झालावाड़ चुनाव: निर्दलीय और AAP ने बढ़ाई कांग्रेस-बीजेपी की मुश्किल:8 वार्डों पर AAP और एक दर्जन से ज्यादा निर्दलीय

झालावाड़ चुनाव: निर्दलीय और AAP ने बढ़ाई कांग्रेस-बीजेपी की मुश्किल:8 वार्डों पर AAP और एक दर्जन से ज्यादा निर्दलीय

झालावाड़ शहर समेत पूरे जिले में निकाय चुनाव का माहौल अब गली-गली नजर आने लगा है। मतदान में कुछ ही दिन बाकी हैं और 9 व 11 सितंबर को दो चरणों में चुनाव होने हैं। झालावाड़ शहर के चुनावी रण में इस बार निर्दलीय प्रत्याशियों और आम आदमी पार्टी (AAP) ने कई वार्डों में मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है। करीब दो दर्जन से ज्यादा वार्डों में कांग्रेस और भाजपा के उम्मीदवारों के सामने निर्दलीय या AAP प्रत्याशी चुनौती पेश कर रहे हैं। ऐसे में दोनों प्रमुख दलों के लिए अपने परंपरागत वार्डों में भी जीत आसान नहीं मानी जा रही। निर्दलीय और AAP ने बिगाड़ा समीकरण कई वार्डों में निर्दलीय प्रत्याशियों ने जातीय समीकरणों को ध्यान में रखते हुए मैदान में उतरकर भाजपा-कांग्रेस की चिंता बढ़ा दी है। एक ही जाति से जुड़े उम्मीदवारों के आमने-सामने होने से वोटों के बंटवारे की आशंका है। इसका सीधा असर प्रमुख राजनीतिक दलों के उम्मीदवारों के चुनावी गणित पर पड़ सकता है। जिन वार्डों में निर्दलीय प्रत्याशी नहीं हैं, वहां AAP ने अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है। इससे कई सीटों पर मुकाबला सीधे भाजपा-कांग्रेस के बीच न रहकर त्रिकोणीय हो गया है। झालावाड़ में सभापति पद OBC के लिए आरक्षित होने के कारण अध्यक्ष पद को लेकर भी चुनावी रणनीति इसी सामाजिक समीकरण के इर्द-गिर्द तैयार की जा रही है। भाजपा का गढ़, लेकिन इस बार बदले हालात झालावाड़ को हाड़ौती के साथ भाजपा का गढ़ माना जाता है और यह पूर्व मुख्यमंत्री का क्षेत्र भी रहा है। पिछले चुनावों में कई वार्डों में भाजपा-कांग्रेस के बीच मुकाबला काफी हद तक एकतरफा रहा है। मगर इस बार परिसीमन के बाद चुनावी समीकरण बदले हुए नजर आ रहे हैं। भाजपा और कांग्रेस के परंपरागत माने जाने वाले वार्डों में भी निर्दलीय प्रत्याशी कड़ी चुनौती दे रहे हैं। मुस्लिम बहुल वार्डों में कांग्रेस का परंपरागत वोट बैंक माना जाता रहा है, लेकिन नए परिसीमन के बाद दोनों ही प्रमुख दलों के पुराने समीकरण प्रभावित हुए हैं। यही वजह है कि इस बार भाजपा के मजबूत माने जाने वाले वार्ड भी पार्टी के लिए चुनौती बने हुए हैं। वार्ड 5 में भाजपा के प्रदीप सिंह राजावत और वार्ड 7 में कांग्रेस के महेंद्र सिंह निर्विरोध निर्वाचित घोषित हो चुके हैं। वहीं वार्ड 31 में कांग्रेस प्रत्याशी का पर्चा खारिज होने के बाद भाजपा प्रत्याशी के सामने AAP प्रत्याशी मुकाबले में है। शहर में पहले 45 वार्ड थे, लेकिन दो वार्ड कम होने के बाद अब 43 वार्डों में चुनाव होना है। आज शाम के बाद घर-घर संपर्क पर जोर प्रचार के लिए समय कम बचा है, इसलिए उम्मीदवार और उनके समर्थक देर रात तक जनसंपर्क में जुटे हुए हैं। आज शाम से प्रचार पर रोक लगने के बाद उम्मीदवारों के पास घर-घर जाकर मतदाताओं से संपर्क करने का विकल्प रहेगा। ऐसे में अंतिम समय में व्यक्तिगत संपर्क और स्थानीय समीकरण चुनाव परिणाम में अहम भूमिका निभा सकते हैं। BJP-कांग्रेस को भीतरघात की चिंता इस चुनाव में दोनों प्रमुख दलों के सामने बाहरी चुनौती के साथ भीतरघात का खतरा भी है। भाजपा और कांग्रेस ने ज्यादातर वार्डों में नए चेहरों पर दांव लगाया है। कई मजबूत दावेदारों के टिकट कटने के बाद पार्टी के अंदर नाराजगी की स्थिति बनी है। नामांकन दाखिल होने के बाद कुछ प्रभावशाली निर्दलीय दावेदारों को समझौते के