ट्रोलिंग पर रेणुका शहाणे बोलीं:नकारात्मकता डिप्रेशन तक पहुंचा सकती है, ‘दुपहिया’ में भूगोल बने स्पर्श बोले- इमेज नहीं, चुनौतीपूर्ण किरदार जरूरी हैं

ट्रोलिंग पर रेणुका शहाणे बोलीं:नकारात्मकता डिप्रेशन तक पहुंचा सकती है, ‘दुपहिया’ में भूगोल बने स्पर्श बोले- इमेज नहीं, चुनौतीपूर्ण किरदार जरूरी हैं

वेब सीरीज ‘दुपहिया’ का दूसरा सीजन नए ट्विस्ट और अंदाज के साथ आने वाला है। स्पर्श श्रीवास्तव एक बार फिर भूगोल के किरदार में नजर आएंगे, लेकिन इस बार उनका अंदाज अलग है। रेणुका शहाणे पुष्पलता के किरदार में कॉमेडी और व्यंग्य के नए रंग दिखाती नजर आएंगी। दैनिक भास्कर से बातचीत में दोनों ने अपने किरदारों, ट्रोलिंग, सोशल मीडिया की नकारात्मकता, आत्मविश्वास और अलग तरह के किरदार चुनने पर बात की। रेणुका ने कहा कि लगातार नकारात्मकता पर ध्यान देने से इंसान डिप्रेशन तक पहुंच सकता है। वहीं स्पर्श ने कहा कि वह इमेज की परवाह करने के बजाय चुनौतीपूर्ण और उत्साहित करने वाले किरदार चुनना पसंद करते हैं। सवाल: स्पर्श, ‘दुपहिया 2’ में आपका किरदार भूगोल एक नए अंदाज में नजर आ रहा है। क्या कभी ऐसा हुआ है कि आपने कुछ और करने की सोची हो, लेकिन जिंदगी आपको किसी और दिशा में ले गई हो? जवाब:स्पर्श: बिल्कुल। मेरी डांस की शुरुआत ‘डोला रे डोला’ से हुई थी। मेरा पहला स्टेज परफॉर्मेंस भी इसी गाने पर था। मेरी मां ने अपने हाथों से अपनी साड़ी से मेरे लिए एक ड्रेस बनाई थी और मैंने वही पहनकर परफॉर्म किया था। मुझे लगता है कि जिंदगी अब एक तरह से पूरा चक्कर लगाकर वहीं आ गई है। आज मैं फिर ‘डोला रे डोला’ पर माधुरी दीक्षित के डांस मूव्स करने की कोशिश कर रहा हूं। यह मेरे लिए बहुत खास है। सवाल: रेणुका जी, पुष्पलता के किरदार में नेतृत्व के साथ-साथ व्यंग्य और कॉमेडी भी है। इसे निभाना कितना आसान या मुश्किल था? जवाब/रेणुका: यह आसान इसलिए था, क्योंकि जो मुझे लिखा हुआ मिला, उसे करने में बहुत मजा आया। हमारे क्रिएटर्स, डायरेक्टर और को-एक्टर्स के साथ काम करना भी अच्छा अनुभव रहा, इसलिए किरदार निभाना आसान हो गया। मुश्किल सिर्फ इतनी थी कि कहीं से भी यह नजर न आए कि मैं शहरी हूं। मैंने इससे पहले ऐसा किरदार नहीं किया था, इसलिए उस देसीपन को बनाए रखना चुनौती थी। सवाल: आपके हालिया प्रोजेक्ट्स में कॉमेडी, व्यंग्य और सर्काज्म का अंदाज देखने को मिल रहा है। क्या यह आपके लिए एक अलग तरह का अनुभव है? जवाब/रेणुका: बिल्कुल। सच कहूं तो मैं लंबे समय से कॉमेडी करना चाहती थी। जब मैंने अपने ब्रेक से पहले काम शुरू किया था, तब भी मेरा मन था कि मुझे अलग तरह के किरदार मिलें। लेकिन कलाकार वही कर सकता है, जिसका उसे अवसर मिलता है। उस समय मुझे ऐसा मौका नहीं मिला। अब जब लोग मुझे इन अलग तरह के किरदारों में स्वीकार कर रहे हैं, तो मुझे बहुत अच्छा लग रहा है। सवाल: स्पर्श, कई कलाकार अपनी एक खास इमेज बनने के बाद उसी तरह के किरदार करने लगते हैं। क्या आपके लिए इमेज से बाहर निकलना एक सोच-समझकर लिया गया फैसला है? जवाब/स्पर्श: एक अभिनेता के तौर पर मैं हमेशा ऐसे किरदारों की तलाश में रहता हूं, जो मुझे उत्साहित करें। ‘दुपहिया’ में मुझे वही उत्साह भरपूर मिला। अगर कोई किरदार मुझे एक्साइट करता है, तो मैं यह नहीं