‘ड्यूटी के तनाव से परेशान रहता था बेटा’:भागलपुर के जवान ने किशनगंज में की खुदकुशी; पिता बोले- अपनी मां को परेशानियां बताता था

‘ड्यूटी के तनाव से परेशान रहता था बेटा’:भागलपुर के जवान ने किशनगंज में की खुदकुशी; पिता बोले- अपनी मां को परेशानियां बताता था

किशनगंज के सदर थाना कैंपस में बिहार पुलिस के एक कांस्टेबल ने खुदकुशी कर ली। उसने सर्विस पिस्टल से अपने सिर में गोली मार कर जान दे दी। मृतक की पहचान भागलपुर जिला के सुल्तानगंज के गंगापुर निवासी समीर कुमार (32) के रूप में हुई है। मौत की खबर रविवार सुबह करीब आठ बजे घर पहुंची, जिसके बाद परिवार में मातम छा गया। समीर के पिता नागेश्वर दास ने बताया कि उनका बेटा ड्यूटी के तनाव और काम के बोझ से परेशान रहता था। वह फोन पर अपनी मां से भी यह परेशानी साझा करता था। नागेश्वर दास रिटायर्ड टीचर हैं। उन्होंने अपने बेटे को पुलिस की वर्दी में देश और समाज की सेवा करते देखने का सपना संजोया था। बेटे की असामयिक मौत ने उनके बुढ़ापे के सहारे को छीन लिया। दो छोटे बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया। घटना से जुड़ी तस्वीरें देखिए… ‘ड्यूटी को लेकर तनाव में रहता था’ पिता के मुताबिक, समीर अक्सर ड्यूटी के तनाव और काम के अत्यधिक बोझ की बात करता था। समीर अपनी मां से फोन पर बात करते समय अपनी परेशानियां साझा करता था। वह कहता था कि ड्यूटी का तनाव बहुत ज्यादा रहता है और उससे काफी काम कराया जाता है। काम के दबाव के कारण वह परेशान रहता था। परिवार के लोग उसकी बातें सुनते थे और उसे समझाने की कोशिश करते थे, लेकिन किसी ने नहीं सोचा था कि एक दिन यही परेशानियां उसकी मौत से जुड़ा सवाल बनकर सामने आएंगी। हालांकि, परिजनों की ओर से ड्यूटी के तनाव और काम के बोझ की बात कही गई है, लेकिन समीर की मौत के पीछे की वास्तविक वजह अभी स्पष्ट नहीं है। घटना की परिस्थितियों और संभावित कारणों का खुलासा पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगा। अगस्त में छुट्टी लेकर आया था घर, फिर ड्यूटी पर लौट गया समीर पिता नागेश्वर दास के मुताबिक, समीर अगस्त में छुट्टी लेकर घर आया था। परिवार के साथ कुछ दिन बिताने के बाद वह अपनी ड्यूटी पर किशनगंज लौट गया। फोन पर नियमित बातचीत होती थी। घर से दूर रहने के बावजूद वह परिवार के संपर्क में रहता था। समस्तीपुर से हुई थी पहली पोस्टिंग समीर कुमार ने इंटरमीडिएट तक पढ़ाई की थी। वर्ष 2015 में उसकी पहली पोस्टिंग समस्तीपुर में हुई थी। इसके बाद उसे मधुबनी में तैनात किया गया और फिर उसकी पोस्टिंग किशनगंज में हुई। इसी दौरान वह परिवार से दूर रहकर अपनी जिम्मेदारियां निभा रहा था। वर्ष 2011 में शादी पूजा कुमारी से हुई थी। उसके परिवार में पत्नी के अलावा दो बच्चे हैं। बेटी तन्नुश्री छठी कक्षा में पढ़ती है, जबकि बेटा आर्यन राज दूसरी कक्षा का छात्र है। की पत्नी बच्चों की पढ़ाई-लिखाई के कारण सुल्तानगंज में ही परिवार के साथ रहती थी। घटना की जानकारी मिलते ही परिजन किशनगंज के लिए रवाना हो गए हैं। घर में रिश्तेदारों और परिचितों का आना-जाना शुरू हो गया। हर कोई परिवार को सांत्वना देने की कोशिश कर रहा है, लेकिन बेटे को खोने का दर्द शब्दों से कम नहीं किया जा सकता। परिजनों ने सरकार से मांगा न्याय, मुआवजे और सरकारी नौकरी की उठाई मांग समीर की मौत से दुखी परिजनों ने सरकार और प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई है। परिवार की मांग है कि घटना की निष्पक्ष जांच कराई जाए और मौत के पीछे की वास्तविक परिस्थितियों का