भोपाल के एक कारोबारी के जीएसटी खाते में सेंध लगाकर फर्जी इनवॉइस अपलोड करने का मामला सामने आया है। खाते में 8 करोड़ 9 लाख 81 हजार 305 रुपए के 989 फर्जी बिल दर्ज किए गए। इनके जरिए करीब 1.46 करोड़ रुपए की जीएसटी चोरी की कोशिश की गई। मामले में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) ने दिल्ली निवासी बसंत कुमार श्रीवास्तव और अन्य के खिलाफ धोखाधड़ी व आईटी एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज की है। खास बात यह है कि कारोबारी का कहना है कि उसने अपना ओटीपी या पासवर्ड किसी को नहीं दिया था, इसके बावजूद खाते में बदलाव कर फर्जी बिल अपलोड कर दिए गए। लॉगिन किया तो पहले से फाइल मिला फरवरी का रिटर्न पीड़ित कारोबारी ने 27 फरवरी 2026 को जीएसटी ग्रीवेंस पोर्टल पर खाते के दुरुपयोग की शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद भोपाल स्थित जीएसटी कार्यालय से अपनी लॉगिन आईडी और पासवर्ड अपडेट करवाए। जब दोबारा खाते में लॉगिन किया, तो पता चला कि फरवरी 2026 का जीएसटीआर-1 पहले ही दाखिल किया जा चुका है। रिटर्न की जांच करने पर भोपाल और राजगढ़ की सात फर्मों के नाम पर 989 फर्जी इनवॉइस अपलोड मिले। इन बिलों की कुल कीमत 8.09 करोड़ रुपए से अधिक बताई गई है। व्यापारी को नोटिस, लेकिन ITC का दावा नहीं फर्जी बिलों के सामने आने के बाद विभाग ने कारोबारी को नोटिस जारी किया है। हालांकि, कारोबारी पहले ही जीएसटी पोर्टल पर शिकायत दर्ज करा चुका था। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, इन सात फर्मों ने अब तक इन बिलों के आधार पर इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) नहीं लिया है। ऐसे में मामला फर्जी बिल अपलोड कर संभावित टैक्स चोरी की कोशिश से जुड़ा है। ऐसे जांचें अपना जीएसटी खाता कारोबारियों को समय-समय पर अपने जीएसटी खाते की जानकारी जांचते रहना चाहिए। लॉगिन के बाद ‘My Profile/Authorized Signatory’ सेक्शन में पंजीकृत मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी की जांच की जा सकती है। वहीं, ‘Services’ में जाकर ‘Returns’ और ‘Return Dashboard’ के जरिए दाखिल जीएसटीआर-1 खोलें। इसके B2B सेक्शन में अपलोड किए गए इनवॉइस देखे जा सकते हैं। यदि खाते में अनजान मोबाइल नंबर, ईमेल या ऐसे बिल दिखाई दें जिन्हें कारोबारी ने अपलोड नहीं किया है, तो इसकी शिकायत तुरंत जीएसटी विभाग के पोर्टल पर दर्ज करानी चाहिए।

