जापान में तिरंगा लहराकर लौटा जमुई का लाल:गोल्ड मेडलिस्ट शैलेश बोले- पैर कमजोर है, हौसला नहीं, अब ओलंपिक में जीतना है

जापान में तिरंगा लहराकर लौटा जमुई का लाल:गोल्ड मेडलिस्ट शैलेश बोले- पैर कमजोर है, हौसला नहीं, अब ओलंपिक में जीतना है

जापान की धरती पर दो गोल्ड मेडल जीतकर देश का मान बढ़ाने वाले जमुई के पैरा एथलीट शैलेश कुमार गांव पहुंचे तो पूरा गांव झूम उठा। नीली हुडी और गले में चमकते दो गोल्ड मेडल पहने शैलेश का ग्रामीणों ने फूल-मालाओं से भव्य स्वागत किया। दैनिक भास्कर से खास बातचीत में उन्होंने अपने सफर की कहानी बताई। पहली बार जापान में खेला, ठंड में भी किया कमाल शैलेश ने कहा, “ये सफर बहुत अच्छा रहा। मैं फर्स्ट टाइम जापान में खेला। वहां मौसम काफी ठंडा था, लेकिन मैंने ठंड में भी कड़ी ट्रेनिंग की थी, इसलिए परफॉर्मेंस अच्छी रही। मेरा टारगेट पिछले बार की तरह इस बार भी गोल्ड लाना था और मैं उसमें सफल रहा। देश के लिए मेडल जीतकर बहुत खुश हूं।” गांव लौटकर मिला सुकून गांव में मिले प्यार पर भावुक होते हुए शैलेश बोले, “जब आप दुनिया जीतकर अपने गांव लौटते हैं तो अलग ही फील होता है, सुकून मिलता है। ज्यादातर समय ट्रेनिंग में रहने से लोगों से मिल नहीं पाता, लेकिन ऐसे मौके पर सब एक साथ जुड़ते हैं। ये पल मेरे लिए अनमोल है।” मौके से आई तस्वीरें….
पैर नहीं, हौसला मायने रखता है अपनी सबसे बड़ी चुनौती पर उन्होंने बेहद बड़ी बात कही। “मेरा एक पैर ठीक नहीं है, यही सबसे बड़ी चुनौती थी। लेकिन मैंने कभी इसे चुनौती माना ही नहीं। अगर इसे चुनौती मान लेता तो आज इतने मेडल नहीं जीत पाता। लाइफ में अप-डाउन आते हैं, बस लाइफ को जीना है, मजे से ट्रेनिंग करनी है और देश के लिए मेडल जीतना है। मैं रिकॉर्ड के पीछे नहीं भागता, अच्छी ट्रेनिंग करूंगा तो रिकॉर्ड अपने आप बनेंगे।” परिवार और सरकार को दिया सफलता का श्रेय शैलेश ने अपनी सफलता का श्रेय परिवार और सरकार को दिया। “मैं सबसे पहले अपनी फैमिली, मम्मी-पापा को थैंक्यू बोलूंगा जिन्होंने शुरू से सपोर्ट किया। मेरे गुरु, स्कूल के टीचर, मेरे दोस्त, बिहार सरकार और पीएम सर को भी धन्यवाद, जो पैरा स्पोर्ट्स में काफी इंटरेस्ट लेते हैं। इन सबके सपोर्ट से ही ये संभव हुआ है।” वर्ल्ड चैंपियनशिप और ओलंपिक है अगला टारगेट

आगे की योजना पर शैलेश ने कहा, “अगले साल वर्ल्ड चैंपियनशिप है और 2028 में ओलंपिक गेम्स हैं। ये दो साल में दो सबसे बड़े कॉम्पिटिशन हैं। मेरा लक्ष्य वहां देश के लिए मेडल जीतना और दुनिया को राष्ट्रगान सुनाना है।”

