अरुणाचल प्रदेश के दिबांग वैली जिले में ड्यूटी के दौरान अचानक आई फ्लैश फ्लड में लापता हुए भोजपुर के वीर जवान कुंदन कुमार का अस्थि कलश तिरंगे में लिपटकर उनके पैतृक गांव जनेसरा पहुंचा। जिस गांव में कुछ दिन पहले तक बेटे के सकुशल लौटने की उम्मीद थी, उसी गांव में शनिवार को तिरंगे में लिपटा अस्थि कलश पहुंचते ही माहौल गमगीन हो गया। अपने वीर सपूत की अंतिम झलक पाने के लिए बारिश के बीच भी बड़ी संख्या में ग्रामीण उमड़ पड़े। परिजनों की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। गांव की गलियों में मातमी सन्नाटा था, लेकिन हर तरफ एक ही आवाज सुनाई दे रही थी- शहीद कुंदन अमर रहे। तिरंगा यात्रा में शामिल हुए ग्रामीण सेना के जवानों की ओर से अस्थि कलश जनेसरा लाए जाने के बाद ग्रामीणों ने पुष्प अर्पित कर अपने वीर सपूत को श्रद्धांजलि दी। इसके बाद अस्थि कलश को जनेसरा से संदेश की ओर जुलूस के रूप में ले जाया गया। हाथों में तिरंगा थामे युवा, बुजुर्ग और बड़ी संख्या में ग्रामीण बाइक से तिरंगा यात्रा में शामिल हुए। रास्ते भर लोग भारत माता की जय और शहीद कुंदन अमर रहे के नारे लगाते रहे। बारिश भी लोगों के कदम नहीं रोक सकी। हर कोई अपने गांव के उस बेटे को अंतिम विदाई देने के लिए सड़क पर था, जिसने महज 20 साल की उम्र में देश की सेवा करते हुए अपनी जान गंवा दी। संदेश चौक पर उमड़ा जनसैलाब, पुष्पवर्षा कर दी अंतिम विदाई तिरंगा यात्रा जब संदेश चौक पहुंची तो वहां पहले से ही बड़ी संख्या में ग्रामीण और युवा शहीद कुंदन को अंतिम श्रद्धांजलि देने के लिए मौजूद थे। अस्थि कलश के पहुंचते ही लोगों ने पुष्पवर्षा कर वीर जवान को नमन किया। पूरे इलाके में भारत माता की जय और शहीद कुंदन अमर रहे के नारे गूंजने लगे। कई लोग भावुक होकर रो पड़े। अस्थि कलश को देखकर परिजनों और ग्रामीणों की आंखों से आंसू छलक पड़े। गांव के युवाओं ने तिरंगा हाथ में लेकर अपने साथी को अंतिम सलामी दी। इसके बाद शहीद कुंदन के अस्थि कलश को अंतिम संस्कार के लिए रेपुरा स्थित सोन नदी घाट ले जाया गया। यहां सेना के जवानों ने पूरे सैन्य सम्मान के साथ अपने साथी को गार्ड ऑफ ऑनर दिया। सैन्य सम्मान के बीच शहीद कुंदन का अस्थि कलश पंचतत्व में विलीन हो गया। इस दौरान घाट पर मौजूद हर आंख नम थी। 20 साल की उम्र में देश के लिए दी शहादत जनेसरा गांव निवासी भूपेंद्र सिंह के पुत्र कुंदन कुमार दो भाइयों और एक बहन में सबसे छोटे थे। 10 फरवरी को जन्मे कुंदन ने सुहासत-सहदेव +2 विद्यालय, संदेश से इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई की थी। इसके बाद वह आरा में रहकर सेना में भर्ती होने की तैयारी करने लगे। मेहनत के बाद दानापुर कैंट में आयोजित सेना भर्ती रैली में पहले ही प्रयास में उनका चयन हो गया। 