जरिए चुनाव मैदान से हटाने में दोनों दल सफल रहे, लेकिन कई वार्डों में निर्दलीय प्रत्याशी अब भी पूरी ताकत के साथ चुनाव लड़ रहे हैं और लगातार जनसंपर्क कर रहे हैं। कांग्रेस जिलाध्यक्ष बोले- 8 निकायों में बनाएंगे बोर्ड कांग्रेस अपनी स्थिति मजबूत बताते हुए जिले की सभी आठ निकायों में जीत का दावा कर रही है। कांग्रेस जिलाध्यक्ष वीरेंद्र सिंह गुर्जर ने कहा कि चुनाव लड़ने के लिए पार्टी के पास बड़ी संख्या में आवेदन आना इस बात का संकेत है कि आमजन भाजपा सरकार से त्रस्त है। उन्होंने कहा कि जिस तरह जनता का रुझान दिखाई दे रहा है, उससे कांग्रेस के पक्ष में एकतरफा लहर नजर आ रही है। तीन नई बनी निकायों में भी लोग बदलाव चाहते हैं। जिलाध्यक्ष ने जिले की सभी आठ निकायों में कांग्रेस की जीत का दावा किया। भाजपा का दावा- सभी निकायों में बनेगा बोर्ड भाजपा जिलाध्यक्ष हर्षवर्धन शर्मा ने भी जिले की सभी निकायों में भाजपा की जीत का दावा किया है। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं का उत्साह, चुनावी रणनीति और पार्टी के सामूहिक प्रयासों के दम पर भाजपा को बहुमत मिलेगा। उन्होंने बताया कि पार्टी के कार्यकर्ता सभी वार्डों में मिलकर चुनाव प्रचार और जनसंपर्क कर रहे हैं। भाजपा जिलाध्यक्ष ने कहा कि पार्टी अपनी जीत को लेकर पूरी तरह आश्वस्त है। दोनों दलों ने पुराने चेहरों पर सीमित भरोसा जताया इस बार भाजपा और कांग्रेस ने कुछ ही पुराने दावेदारों को दोबारा मौका दिया है। कांग्रेस की ओर से फारूक अहमद को फिर टिकट दिया गया है। पूर्व में पार्षद रहे अतीक अहमद का वार्ड महिला होने के कारण उनकी पत्नी ऋचा को प्रत्याशी बनाया गया है। उपचुनाव में पार्षद रहे नफीस को भी दोबारा मौका मिला है। एक वोट से जीत हासिल करने वाले राजीव कुमार, अकबर खान, अंजना बेरवा और प्रियंका मीणा को भी कांग्रेस ने फिर मैदान में उतारा है। कांग्रेस के नगर अध्यक्ष रहे मनोज राजपाल को पूर्व में हार के बावजूद पार्टी ने भरोसा जताते हुए प्रत्याशी बनाया है। इसके अलावा नेहा शर्मा और परमानंद भील को भी दोबारा चुनाव मैदान में उतारा गया है। भाजपा की ओर से राजेंद्र सुमन और निर्विरोध निर्वाचित हुए प्रदीप सिंह राजावत को टिकट दिया गया है। वार्ड 14 में पत्नी की जगह इस बार पति कमल कश्यप को मौका मिला है। भूतपूर्व पार्षद हेमराज कश्यप, बलवीर प्रजापति, रईस चौधरी और इनाम जफर भी भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। पार्टी बदलकर भाजपा में आए सागर कश्यप को भी पार्टी ने प्रत्याशी बनाया है। इनके अलावा भाजपा ने कई अन्य वार्डों में नए और युवा चेहरों पर भरोसा जताया है। इन वार्डों में निर्दलीय और AAP ने बढ़ाई चुनौती झालावाड़ शहर के कई वार्डों में निर्दलीय और AAP प्रत्याशियों ने मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है। वार्ड 3 में AAP प्रत्याशी चुनाव मैदान में है। वार्ड 9 और 13 में निर्दलीय प्रत्याशी मुकाबले में हैं। वार्ड 14 में AAP और निर्दलीय दोनों मैदान में हैं। वार्ड 15, 16 और 17 में निर्दलीय प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे हैं। वार्ड 18 में AAP के साथ निर्दलीय भी मुकाबले में हैं, जबकि वार्ड 19 में AAP प्रमुख चुनौती के रूप में मौजूद है। इसके अलावा वार्ड 22 में AAP, वार्ड 28 में निर्दलीय, वार्ड 32 में AAP और निर्दलीय, वार्ड 33 में AAP के साथ दो निर्दलीय, वार्ड 36 और 39 में निर्दलीय तथा वार्ड 40 में दो निर्दलीय प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। वार्ड 41 में भी निर्दलीय प्रत्याशी मुकाबले में है।

​ 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *