जीयू की पूर्व कुलपति पर फंड के अनधिकृत उपयोग, फर्जी नियुक्तियों की जांच को समिति गठित

जीयू की पूर्व कुलपति पर फंड के अनधिकृत उपयोग, फर्जी नियुक्तियों की जांच को समिति गठित

Ahmedabad. गुजरात यूनिवर्सिटी की पूर्व कुलपति डॉ.नीरजा गुप्ता पर कथित वित्तीय अनियमितताओं, अनधिकृत नियुक्तियों और सरकारी अनुदान (फंड) के अनधिकृत इस्तेमाल का आरोप लगा है। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने इन आरोपों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच के लिए गुजरात हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति डी.एम. व्यास की अध्यक्षता में एक सदस्यीय जांच समिति का गठन किया है।

शनिवार को आयोजित संवाददाता सम्मेलन में गुजरात यूनिवर्सिटी के कार्यकारी कुलपति प्रो. जगदीश जोशी ने यह जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि यह समिति कार्रवाई शुरू होने की तारीख से 90 दिनों (तीन महीने) के भीतर अपनी जांच रिपोर्ट सौंपेगी, जिसके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

इन गंभीर आरोपों की होगी जांच

कार्यकारी कुलपति प्रो.जोशी ने बताया कि गुजरात पब्लिक यूनिवर्सिटी एक्ट, 2023 की धारा 43 तथा गुजरात पब्लिक यूनिवर्सिटी यूनिफॉर्म स्टेच्यूट्स, 2024 के स्टेच्यूट्स 291 से 293 के तहत यह एक सदस्यीय जांच समिति गठित की गई है। गुजरात हाईकोर्ट के पूर्व न्यायमूर्ति दीपक एम.व्यास की एक सदस्यीय यह समिति 90 दिनों में अपनी रिपोर्ट देगी।प्रो.जोशी ने बताया कि पूर्व कुलपति डॉ.नीरजा गुप्ता पर उनके कार्यकाल के दौरान अनियमित नियुक्तियां करने का आरोप है। नियमों की पालना बिना की गई नियुक्तियों की वैधता की यह समिति पड़ताल करेगी। इसके अलावा जीयू के फंड का अनधिकृत एवं गलत इस्तेमाल का भी आरोप है, उसकी भी जांच करेगी। कुलपति के पद और अधिकारों के बेजा इस्तेमाल तथा वित्तीय अनियमितताओं का भी आरोप है, उसकी जांच करेगी।

पीएमजेवीके ग्रांट के अनधिकृत उपयोग की भी करेगी जांच

प्रो.जोशी ने बताया कि जीयू को प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम (पीएमजेवीके) की ओर से सेंटर ऑफ जैन मैन्युस्क्रिप्टोलॉजी के लिए 40 करोड़ रुपए की ग्रांट मंजूर हुई है। इसमें से करीब 16 करोड़ की ग्रांट जीयू को मिली है। उस ग्रांट के अनधिकृत उपयोग का पूर्व कुलपति डॉ.नीरजा गुप्ता पर आरोप है, उन आरोपों की यह समिति जांच करेगी। उन पर प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर के रूप में खुद को नियुक्त करने और उसके लिए ऊंचा वेतन लाभ लेने तथा इस सेंटर की राशि में से कुछ राशि उनके बेटे को देने का आरोप है।

प्रो. जोशी ने बताया कि जांच समिति का मुख्य उद्देश्य संबंधित दस्तावेजों, निर्णयों, नियुक्तियों, वित्तीय लेन-देन, मंजूरियों और परिस्थितियों की गहन जांच करना है। उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर समिति यह तय करेगी कि लागू कानूनी प्रावधानों के तहत यूनिवर्सिटी को किसी भी वास्तविक वित्तीय नुकसान या हानि की वसूली के लिए पहली नज़र में कोई मामला बनता है या नहीं। उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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