29 अप्रैल 2025 को वह थल सेना में शामिल हुए। जबलपुर में प्रशिक्षण लेने के बाद उनकी पहली पोस्टिंग अरुणाचल प्रदेश में हुई थी। कुंदन कुमार पांचवीं ग्रेनेडियर में जवान थे और अरुणाचल प्रदेश के दिबांग वैली जिले के पशुपानी क्षेत्र में तैनात थे। ड्यूटी के दौरान 14 अगस्त 2026 को क्षेत्र में अचानक फ्लैश फ्लड आ गई। तेज बहाव में सेना के पांच जवान लापता हो गए थे। इनमें भोजपुर के कुंदन कुमार भी शामिल थे। घटना के बाद सेना की ओर से लगातार उनकी तलाश की जा रही थी। परिजन भी लगातार उनके सकुशल लौटने की उम्मीद लगाए बैठे थे। 26 अगस्त को मिला था शव, 22 सितंबर को हुई पहचान लगातार तलाश के दौरान 26 अगस्त को एक शव मिलने की सूचना परिजनों को दी गई थी। इसके बाद शव की पहचान के लिए डीएनए जांच कराई गई। 22 सितंबर को डीएनए जांच के माध्यम से शव की पहचान कुंदन कुमार के रूप में हुई। पहचान की पुष्टि होते ही परिवार की वह उम्मीद टूट गई, जिसके सहारे वे करीब डेढ़ महीने से बेटे के लौटने का इंतजार कर रहे थे। शनिवार को जब तिरंगे में लिपटा कुंदन का अस्थि कलश जनेसरा पहुंचा तो पूरे गांव की आंखें नम हो गईं। जिस बेटे ने देश की रक्षा का संकल्प लेकर सेना की वर्दी पहनी थी, उसी बेटे को ग्रामीणों ने तिरंगे के साथ अंतिम विदाई दी। गांव से लेकर संदेश चौक और फिर सोन नदी घाट तक लोगों की भीड़ उनके सम्मान में जुटी रही। महज 20 साल की उम्र में देश के लिए अपना जीवन न्योछावर करने वाले कुंदन की शहादत ने पूरे भोजपुर को गमगीन कर दिया है। गांव में अब भी हर तरफ उसी वीर सपूत की चर्चा है, जिसकी अंतिम यात्रा में बारिश के बीच भी हजारों कदम उसके सम्मान में आगे बढ़ते रहे। अरुणाचल प्रदेश के दिबांग वैली जिले में ड्यूटी के दौरान अचानक आई फ्लैश फ्लड में लापता हुए भोजपुर के वीर जवान कुंदन कुमार का अस्थि कलश तिरंगे में लिपटकर उनके पैतृक गांव जनेसरा पहुंचा। जिस गांव में कुछ दिन पहले तक बेटे के सकुशल लौटने की उम्मीद थी, उसी गांव में शनिवार को तिरंगे में लिपटा अस्थि कलश पहुंचते ही माहौल गमगीन हो गया। अपने वीर सपूत की अंतिम झलक पाने के लिए बारिश के बीच भी बड़ी संख्या में ग्रामीण उमड़ पड़े। परिजनों की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। गांव की गलियों में मातमी सन्नाटा था, लेकिन हर तरफ एक ही आवाज सुनाई दे रही थी- शहीद कुंदन अमर रहे। तिरंगा यात्रा में शामिल हुए ग्रामीण सेना के जवानों की ओर से अस्थि कलश जनेसरा लाए जाने के बाद ग्रामीणों ने पुष्प अर्पित कर अपने वीर सपूत को श्रद्धांजलि दी। इसके बाद अस्थि कलश को जनेसरा से संदेश की ओर जुलूस के रूप में ले जाया गया। हाथों में तिरंगा थामे युवा, बुजुर्ग और बड़ी संख्या में ग्रामीण बाइक से तिरंगा यात्रा में शामिल हुए। रास्ते भर लोग भारत माता की जय और शहीद कुंदन अमर रहे के नारे लगाते रहे। बारिश भी लोगों के कदम नहीं रोक सकी। हर कोई अपने गांव के उस बेटे को अंतिम विदाई देने के लिए सड़क पर था, जिसने महज 20 साल की उम्र में देश की सेवा करते हुए अपनी जान गंवा दी। संदेश चौक पर उमड़ा जनसैलाब, पुष्पवर्षा कर दी अंतिम विदाई तिरंगा यात्रा जब संदेश चौक पहुंची तो वहां पहले