सोचता कि उससे मेरी इमेज कैसी बनेगी। आज का समय ऐसा है, जब दर्शक कलाकारों में वर्सेटिलिटी देखना चाहते हैं। वे चाहते हैं कि एक अभिनेता अलग-अलग किरदार निभाए। अगर मैं बार-बार एक ही तरह का किरदार करूंगा, तो दर्शक भी बोर हो जाएंगे। इसलिए मेरी कोशिश हमेशा यही रहती है कि अपने दर्शकों का मनोरंजन करता रहूं और उसी हिसाब से किरदार चुनूं। सवाल: भूगोल और असल जिंदगी के स्पर्श में क्या समानता और क्या अंतर है? जवाब/स्पर्श: मैं एक इंसान के तौर पर बहुत एक्सट्रीम हूं। या तो बहुत शांत रहता हूं या फिर बहुत ज्यादा बोलता हूं। मेरे व्यक्तित्व का लाउड हिस्सा भूगोल से काफी मिलता है। असल जिंदगी में मैं इतना लाउड नहीं हो सकता, वरना शायद मैं इस तरह यहां बैठकर इंटरव्यू भी नहीं दे पाता। लेकिन भूगोल के रूप में मुझे अपने उस हिस्से को खुलकर दिखाने का मौका मिलता है। वह जिस तरह बैठता है, जिस तरह बात करता है और जिस तरह अपनी बात रखता है, वह मेरे लिए काफी मजेदार है। सवाल: रेणुका जी, इंडस्ट्री में कलाकार के काम, सोच और लुक तक पर लगातार नजर रहती है। ऐसे में आत्मविश्वास और खुद पर भरोसा कितना जरूरी है? जवाब/रेणुका: मेरे हिसाब से आत्मविश्वास बहुत जरूरी है। अगर आपको बहुत ज्यादा तारीफ मिले तो घमंड नहीं करना चाहिए और अगर आलोचना मिले तो उससे निराश भी नहीं होना चाहिए। आपके अंदर इतना आत्मविश्वास होना चाहिए कि आप इन चीजों को जरूरत से ज्यादा महत्व न दें। आलोचना सुननी चाहिए, क्योंकि उसमें कुछ ऐसी बातें हो सकती हैं, जिनसे हम सीख सकते हैं। लेकिन नकारात्मकता को खुद पर हावी नहीं होने देना चाहिए। कई बार लोग बहुत बुरी तरह ट्रोल करते हैं या असहमति बहुत आक्रामक तरीके से जताते हैं। हमें उस पर ज्यादा ध्यान नहीं देना चाहिए। आत्मविश्वास इसलिए जरूरी है, क्योंकि लगातार नकारात्मकता इंसान को प्रभावित कर सकती है। सवाल: आपके लंबे करियर में कई फैंस मिले हैं। ऐसा कोई फैन एनकाउंटर है, जो आज भी आपको खास तौर पर याद है? जवाब/रेणुका: ‘सुरभि’ के समय के फैंस आज भी मुझे याद हैं। उस दौर में लोग चिट्ठियां लिखकर अपनी भावनाएं भेजते थे। कुछ लोगों ने तो खून से भी चिट्ठियां लिखी थीं। उस समय हम सोचते थे कि राजेश खन्ना साहब से उनके फैंस मिलने आते हैं, शायद कभी हमसे मिलने भी कोई आएगा। एक दिन जब ऐसा हुआ तो मुझे समझ ही नहीं आया कि कैसे प्रतिक्रिया दूं। मैं मन ही मन सोच रही थी कि खून बर्बाद मत कीजिए, स्याही से लिखिए। ‘हम आपके हैं कौन’ से जुड़े भी कई फैन मोमेंट्स रहे हैं, जो मेरे लिए बेहद यादगार हैं। कुछ फैंस की प्रतिक्रियाएं इतनी भावुक होती थीं कि उन्हें आज भी याद करके अच्छा लगता है। छोटे बच्चे हों या बुजुर्ग दर्शक, सभी का प्यार अलग था। कुछ बुजुर्ग तो कहते थे कि आपका कार्यक्रम देखने से हमें ऊर्जा और खुशी मिलती है। ऐसे बहुत से फैन मोमेंट्स हैं, जिन्हें मैं कभी नहीं भूल सकती। सवाल: आपके सबसे बड़े फैन और सपोर्ट सिस्टम आशुतोष राणा जी ‘दुपहिया’ के दूसरे सीजन को लेकर क्या सोचते हैं? जवाब/रेणुका: उन्हें ‘दुपहिया’ का पहला सीजन बहुत पसंद आया था। इसलिए वह दूसरे सीजन को देखने के लिए काफी उत्साहित हैं। मुझे उम्मीद है कि उन्हें यह सीजन भी पसंद आएगा।

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