जयपुर। डीएपी-यूरिया की किल्लत, खाद की तय कीमत से अधिक वसूली और खाद के साथ कथित तौर पर अन्य सामान या दवाइयां लेने के लिए किसानों को मजबूर किए जाने के विरोध में आंदोलन कर रहे नरेश मीणा का बुधवार को जयपुर कूच फिलहाल टल गया। पुलिस प्रशासन ने उन्हें बरखेड़ा-चन्दलाई टोल पर रोक दिया। इसके बाद कई घंटे तक मौके पर तनावपूर्ण स्थिति बनी रही और टोंक रोड पर करीब 5 किलोमीटर लंबा जाम लग गया।
नरेश मीणा बुधवार को बड़ी संख्या में समर्थकों के साथ जयपुर की ओर रवाना हुए थे। प्रशासन ने उन्हें रोकने के लिए टोल के आसपास बैरिकेडिंग की थी। मौके पर वाटर कैनन के साथ एसटीएफ और आरएसी के सैकड़ों जवान तैनात किए गए। कूच रोके जाने के कारण टोंक रोड पर यातायात व्यवस्था भी प्रभावित हुई। करीब पांच घंटे तक वाहनों की कतार लगी रही।
स्थिति को देखते हुए कृषि विभाग के आयुक्त नरेश कुमार गोयल बरखेड़ा-चन्दलाई टोल पहुंचे। उन्होंने नरेश मीणा और आंदोलनकारियों से किसानों की मांगों को लेकर बातचीत की। वार्ता में खाद की उपलब्धता, तय कीमत पर बिक्री और टैगिंग सहित किसानों से जुड़े अन्य मुद्दों पर चर्चा हुई। देर शाम प्रशासन और आंदोलनकारियों के बीच सहमति बनी। इसके बाद रात करीब 8:30 बजे नरेश मीणा अपने समर्थकों के साथ वापस गांव के लिए रवाना हो गए।
CMO स्तर पर वार्ता, चार दिन का आश्वासन
नरेश मीणा ने बताया कि CMO स्तर के अधिकारियों के साथ भी वार्ता हुई है। अधिकारियों ने किसानों की खाद संबंधी समस्या का समाधान चार दिन में करने का आश्वासन दिया है। हालांकि, जयपुर कूच रुकने के बावजूद उन्होंने आंदोलन खत्म करने की घोषणा नहीं की है। उन्होंने कहा कि उनका आमरण अनशन गांव में भी जारी रहेगा। उनका कहना है कि जब तक कोई किसान उनके पास आकर यह नहीं कहता कि खाद की समस्या दूर हो गई है, तब तक वह अनशन जारी रखेंगे।
बारां से शुरू की थी पदयात्रा
नरेश मीणा ने किसानों की समस्याओं को लेकर बारां से जयपुर तक पदयात्रा शुरू की थी। इस दौरान उन्होंने खाद की उपलब्धता और किसानों से जुड़ी अन्य समस्याओं को लेकर आमरण अनशन भी किया। मंगलवार को यात्रा टोंक पहुंची थी। यहां किसानों को संबोधित करते हुए उन्होंने जयपुर पहुंचकर शहीद स्मारक पर आंदोलन करने की घोषणा की थी। इसी के तहत बुधवार को जयपुर कूच किया गया था।
ये हैं प्रमुख मांगें
पर्याप्त खाद आपूर्तिः किसानों को जरूरत के अनुसार समय पर पर्याप्त मात्रा में खाद मुहैया कराई जाए।
तय दर पर बिक्रीः निर्धारित कीमत पर ही खाद की बिक्री की जाए।
टैगिंग पर रोकः खाद के कट्टों के साथ जबरन कोई भी अतिरिक्त सामान या दवाई (टैगिंग) न बेची जाए।
दिन में बिजली सप्लाईः खेती-किसानी के लिए किसानों को दिन के समय पर्याप्त बिजली दी जाए।

