केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल ने शुक्रवार को कहा कि जल संरक्षण एक साझा जिम्मेदारी है और ‘भारत अंतरराष्ट्रीय जल सप्ताह’ (आईआईडब्ल्यूडब्ल्यू) के दौरान रखे गए विचारों और प्रौद्योगिकियों को धरातल पर ठोस परियोजनाओं के रूप में लागू किया जाना चाहिए। यहां भारत मंडपम में पाटिल ने भारत अंतरराष्ट्रीय जल सप्ताह के नौवें संस्करण के समापन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि कार्यक्रम के दौरान हुए विचार-विमर्श से तीन महत्वपूर्ण बातें सामने आई हैं-जल संरक्षण में जनभागीदारी का महत्व, विज्ञान एवं नयी प्रौद्योगिकी का लाभ जमीनी स्तर तक पहुंचाना और देशों तथा संस्थानों के बीच सहयोग को मजबूत करना। पाटिल ने कहा, ‘‘जल सुरक्षा केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है।
यह हम सभी की साझा जिम्मेदारी है।’’
उन्होंने कहा कि जल जीवन मिशन, नमामि गंगे, स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) और जल संचय जन भागीदारी जैसी पहल से मिले अनुभव बताते हैं कि जब सरकार और समाज मिलकर काम करते हैं, तो ठोस परिणाम हासिल किए जा सकते हैं। पाटिल ने कहा कि कार्यक्रम में विज्ञान, कार्यप्रणाली, डेटा और नयी प्रौद्योगिकी की भूमिका पर भी चर्चा की गई। उन्होंने कहा कि ऐसी प्रौद्योगिकियां केवल प्रस्तुतियों और चर्चाओं तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इन्हें बड़े पैमाने पर धरातल पर लागू किया जाना चाहिए।

