झज्जर के सरकारी कार्यालय में ऑफिस टाइम के दौरान हुक्का का धुआं उड़ने और ताश की बाजी लगने का मामला सामने आया है। इसका वीडियो वायरल होने के बाद सरकारी कार्यालयों की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। मामला जिला मुख्यालय फॉरेस्ट विभाग की सरकारी बिल्डिंग का है, जो झज्जर DFO कार्यालय के पास ही हैं। हैरानी की बात यह है कि कार्यालय समय में ही यहां हुक्का चलने का सिलसिला शुरू हो जाता है। हुक्के के लिए हर सप्ताह कार्यालय में ही उपले (गोसे) मंगाए जाने की बात सामने आई है। करीब 7 रुपये प्रति उपले के हिसाब से बोरा भरकर उपले सरकारी बिल्डिंग में पहुंचाए जाने की चर्चा है। सरकारी भवन में ताश की बाजी भी हुक्के के साथ-साथ सरकारी बिल्डिंग में ताश की बाजी लगने की बात भी सामने आई है। जिला मुख्यालय से सटी बिल्डिंग में रोजाना इस तरह की गतिविधियां चलने की चर्चा के बीच अब वायरल वीडियो ने पूरे मामले को सुर्खियों में ला दिया है। मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि यह गतिविधियां DFO कार्यालय में सामने आई है। एक ओर पर्यावरण विभाग से जुड़े अधिकारी पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हैं, वहीं दूसरी ओर सरकारी भवन में हुक्का जलने की तस्वीरें सामने आने से विभागीय निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। वीडियो वायरल, जिम्मेदारी पर सवाल वीडियो सामने आने के बाद सवाल यह है कि यदि सरकारी कार्यालय में ऑफिस टाइम के दौरान हुक्का और ताश की बाजी चल रही थी, तो संबंधित अधिकारियों को इसकी जानकारी क्यों नहीं हुई? DFO झज्जर की नाक के नीचे यह गतिविधियां चलती रहीं तो निगरानी कौन कर रहा था? सवाल यह भी है कि सरकारी भवन का इस्तेमाल इस तरह की गतिविधियों के लिए कैसे हो रहा है और इसके लिए जिम्मेदारी किस अधिकारी की तय होगी?