पता लगाया जाए। सरकार की ओर से मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को नौकरी दी जाए। किशनगंज के सदर थाना कैंपस में बिहार पुलिस के एक कांस्टेबल ने खुदकुशी कर ली। उसने सर्विस पिस्टल से अपने सिर में गोली मार कर जान दे दी। मृतक की पहचान भागलपुर जिला के सुल्तानगंज के गंगापुर निवासी समीर कुमार (32) के रूप में हुई है। मौत की खबर रविवार सुबह करीब आठ बजे घर पहुंची, जिसके बाद परिवार में मातम छा गया। समीर के पिता नागेश्वर दास ने बताया कि उनका बेटा ड्यूटी के तनाव और काम के बोझ से परेशान रहता था। वह फोन पर अपनी मां से भी यह परेशानी साझा करता था। नागेश्वर दास रिटायर्ड टीचर हैं। उन्होंने अपने बेटे को पुलिस की वर्दी में देश और समाज की सेवा करते देखने का सपना संजोया था। बेटे की असामयिक मौत ने उनके बुढ़ापे के सहारे को छीन लिया। दो छोटे बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया। घटना से जुड़ी तस्वीरें देखिए… ‘ड्यूटी को लेकर तनाव में रहता था’ पिता के मुताबिक, समीर अक्सर ड्यूटी के तनाव और काम के अत्यधिक बोझ की बात करता था। समीर अपनी मां से फोन पर बात करते समय अपनी परेशानियां साझा करता था। वह कहता था कि ड्यूटी का तनाव बहुत ज्यादा रहता है और उससे काफी काम कराया जाता है। काम के दबाव के कारण वह परेशान रहता था। परिवार के लोग उसकी बातें सुनते थे और उसे समझाने की कोशिश करते थे, लेकिन किसी ने नहीं सोचा था कि एक दिन यही परेशानियां उसकी मौत से जुड़ा सवाल बनकर सामने आएंगी। हालांकि, परिजनों की ओर से ड्यूटी के तनाव और काम के बोझ की बात कही गई है, लेकिन समीर की मौत के पीछे की वास्तविक वजह अभी स्पष्ट नहीं है। घटना की परिस्थितियों और संभावित कारणों का खुलासा पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगा। अगस्त में छुट्टी लेकर आया था घर, फिर ड्यूटी पर लौट गया समीर पिता नागेश्वर दास के मुताबिक, समीर अगस्त में छुट्टी लेकर घर आया था। परिवार के साथ कुछ दिन बिताने के बाद वह अपनी ड्यूटी पर किशनगंज लौट गया। फोन पर नियमित बातचीत होती थी। घर से दूर रहने के बावजूद वह परिवार के संपर्क में रहता था। समस्तीपुर से हुई थी पहली पोस्टिंग समीर कुमार ने इंटरमीडिएट तक पढ़ाई की थी। वर्ष 2015 में उसकी पहली पोस्टिंग समस्तीपुर में हुई थी। इसके बाद उसे मधुबनी में तैनात किया गया और फिर उसकी पोस्टिंग किशनगंज में हुई। इसी दौरान वह परिवार से दूर रहकर अपनी जिम्मेदारियां निभा रहा था। वर्ष 2011 में शादी पूजा कुमारी से हुई थी। उसके परिवार में पत्नी के अलावा दो बच्चे हैं। बेटी तन्नुश्री छठी कक्षा में पढ़ती है, जबकि बेटा आर्यन राज दूसरी कक्षा का छात्र है। की पत्नी बच्चों की पढ़ाई-लिखाई के कारण सुल्तानगंज में ही परिवार के साथ रहती थी। घटना की जानकारी मिलते ही परिजन किशनगंज के लिए रवाना हो गए हैं। घर में रिश्तेदारों और परिचितों का आना-जाना शुरू हो गया। हर कोई परिवार को सांत्वना देने की कोशिश कर रहा है, लेकिन बेटे को खोने का दर्द शब्दों से कम नहीं किया जा सकता। परिजनों ने सरकार से मांगा न्याय, मुआवजे और सरकारी नौकरी की उठाई मांग समीर की मौत से दुखी परिजनों ने सरकार और प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई है। परिवार की मांग है कि घटना की निष्पक्ष जांच कराई जाए और मौत के पीछे की वास्तविक परिस्थितियों का पता लगाया जाए। सरकार की ओर से मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को नौकरी दी जाए।  

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