जींद जिले के उचाना में गुरूवार को धान की खरीद और उठान की जानकारी लेने के लिए कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा कपास मंडी में स्थित किसान सेवा केंद्र में पहुंचे। एसडीएम सुमन यादव और मार्केट कमेटी चेयरमैन सुरेंद्र खरकभूरा ने कृषि मंत्री का स्वागत किया। मंडी प्रधान सत्यवान पेगां, दलबीर श्योकंद ने मंडी में उठान नहीं होने की समस्या को रखा। उचाना मंडी पहुंचे कृषि मंत्री ने कांग्रेस पर परिवारवाद को लेकर निशाना साधते हुए कहा कि बैरिकेड्स को दीपेंद्र हुड्डा कंट्रोल कर लें, यह अच्छी बात है। लेकिन असली मुद्दा परिवारवाद का है। पंडित जवाहरलाल नेहरू की पार्टी कांग्रेस में परिवारवाद हावी है। भाजपा में संगठन फैसला लेता है, जबकि कांग्रेस में परिवार फैसला करता है। कृषि मंत्री ने कहा कि किसी नेता के साथ फोटो खिंचवाने से कोई नेता नहीं बन जाता, नेता जनता बनाती है। जनता के बीच जाकर काम करने वाला ही नेता बनता है। कोई नेता किसी को नेता नहीं बनाता। उन्होंने कहा कि भाजपा संगठन के आधार पर चलती है, जबकि कांग्रेस परिवारवाद के आधार पर। यदि पूरे संगठन के फैसले एक परिवार करेगा तो यह गलत होगा, लेकिन जब फैसला पूरा संगठन लेगा तो उसके सही होने की संभावना अधिक होगी। ट्रांसपोर्ट और बारदाने की व्यवस्था दुरुस्त करने में जुटी सरकार कृषि मंत्री ने धान खरीद व्यवस्था को लेकर कहा कि मंडियों में ट्रांसपोर्ट, खरीद एजेंसियों और बारदाने की व्यवस्था को लेकर सरकार गंभीर है। सरकार के मंत्री, विधायक और अधिकारी मंडियों में पहुंचकर किसानों और आढ़तियों की समस्याएं सुन रहे हैं और मौके पर समाधान करने का प्रयास कर रहे हैं। खाद की उपलब्धता पर उन्होंने कहा कि यूरिया, डीएपी, एनपीके और एसएसपी सहित विभिन्न प्रकार के उर्वरक विदेशों से मंगवाने पड़ते हैं। इनकी खरीद के लिए सरकार को पहले से व्यवस्था करनी होती है। उन्होंने दावा किया कि विदेशों में यूरिया की कीमत करीब 3 हजार रुपए तक होने के बावजूद किसानों को यह 266 रुपए में उपलब्ध करवाया जाता है। इसी प्रकार अन्य उर्वरक भी किसानों को सस्ती दरों पर दिए जाते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास रहता है कि किसानों को खाद के लिए परेशानी न उठानी पड़े। राणा बोले- पटेल को 12, कृपलानी को 3 वोट मिले, फिर भी नेहरू बने प्रधानमंत्री कांग्रेस द्वारा वोट चोरी के लगाए जा रहे आरोपों पर कृषि मंत्री ने कहा कि कांग्रेस को अपने इतिहास और चुनावी हार के कारणों पर आत्ममंथन करना चाहिए। उन्होंने वर्ष 1946 में कांग्रेस के नेतृत्व को लेकर हुए घटनाक्रम का जिक्र करते हुए दावा किया कि सरदार वल्लभभाई पटेल को 12 और जेबी कृपलानी को 3 वोट मिले थे। जबकि जवाहरलाल नेहरू को एक भी वोट नहीं मिला था। इसके बावजूद नेहरू प्रधानमंत्री बने। उन्होंने इसे कांग्रेस के इतिहास से जोड़ते हुए कहा कि पार्टी को पहले अपने अतीत पर नजर डालनी चाहिए। ‘हार के लिए कभी दूसरों को जिम्मेदार नहीं ठहराया’ श्याम सिंह राणा ने कहा कि वर्ष 2024 से पहले भी कांग्रेस कई चुनाव हार चुकी है। ऐसे में हर हार के लिए वोट चोरी को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि एसआईआर का उद्देश्य मतदाता सूची में सही मतदाताओं के नाम सुनिश्चित करना है। कांग्रेस को आरोप लगाने के बजाय अपनी कमियों को पहचानकर उनमें सुधार करना चाहिए। कृषि मंत्री ने कहा कि उन्होंने स्वयं 8 चुनाव लड़े हैं और 2 चुनावों में जीत हासिल की है। उन्होंने कभी अपनी हार के लिए किसी दूसरे को जिम्मेदार नहीं ठहराया, बल्कि इसे अपनी तपस्या और प्रयासों में कमी के रूप में देखा। उन्होंने कहा कि किसी भी पार्टी या नेता को आगे बढ़ने के लिए आत्ममंथन और सुधार करना जरूरी है।