से ही बड़ी संख्या में ग्रामीण और युवा शहीद कुंदन को अंतिम श्रद्धांजलि देने के लिए मौजूद थे। अस्थि कलश के पहुंचते ही लोगों ने पुष्पवर्षा कर वीर जवान को नमन किया। पूरे इलाके में भारत माता की जय और शहीद कुंदन अमर रहे के नारे गूंजने लगे। कई लोग भावुक होकर रो पड़े। अस्थि कलश को देखकर परिजनों और ग्रामीणों की आंखों से आंसू छलक पड़े। गांव के युवाओं ने तिरंगा हाथ में लेकर अपने साथी को अंतिम सलामी दी। इसके बाद शहीद कुंदन के अस्थि कलश को अंतिम संस्कार के लिए रेपुरा स्थित सोन नदी घाट ले जाया गया। यहां सेना के जवानों ने पूरे सैन्य सम्मान के साथ अपने साथी को गार्ड ऑफ ऑनर दिया। सैन्य सम्मान के बीच शहीद कुंदन का अस्थि कलश पंचतत्व में विलीन हो गया। इस दौरान घाट पर मौजूद हर आंख नम थी। 20 साल की उम्र में देश के लिए दी शहादत जनेसरा गांव निवासी भूपेंद्र सिंह के पुत्र कुंदन कुमार दो भाइयों और एक बहन में सबसे छोटे थे। 10 फरवरी को जन्मे कुंदन ने सुहासत-सहदेव +2 विद्यालय, संदेश से इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई की थी। इसके बाद वह आरा में रहकर सेना में भर्ती होने की तैयारी करने लगे। मेहनत के बाद दानापुर कैंट में आयोजित सेना भर्ती रैली में पहले ही प्रयास में उनका चयन हो गया। 29 अप्रैल 2025 को वह थल सेना में शामिल हुए। जबलपुर में प्रशिक्षण लेने के बाद उनकी पहली पोस्टिंग अरुणाचल प्रदेश में हुई थी। कुंदन कुमार पांचवीं ग्रेनेडियर में जवान थे और अरुणाचल प्रदेश के दिबांग वैली जिले के पशुपानी क्षेत्र में तैनात थे। ड्यूटी के दौरान 14 अगस्त 2026 को क्षेत्र में अचानक फ्लैश फ्लड आ गई। तेज बहाव में सेना के पांच जवान लापता हो गए थे। इनमें भोजपुर के कुंदन कुमार भी शामिल थे। घटना के बाद सेना की ओर से लगातार उनकी तलाश की जा रही थी। परिजन भी लगातार उनके सकुशल लौटने की उम्मीद लगाए बैठे थे। 26 अगस्त को मिला था शव, 22 सितंबर को हुई पहचान लगातार तलाश के दौरान 26 अगस्त को एक शव मिलने की सूचना परिजनों को दी गई थी। इसके बाद शव की पहचान के लिए डीएनए जांच कराई गई। 22 सितंबर को डीएनए जांच के माध्यम से शव की पहचान कुंदन कुमार के रूप में हुई। पहचान की पुष्टि होते ही परिवार की वह उम्मीद टूट गई, जिसके सहारे वे करीब डेढ़ महीने से बेटे के लौटने का इंतजार कर रहे थे। शनिवार को जब तिरंगे में लिपटा कुंदन का अस्थि कलश जनेसरा पहुंचा तो पूरे गांव की आंखें नम हो गईं। जिस बेटे ने देश की रक्षा का संकल्प लेकर सेना की वर्दी पहनी थी, उसी बेटे को ग्रामीणों ने तिरंगे के साथ अंतिम विदाई दी। गांव से लेकर संदेश चौक और फिर सोन नदी घाट तक लोगों की भीड़ उनके सम्मान में जुटी रही। महज 20 साल की उम्र में देश के लिए अपना जीवन न्योछावर करने वाले कुंदन की शहादत ने पूरे भोजपुर को गमगीन कर दिया है। गांव में अब भी हर तरफ उसी वीर सपूत की चर्चा है, जिसकी अंतिम यात्रा में बारिश के बीच भी हजारों कदम उसके सम्मान में आगे बढ़ते रहे।

