अंदर प्रवेश किया था। चोरों ने मां के दरबार में घुसकर तिजोरी और गल्ले में रखे जेवरात, मुकुट और कई अन्य कीमती सामानों की चोरी की इस बड़ी घटना को अंजाम दिया था। आम लोगों और मां के भक्तों के बीच चर्चा इस दुस्साहसिक वारदात से जिलेभर के लोगों में भारी आक्रोश फैल गया था। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अनुसंधान शुरू किया और साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। चूंकि यह बहुचर्चित फैसला ठीक नवरात्रि के पवित्र दिनों में आया है, इसलिए आम लोगों और मां के भक्तों के बीच इसकी खासी चर्चा है। भक्तों का मानना है कि शक्ति की आराधना के इन विशेष दिनों में मां के दरबार के चोरों को सजा मिलना एक प्रकार से देवी न्याय का प्रतीक है। जिला प्रशासन और पुलिस महकमे के लिए भी इस मामले में स्पीडी ट्रायल के जरिए सजा दिलाना एक बड़ी सफलता माना जा रहा है।

