कलश स्थापना के साथ मां भगवती का आह्वान:सुख-शांति और समृद्धि की हुई कामना, पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा-अर्चना

कलश स्थापना के साथ मां भगवती का आह्वान:सुख-शांति और समृद्धि की हुई कामना, पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा-अर्चना

शारदीय नवरात्र की शुरुआत के साथ ही भागलपुर में भक्ति का माहौल बन गया है। शहर के कचहरी चौक स्थित सत्कार क्लब में पूरे विधि-विधान और वैदिक मंत्रों के साथ कलश स्थापना की गई। यह अनुष्ठान अभिजीत मुहूर्त में संपन्न हुआ। कलश स्थापित कर मां भगवती का आह्वान किया गया। भक्तों ने विश्व कल्याण, सुख-शांति और समृद्धि की कामना की। नवरात्र के पहले दिन मां दुर्गा के पहले स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा हुई। श्रद्धालुओं ने मां के चरणों में झुककर परिवार की खुशहाली और जीवन में सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना की। पंडित विपिन कुमार मिश्रा पिछले 15 सालों से यहां पूजा करा रहे हैं। मां शैलपुत्री को पर्वतराज हिमालय की पुत्री और शक्ति स्वरूपा देवी माना जाता है। उनके एक हाथ में त्रिशूल और दूसरे हाथ में कमल रहता है, जबकि उनका वाहन वृषभ है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां शैलपुत्री की आराधना से जीवन में स्थिरता, धैर्य और सकारात्मकता का संचार होता है। हाथी पर माता का हुआ आगमन इस साल मां दुर्गा का आगमन हाथी पर हुआ है। धार्मिक मान्यताओं में माता का हाथी पर आगमन शुभ संकेत माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि हाथी पर मां का आगमन अच्छी वर्षा, कृषि की समृद्धि और सुख-समृद्धि का प्रतीक होता है। इसी विश्वास के साथ श्रद्धालु मां भगवती से जनकल्याण, खुशहाली और समृद्धि की कामना कर रहे हैं। पंडित विपिन कुमार मिश्रा ने बताया कि मां दुर्गा की आराधना में नवरात्र का हर दिन विशेष महत्व रखता है। इन 9 दिनों में भक्त पूरी श्रद्धा और नियमपूर्वक मां के विभिन्न स्वरूपों की पूजा करते हैं। उन्होंने बताया कि हाथी पर माता के आगमन को धार्मिक परंपराओं में शुभ माना गया है। शारदीय नवरात्र की शुरुआत के साथ ही भागलपुर में भक्ति का माहौल बन गया है। शहर के कचहरी चौक स्थित सत्कार क्लब में पूरे विधि-विधान और वैदिक मंत्रों के साथ कलश स्थापना की गई। यह अनुष्ठान अभिजीत मुहूर्त में संपन्न हुआ। कलश स्थापित कर मां भगवती का आह्वान किया गया। भक्तों ने विश्व कल्याण, सुख-शांति और समृद्धि की कामना की। नवरात्र के पहले दिन मां दुर्गा के पहले स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा हुई। श्रद्धालुओं ने मां के चरणों में झुककर परिवार की खुशहाली और जीवन में सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना की। पंडित विपिन कुमार मिश्रा पिछले 15 सालों से यहां पूजा करा रहे हैं। मां शैलपुत्री को पर्वतराज हिमालय की पुत्री और शक्ति स्वरूपा देवी माना जाता है। उनके एक हाथ में त्रिशूल और दूसरे हाथ में कमल रहता है, जबकि उनका वाहन वृषभ है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां शैलपुत्री की आराधना से जीवन में स्थिरता, धैर्य और सकारात्मकता का संचार होता है। हाथी पर माता का हुआ आगमन इस साल मां दुर्गा का आगमन हाथी पर हुआ है। धार्मिक मान्यताओं में माता का हाथी पर आगमन शुभ संकेत माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि हाथी पर मां का आगमन अच्छी वर्षा, कृषि की समृद्धि और सुख-समृद्धि का प्रतीक होता है। इसी विश्वास के साथ श्रद्धालु मां भगवती से जनकल्याण, खुशहाली और समृद्धि की कामना कर रहे हैं। पंडित विपिन कुमार मिश्रा ने बताया कि मां दुर्गा की आराधना में नवरात्र का हर दिन विशेष महत्व रखता है। इन 9 दिनों में भक्त पूरी श्रद्धा और नियमपूर्वक मां के विभिन्न स्वरूपों की पूजा करते हैं। उन्होंने बताया कि हाथी पर माता के आगमन को धार्मिक परंपराओं में शुभ माना गया है।  

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