बेंगलुरु। कर्नाटक पुलिस ने पूर्व जेडीएस सांसद प्रज्वल रेवन्ना की जेल बैरक से मोबाइल फोन मिलने के मामले की जांच के लिए डीआईजी स्तर के अधिकारी के नेतृत्व में विशेष टीम गठित की है। प्रज्वल रेवन्ना दुष्कर्म के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे हैं। कारागार विभाग के महानिदेशक आलोक कुमार ने विशेष टीम के गठन की पुष्टि की है। टीम का नेतृत्व डीआईजी कारागार एवं सुधार जिनेंद्र खनागवी करेंगे। टीम को यह जांच सौंपी गई है कि मोबाइल फोन प्रज्वल रेवन्ना की जेल बैरक तक कैसे पहुंचा।
17 सेकंड का एक वीडियो वायरल
टीम यह भी पता लगाएगी कि फोन किसने उन्हें दिया और उन्होंने कितने समय तक उसका इस्तेमाल किया। यह घटनाक्रम उस दिन सामने आया, जब प्रज्वल रेवन्ना को बेंगलुरु सेंट्रल जेल की वीआईपी बैरक से हटाकर अन्य सजायाफ्ता कैदियों वाली सामान्य सेल में भेज दिया गया। यह कार्रवाई उनकी बैरक से मोबाइल फोन बरामद होने की खबर के बाद की गई। प्रज्वल रेवन्ना पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा के पोते और केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी के भतीजे हैं। मामले ने तब तूल पकड़ा, जब सोशल मीडिया पर 17 सेकंड का एक वीडियो वायरल हुआ। वीडियो में प्रज्वल अपनी जेल बैरक के अंदर मोबाइल पर बात करते दिख रहे थे। वीडियो की प्रामाणिकता की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और जेल अधिकारियों ने अब तक इस फुटेज पर आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
वीडियो के बाद उठे सवाल
वायरल वीडियो में प्रज्वल अनिवार्य जेल वर्दी के बजाय रंगीन कपड़े पहने हुए दिख रहे थे। कोठरी में सीलिंग फैन भी लगा दिखाई दे रहा था। वीडियो में उन्हें यह कहते हुए भी सुना गया कि उन्होंने दो दिन पहले भी कॉल किया था। इस वीडियो के बाद सवाल उठे हैं कि सुरक्षा इंतजामों के बावजूद मोबाइल फोन उनकी बैरक तक कैसे पहुंचा और जेल के अंदर से कॉल कैसे की गई। जेल में मोबाइल जैमर लगे होने के बावजूद ऐसा कैसे हुआ, इसकी भी जांच होगी। पुलिस के अनुसार, विशेष टीम यह भी जांच करेगी कि सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद कैदियों की बैरकों तक मोबाइल फोन कैसे पहुंच रहे हैं। जेल के अंदर कथित तौर पर आंध्र प्रदेश का सिम कार्ड मिलने की भी जांच की जाएगी।
जेल लाइब्रेरी में ड्यूटी करने का निर्देश
डीआईजी जिनेंद्र खनागवी ने डीजीपी कारागार आलोक कुमार से मुलाकात कर जांच को लेकर चर्चा की है। टीम यह भी पता लगाएगी कि जेल अधिकारियों की कोई मिलीभगत या लापरवाही तो नहीं थी। यह भी देखा जाएगा कि क्या किसी जेलकर्मी ने फोन रखने या इस्तेमाल करने में मदद की। आलोक कुमार ने कहा कि कड़ी सुरक्षा के बीच कैदियों की कोठरियों तक मोबाइल फोन कैसे पहुंच रहे हैं और क्या जेल अधिकारियों की कोई मिलीभगत है, इसकी भी जांच होगी। मोबाइल फोन बरामद होने के बाद प्रज्वल को अब करीब 20 अन्य कैदियों वाली सेल में रखा गया है, जहां एक ही शौचालय है। उन्हें अनिवार्य जेल वर्दी पहनने और जेल लाइब्रेरी में ड्यूटी करने का निर्देश दिया गया है।
आपत्तिजनक वीडियो भी पाए गए
हाल ही में सेंट्रल क्राइम ब्रांच ने परप्पना अग्रहारा सेंट्रल जेल में छापेमारी की थी। छापेमारी के दौरान प्रज्वल की कोठरी से एक मोबाइल फोन और एक पेन ड्राइव बरामद की गई थी। रिपोर्ट के अनुसार, एक नीला रेडमी 5जी मोबाइल, एक चार्जर, एक नीली पॉकेट नोटबुक और एक काली सैंडिस्क पेन ड्राइव मिली थी। मोबाइल और पेन ड्राइव में आपत्तिजनक वीडियो भी पाए गए। छापेमारी के दौरान 10 से अधिक मोबाइल फोन बरामद किए गए। इनमें से एक फोन कथित तौर पर प्रज्वल रेवन्ना की बैरक से मिला था। फोन में कई ओटीटी एप्लिकेशन भी पाए गए।
गृह मंत्री ने दिया था आदेश
प्रज्वल को वीआईपी सेक्शन से हटाकर सामान्य कैदियों की सेल में भेज दिया गया। वीआईपी सेल में उनके साथ पॉक्सो मामले में गिरफ्तार एक अन्य विचाराधीन कैदी प्रताप राय भी था। आरोप है कि राय प्रज्वल की मदद कर रहा था। कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने कहा कि उन्होंने खुद सीसीबी की छापेमारी का आदेश दिया था। उन्होंने कहा कि छापेमारी के लिए गृह विभाग और मुख्यमंत्री की अनुमति जरूरी होती है। उन्होंने बताया कि उन्होंने दो सप्ताह पहले परप्पना अग्रहारा का दौरा किया था और कुछ खामियां देखी थीं।
इसके बाद मुख्यमंत्री की मंजूरी से छापेमारी का आदेश दिया गया। उन्होंने कहा कि अधिकारियों से मिली जानकारी के आधार पर कार्रवाई की गई और जो अधिकारी अनियमितता में शामिल पाए गए, उन्हें निलंबित करने के निर्देश दिए गए हैं। कारागार डीजीपी आलोक कुमार ने बताया कि लापरवाही के आरोप में सहायक अधीक्षक ईरन्ना को निलंबित किया गया है। वहीं जेल अधीक्षक अंशुकुमार को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।