पटना में सीएम, डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी और खेल मंत्री से मुलाकात पर उन्होंने कहा, “सभी ने मोटिवेट किया, बधाई दी और कहा – आप जैसे खिलाड़ी बिहार के गौरव हैं। उनका आशीर्वाद मिला कि अभी और अच्छा करना है।” जापान की धरती पर दो गोल्ड मेडल जीतकर देश का मान बढ़ाने वाले जमुई के पैरा एथलीट शैलेश कुमार गांव पहुंचे तो पूरा गांव झूम उठा। नीली हुडी और गले में चमकते दो गोल्ड मेडल पहने शैलेश का ग्रामीणों ने फूल-मालाओं से भव्य स्वागत किया। दैनिक भास्कर से खास बातचीत में उन्होंने अपने सफर की कहानी बताई। पहली बार जापान में खेला, ठंड में भी किया कमाल शैलेश ने कहा, “ये सफर बहुत अच्छा रहा। मैं फर्स्ट टाइम जापान में खेला। वहां मौसम काफी ठंडा था, लेकिन मैंने ठंड में भी कड़ी ट्रेनिंग की थी, इसलिए परफॉर्मेंस अच्छी रही। मेरा टारगेट पिछले बार की तरह इस बार भी गोल्ड लाना था और मैं उसमें सफल रहा। देश के लिए मेडल जीतकर बहुत खुश हूं।” गांव लौटकर मिला सुकून गांव में मिले प्यार पर भावुक होते हुए शैलेश बोले, “जब आप दुनिया जीतकर अपने गांव लौटते हैं तो अलग ही फील होता है, सुकून मिलता है। ज्यादातर समय ट्रेनिंग में रहने से लोगों से मिल नहीं पाता, लेकिन ऐसे मौके पर सब एक साथ जुड़ते हैं। ये पल मेरे लिए अनमोल है।” मौके से आई तस्वीरें….
पैर नहीं, हौसला मायने रखता है अपनी सबसे बड़ी चुनौती पर उन्होंने बेहद बड़ी बात कही। “मेरा एक पैर ठीक नहीं है, यही सबसे बड़ी चुनौती थी। लेकिन मैंने कभी इसे चुनौती माना ही नहीं। अगर इसे चुनौती मान लेता तो आज इतने मेडल नहीं जीत पाता। लाइफ में अप-डाउन आते हैं, बस लाइफ को जीना है, मजे से ट्रेनिंग करनी है और देश के लिए मेडल जीतना है। मैं रिकॉर्ड के पीछे नहीं भागता, अच्छी ट्रेनिंग करूंगा तो रिकॉर्ड अपने आप बनेंगे।” परिवार और सरकार को दिया सफलता का श्रेय शैलेश ने अपनी सफलता का श्रेय परिवार और सरकार को दिया। “मैं सबसे पहले अपनी फैमिली, मम्मी-पापा को थैंक्यू बोलूंगा जिन्होंने शुरू से सपोर्ट किया। मेरे गुरु, स्कूल के टीचर, मेरे दोस्त, बिहार सरकार और पीएम सर को भी धन्यवाद, जो पैरा स्पोर्ट्स में काफी इंटरेस्ट लेते हैं। इन सबके सपोर्ट से ही ये संभव हुआ है।” वर्ल्ड चैंपियनशिप और ओलंपिक है अगला टारगेट

आगे की योजना पर शैलेश ने कहा, “अगले साल वर्ल्ड चैंपियनशिप है और 2028 में ओलंपिक गेम्स हैं। ये दो साल में दो सबसे बड़े कॉम्पिटिशन हैं। मेरा लक्ष्य वहां देश के लिए मेडल जीतना और दुनिया को राष्ट्रगान सुनाना है।”

पटना में सीएम, डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी और खेल मंत्री से मुलाकात पर उन्होंने कहा, “सभी ने मोटिवेट किया, बधाई दी और कहा – आप जैसे खिलाड़ी बिहार के गौरव हैं। उनका आशीर्वाद मिला कि अभी और अच्छा करना है।”  

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